ईरान इजरायल युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब हवाई यात्रा पर भी स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। इस भू-राजनीतिक संकट ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव ला दिया है, जिसका सीधा प्रभाव एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर पड़ा है। इसी कड़ी में, भारत की प्रमुख एयरलाइन एयर इंडिया ने टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का ऐलान किया है, जिससे आम यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय एयरलाइंस ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए में लगभग 15% की वृद्धि की है, जो जल्द ही टिकटों पर दिखाई देगी।
हवाई यात्रा पर मिडिल ईस्ट संकट की मार: एयर इंडिया का फ्यूल सरचार्ज ऐलान
मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच गहराते संघर्ष का असर वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजारों पर पड़ रहा है। विशेष रूप से, होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। एविएशन इंडस्ट्री के लिए जेट फ्यूल सबसे बड़ा परिचालन खर्च होता है, जो कुल लागत का 30-40% हिस्सा होता है। तेल की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि ने एयरलाइंस के बजट को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसके परिणामस्वरूप कई कंपनियों ने अपने वित्तीय अनुमान वापस ले लिए हैं और टिकटों के दाम बढ़ा दिए हैं।
एयर इंडिया ने घोषणा की है कि वह 12 मार्च से घरेलू उड़ानों के टिकटों पर 399 रुपये का फ्यूल सरचार्ज लगाएगी। इसका अर्थ है कि अब यात्रियों को अपनी हवाई यात्रा के लिए अतिरिक्त 399 रुपये चुकाने होंगे। यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 93 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो कुछ समय पहले 120 डॉलर प्रति बैरल तक भी जा चुकी थी।
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वैश्विक एयरलाइंस पर बढ़ता दबाव और किराए में वृद्धि
यह संकट केवल भारतीय एयरलाइंस तक सीमित नहीं है। एशिया और दुनिया भर की प्रमुख एयरलाइंस कंपनियां भी इस दबाव का सामना कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एयर न्यूजीलैंड, हांगकांग एयरलाइंस, क्वांटास और एसएएस (SAS) जैसी कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने भी बढ़ती लागत के कारण अपने टिकटों के दाम बढ़ा दिए हैं। कुछ कंपनियां तो अपने विमानों को ग्राउंडेड करने की योजना पर भी विचार कर रही हैं, ताकि परिचालन लागत को कम किया जा सके। जानकारों का मानना है कि यह 1970 के दशक के बाद का सबसे बड़ा तेल संकट हो सकता है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था और विशेष रूप से एविएशन सेक्टर के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी कर रहा है।
एयरलाइंस कंपनियों का कहना है कि यदि जेट फ्यूल यानी एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले दिनों में फ्लाइट के टिकट और भी महंगे हो सकते हैं। ऑपरेशन चलाने की लागत तेजी से बढ़ने के कारण, किराया बढ़ाना उनके लिए एकमात्र विकल्प बचा है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध का असर सप्लाई चेन पर लगातार पड़ रहा है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव जारी है।
यह स्थिति हवाई यात्रियों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि यात्रा अब पहले से कहीं अधिक महंगी हो सकती है। विमानन उद्योग को इस संकट से निपटने के लिए नई रणनीतियाँ बनानी होंगी, जबकि यात्रियों को भी आने वाले समय में हवाई यात्रा के लिए अधिक भुगतान करने की तैयारी करनी होगी। इस भू-राजनीतिक तनाव का समाधान ही तेल की कीमतों में स्थिरता ला सकता है, जिससे एविएशन सेक्टर और यात्रियों को राहत मिल सके।
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