भारत-इजरायल की दोस्ती: क्या हम अब वैश्विक 'पावर सेंटर' वाले मोहल्ले के दादा बनने वाले हैं?
सुबह की चाय की चुस्कियों के साथ, जब हम देश-दुनिया की ख़बरों पर नज़र डालते हैं, तो अकसर 'महंगाई' और 'पड़ोसी' वाले मुद्दे टॉप पर रहते हैं। लेकिन जनाब, अब ज़रा ग्लोबल मैप पर भी निगाह डालिए, क्योंकि भारत और इजरायल की दोस्ती कोई मामूली 'ब्रोमांस' नहीं रही! पीएम मोदी के प्रस्तावित इजरायल दौरे से पहले, वहां के एक्सपर्ट्स ने जो कहा है, वो सुनकर अपने 'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी' के प्रोफेसर्स भी चकरा गए हैं। बात ये है कि भारत-इजरायल की ये बढ़ती नज़दीकी अब वैश्विक रक्षा रणनीति का नया 'पावर सेंटर' बनती दिख रही है। मतलब, अब हम सिर्फ 'सॉफ्ट पावर' नहीं, 'सुपर-सॉफ्ट-पावर-विद-सम-हार्ड-शस्त्र' वाले क्लब में एंट्री मार रहे हैं। आम भारतीय के लिए इसका सीधा मतलब है कि अब हमारी 'गली' में कोई आंख उठाकर नहीं देखेगा, और पड़ोसियों के कान खड़े होना तो तय है!
जब 'नॉन-अलाइनमेंट' से 'ऑल-अलाइनमेंट' की ओर बढ़ा भारत
एक वक्त था, जब हम 'नॉन-अलाइनमेंट' की माला जपते थे, यानी किसी गुट में नहीं। लेकिन अब लगता है, हमने 'ऑल-अलाइनमेंट' का नया मंत्र फूंक दिया है! इजरायल के साथ हमारी दोस्ती पुरानी है, लेकिन पिछले कुछ सालों में इसने 'तेरी-मेरी दोस्ती, सबसे प्यारी' वाला रूप ले लिया है। ड्रोन से लेकर मिसाइल टेक्नोलॉजी तक, इजरायल हमारा भरोसेमंद पार्टनर बन गया है। अब इजरायली थिंक टैंक के एक सीनियर फेलो, डॉ. शॉन स्टीन, ने तो साफ कह दिया है कि इजरायल भारत को 'विश्व शक्ति' के रूप में देखता है। उन्होंने ये भी कहा कि भारत अब सिर्फ 'उपभोक्ता' नहीं, बल्कि 'सहयोगी' और 'उत्पादक' भी बन रहा है। मानो, इजरायल कह रहा हो, "भारत, तुम सिर्फ हमारे हथियार खरीदो मत, हमारे साथ मिलकर दुनिया को दिखाओ कि असली 'दम' किसमें है!"
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया यूक्रेन-रूस युद्ध और गाजा में चल रहे संघर्ष से कराह रही है। ऐसे में भारत का यह नया 'पावर सेंटर' वाला अवतार कुछ देशों को 'अरे, ये कब हुआ?' वाली फीलिंग दे रहा होगा। सोशल मीडिया पर तो मीम्स की बाढ़ आ गई है, एक तरफ 'जय जवान, जय किसान' के साथ 'जय इजरायल' जोड़ा जा रहा है, तो दूसरी तरफ कुछ लोग 'शांतिदूत' भारत की इस 'रक्षा-दोस्ती' पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। सरकार की तरफ से तो यही संदेश है कि यह सब 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' की दिशा में एक कदम है, जहां हम सिर्फ खरीदना नहीं, बनाना भी चाहते हैं।
क्या यह सिर्फ 'होपियम' है या वाकई 'ग्लोबल गेमचेंजर'?
तो सवाल ये है कि क्या यह सिर्फ इजरायली एक्सपर्ट्स का 'होपियम' है, या वाकई भारत अब वैश्विक मंच पर 'गेमचेंजर' बनने को तैयार है? इस दोस्ती का असर हमारी विदेश नीति पर तो दिखेगा ही, रक्षा बजट भी शायद 'जिम' जाकर थोड़ा और 'मस्कुलर' हो जाए। राजनीति में भी इसे खूब भुनाया जाएगा – "देखो, दुनिया हमारी मुट्ठी में!" लेकिन असली चुनौती ये है कि क्या हम सिर्फ 'खरीददार' से 'सह-निर्माता' बनकर रुकेंगे, या फिर खुद की रिसर्च और डेवलपमेंट में इतनी जान डालेंगे कि दुनिया हमारी तरफ देखे?
फिलहाल तो ऐसा लग रहा है कि भारत अब सिर्फ 'अंकल सैम' या 'चाचा ड्रैगन' के पीछे खड़े होने वाला बच्चा नहीं रहा। वो अपनी अलग ही 'टीम' बना रहा है, जहां इजरायल जैसा 'टेक-गुरु' उसका पार्टनर है। यह ट्रेंड है या सिर्फ एक और 'भारतीय ड्रामा एपिसोड', ये तो वक्त बताएगा। लेकिन एक बात तय है, दुनिया अब भारत को सिर्फ 'योग' और 'मसालों' के लिए नहीं, बल्कि 'मिसाइलों' और 'ड्रोन' के लिए भी गंभीरता से लेगी। अब हमारी 'फटी हुई जींस' वाले पड़ोसी हमें 'अंडरएस्टीमेट' नहीं कर पाएंगे!
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