इजरायल-ईरान युद्ध से ठप हुआ इटावा का बासमती चावल निर्यात, करोड़ों का माल फंसा

इजरायल-ईरान युद्ध के कारण गुजरात के बंदरगाहों पर फंसा इटावा का बासमती चावल, निर्यात प्रभावित

इटावा, उत्तर प्रदेश। इजरायल और ईरान के बीच चल रहे मौजूदा भू-राजनीतिक संघर्ष का सीधा असर अब इटावा जिले के बासमती चावल निर्यात कारोबार पर दिखाई देने लगा है। क्षेत्र के चावल निर्यातकों का अनुमानित 25 से 30 करोड़ रुपये का बासमती चावल गुजरात के गांधी धाम बंदरगाह पर फंसा हुआ है, जिससे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका सता रही है। करीब 300 करोड़ रुपये का यह वार्षिक कारोबार इस समय अनिश्चितता के भंवर में फंसा हुआ है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन गया है।

जनपद इटावा से बासमती चावल मुख्य रूप से ईरान और अन्य खाड़ी देशों को निर्यात किया जाता है। वर्तमान अंतरराष्ट्रीय हालात के चलते जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके साथ ही भुगतान प्रक्रिया में भी अप्रत्याशित देरी हो रही है, जिसने निर्यातकों की चिंता और बढ़ा दी है। व्यापारियों का स्पष्ट कहना है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो इस महत्वपूर्ण कृषि-आधारित कारोबार पर गहरा और दीर्घकालिक असर पड़ेगा।

बासमती चावल निर्यात: गहराता संकट और समाधान की उम्मीद

उत्तर प्रदेश राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष और जाने-माने चावल निर्यातक दीपक गुप्ता ने इस गंभीर स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि, "हमारा बासमती चावल गुजरात के गांधी धाम बंदरगाह पर लोडिंग का इंतजार कर रहा है। ईरान में सामान्य हालात न होने से शिपमेंट रुके हुए हैं और सबसे बड़ी चिंता यह है कि भुगतान भी अटक सकता है। यदि इस समस्या का त्वरित समाधान नहीं हुआ तो व्यापारियों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा।" उन्होंने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।

भरथना क्षेत्र का बासमती चावल अपनी गुणवत्ता के लिए ईरान और खाड़ी देशों में विशेष रूप से पसंद किया जाता है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियां इसके निर्यात को पूरी तरह से बाधित कर रही हैं। व्यापारियों ने सरकार से सक्रिय रूप से वैकल्पिक बाजार उपलब्ध कराने और निर्यात प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है।

क्षेत्र के प्रमुख चावल कारोबारी और कस्बा भरथना के गगन राइस मिल के मालिक मोहल्ला नवीन उर्फ रवि पोरवाल और प्रेमचंद पोरवाल ने संयुक्त रूप से जानकारी दी कि वे हर वर्ष लगभग 80 से 100 करोड़ रुपये का चावल यमन, ओमान, सऊदी अरब सहित अन्य देशों को निर्यात करते हैं। उन्होंने बताया कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण उनके करीब 45 कंटेनर माल विभिन्न बंदरगाहों पर अटके हुए हैं। ईरान रूट पर मालवाहक जहाजों का आवागमन युद्ध के चलते बंद होने से शिपिंग लाइनें पूरी तरह प्रभावित हैं, जिससे मुंद्रा और गांधीनगर पोर्ट पर भी करोड़ों का चावल फंसा पड़ा है। वे मुख्य रूप से बासमती चावल की 1121, 1509, 1718 सुगंध और ताज जैसी किस्मों के साथ-साथ शरबती और पीआर का भी निर्यात करते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय हालात का 300 करोड़ के कारोबार पर असर

इटावा जिले से प्रति वर्ष लगभग 300 करोड़ रुपये का बासमती चावल खाड़ी देशों में निर्यात किया जाता है। यह क्षेत्र धान उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र है, और यहाँ का बासमती चावल अपनी विशिष्ट खुशबू और स्वाद के लिए जाना जाता है। एक अनुमान के मुताबिक, हर साल लगभग 25 हजार मीट्रिक टन बासमती चावल ईरान, यमन, ओमान, सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों को समुद्री रास्ते से भेजा जाता है। ईरान में चल रहे युद्ध के कारण इस समय सभी देशों में माल की आवाजाही पर गंभीर असर पड़ रहा है। निर्यातकों में इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि यदि युद्ध लंबा खिंचा तो यह पूरा कारोबार ही उसकी भेंट चढ़ सकता है।

यह घटना दर्शाती है कि वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता का असर किस प्रकार स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं पर प्रत्यक्ष रूप से पड़ता है। इटावा के चावल निर्यातकों का यह संकट भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र के लिए एक चेतावनी है, जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों और भुगतान प्रणालियों की संवेदनशीलता को उजागर करता है। सरकार के लिए यह एक चुनौती है कि वह ऐसे संकटों से निपटने के लिए न केवल वैकल्पिक बाजार तलाश करे बल्कि निर्यातकों को सुरक्षित व्यापारिक मार्ग और वित्तीय सुरक्षा भी प्रदान करे। दीर्घकालिक रूप से, यह घटना भारत को अपनी निर्यात रणनीति में विविधता लाने और भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करने पर विचार करने के लिए प्रेरित कर सकती है। वर्तमान में, सभी की निगाहें मध्य-पूर्व की स्थिति पर टिकी हैं, इस उम्मीद में कि हालात सामान्य होंगे और चावल कारोबारी अपने अटके हुए माल को गंतव्य तक पहुंचा पाएंगे।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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