ब्राजील के राष्ट्रपति की तारीफें: क्या भारत सच में 'विश्वगुरु' बन गया, या बस 'ब्रांड इंडिया' का ग्लोबल प्रमोशन है?
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा ने हाल ही में भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने अपनी दिल्ली की पहली यात्रा और अब की यात्रा के बीच 'जमीन-आसमान' का फर्क बताया। ये खबर सुनते ही भारत के हर उस नागरिक के चेहरे पर एक संतोषजनक मुस्कान तैर गई, जो सुबह-शाम 'विश्वगुरु' बनने के सपने देखता है। आखिर कोई विदेशी नेता जब हमारे देश की तारीफ करता है, तो वो सिर्फ तारीफ नहीं होती, वो हमारे 'ब्रांड इंडिया' को ग्लोबल स्टेज पर मिलने वाला 'वैल्यू फॉर मनी' प्रमोशन होता है, बिलकुल किसी इंटरनेशनल इन्फ्लुएंसर के हमारे लोकल प्रोडक्ट को एंडोर्स करने जैसा!
जब लूला ने देखा, 'बदला हुआ' भारत!
याद है, वो दौर जब 'नमस्ते' बोलने से पहले लोग दो बार सोचते थे कि कहीं कोई 'फॉरेन एक्सचेंज' वाला गलत मतलब न निकाल ले? लूला डा सिल्वा ने बताया कि जब वे पहली बार दिल्ली आए थे, तब चीजें कुछ और थीं। अब उन्हें भारत एक 'बड़ा खिलाड़ी' और 'अहम शक्ति' के रूप में दिख रहा है। उनकी मानें तो भारत ने 'आर्थिक और सामाजिक' दोनों मोर्चों पर गजब की प्रगति की है। अब भैया, अगर ब्राजील के राष्ट्रपति कह रहे हैं, तो मान ही लो! वो भी ऐसे समय में जब हम अपनी 'अमृत काल' की यात्रा पर हैं और दुनिया को 'वसुधैव कुटुंबकम्' का पाठ पढ़ा रहे हैं। ऐसे में उनकी तारीफें हमारे राष्ट्रीय गौरव के गुब्बारे में और हवा भर देती हैं, और क्यों न भरें? आखिर हर कोई चाहता है कि उसकी 'तरक्की' को कोई तो नोटिस करे!
सोशल मीडिया पर तो जैसे मीम्स और 'प्राउड इंडियन' वाले स्टेटस की बाढ़ आ गई है। 'देखो, दुनिया मान रही है!' 'विकास पुरुष जिंदाबाद!' 'अब तो मानोगे?' जैसे कमेंट्स की भरमार है। सरकार के लिए तो ये किसी दिवाली बोनस से कम नहीं। एक तरफ विपक्ष 'महंगाई, बेरोजगारी' का राग अलापता रहता है और दूसरी तरफ विदेशी मेहमान आकर 'ऑल इज वेल' का सर्टिफिकेट दे जाते हैं। ऐसे में जनता भी सोचती है, 'यार, कहीं हम ही तो गलत नहीं देख रहे?'
तारीफों का गणित: कूटनीति या हकीकत?
अब सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ कूटनीतिक शिष्टाचार है, या वाकई लूला डा सिल्वा को भारत में कुछ ऐसा दिख गया है जो बाकी दुनिया को नहीं दिख रहा? या शायद वो बस हमारे 'सॉफ्ट पावर' की लहर में बह रहे हैं, जैसे किसी इंस्टाग्राम रील पर अचानक वायरल हो जाने वाले गाने की धुन पर? ये तारीफें हमें अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक मजबूत इमेज तो देती हैं, लेकिन क्या ये जमीनी हकीकत को भी उतनी ही मजबूती से दर्शाती हैं? या फिर ये बस एक और 'भारतीय ड्रामा एपिसोड' है, जहां विदेशी मेहमानों की तारीफें हमारे आत्म-मुग्धता के गुब्बारे को और फुला देती हैं? इन तारीफों से कहीं हमारी थाली में रोटी सस्ती तो नहीं हो जाएगी, या पेट्रोल का दाम कम हो जाएगा? खैर, ये सब तो 'फालतू' की बातें हैं। असली बात तो ये है कि 'ब्रांड इंडिया' चमक रहा है, और अब तो ब्राजील भी मान रहा है!
तो अगली बार जब कोई कहे कि 'भारत बदल रहा है', तो याद रखना कि ये सिर्फ देश के अंदर की बात नहीं, अब तो विदेश से भी सर्टिफिकेट आ रहे हैं। बस उम्मीद है कि ये तारीफें सिर्फ 'हेडलाइन' तक सीमित न रहें, बल्कि उन 'ग्राउंड लेवल' की हकीकतों में भी नजर आएं, जिनके लिए हम आज भी संघर्ष कर रहे हैं। बाकी, 'तारीफें तो होती रहेंगी, काम भी होता रहेगा', या शायद सिर्फ तारीफें ही...
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