WMO रिपोर्ट: 11 साल सबसे गर्म, बिगड़ गया धरती का एनर्जी बैलेंस और बढ़ती गर्मी बनी वैश्विक चिंता

विश्व मौसम विज्ञान संगठन की रिपोर्ट के अनुसार पृथ्वी का बढ़ता तापमान और ऊर्जा असंतुलन

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization - WMO) द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट ने पृथ्वी पर बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के गहराते संकट को लेकर एक गंभीर चेतावनी दी है। यह रिपोर्ट बताती है कि पिछले एक दशक में हमारी धरती ने तापमान वृद्धि के ऐसे रिकॉर्ड तोड़े हैं, जो मानव इतिहास के लिए चिंताजनक हैं। आम नागरिकों के जीवन, खाद्य सुरक्षा (Food Security) और वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) पर इसके दूरगामी और विनाशकारी प्रभाव पड़ सकते हैं।

WMO की रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से 2025 तक के 11 साल पृथ्वी के अब तक के सबसे गर्म साल रहे हैं। इनमें से, साल 2025 तीसरा सबसे गर्म साल दर्ज किया गया, जब पृथ्वी का औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक काल (1850-1900) के मुकाबले लगभग 1.43 डिग्री सेल्सियस (Celsius) अधिक था। यह आंकड़ा वैज्ञानिकों के लिए बेहद चिंता का विषय है, क्योंकि यह पेरिस समझौते (Paris Agreement) के लक्ष्यों को प्राप्त करने की चुनौतियों को दर्शाता है।

बढ़ती गर्मी: एक वैश्विक संकट और ऊर्जा असंतुलन

इस रिपोर्ट में वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon Dioxide - CO2) की मात्रा और समुद्र के तापमान (Ocean Temperature) ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं, जो पृथ्वी के बदलते मौसम का स्पष्ट संकेत देते हैं। आर्कटिक (Arctic) और अंटार्कटिक (Antarctic) में समुद्री बर्फ (Sea Ice) का क्षेत्रफल भी बहुत कम रह गया है, जो वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र (Global Ecosystem) के लिए एक बड़ा खतरा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, ग्रीनहाउस गैसों (Greenhouse Gases) – खासकर कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन (Methane) और नाइट्रस ऑक्साइड (Nitrous Oxide) – की मात्रा पिछले 8 लाख सालों में सबसे ज्यादा हो गई है। ये गैसें सूरज की किरणों को पृथ्वी पर आने तो देती हैं, लेकिन गर्मी को अंतरिक्ष में वापस जाने से रोकती हैं, जिसके परिणामस्वरूप पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है।

रिपोर्ट बताती है कि 2025 में सतह का तापमान 2024 से थोड़ा कम था, लेकिन कुल मिलाकर पिछले तीन साल (2023-2025) सबसे गर्म रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अब हम उस नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं, जहां तापमान पिछले 10 सालों से भी काफी ज्यादा रहेगा। यह प्रवृत्ति आने वाले समय में और अधिक चरम मौसमी घटनाओं का कारण बन सकती है।

समुद्र का बढ़ता तापमान और पिघलते ग्लेशियर

रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक बात समुद्र के तापमान की है। समुद्र पृथ्वी की अतिरिक्त गर्मी का लगभग 91 प्रतिशत हिस्सा सोख लेते हैं। 2025 में समुद्र का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया और लगातार 9 सालों तक नए रिकॉर्ड बने। पिछले 20 सालों में समुद्र के गर्म होने की रफ्तार दोगुनी हो गई है, जो समुद्री जीवन (Marine Life) और तटीय समुदायों (Coastal Communities) के लिए गंभीर खतरा है। आर्कटिक और अंटार्कटिक में समुद्री बर्फ का क्षेत्रफल 1979 के बाद सबसे कम रहा है, जिससे ग्लेशियर (Glaciers) तेजी से पिघल रहे हैं और समुद्र का स्तर (Sea Level) बढ़ रहा है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि ये बदलाव इतनी तेजी से हो रहे हैं कि प्रकृति के लिए यह बहुत चिंताजनक है। इस बार WMO रिपोर्ट में पहली बार पृथ्वी की ऊर्जा असंतुलन (Earth's Energy Imbalance - EEI) को शामिल किया गया है। यह असंतुलन बताता है कि पृथ्वी सूरज से कितनी ऊर्जा ले रही है और कितनी ऊर्जा अंतरिक्ष में वापस भेज रही है। यदि ज्यादा ऊर्जा अंदर आ रही है और कम बाहर जा रही है, तो पृथ्वी स्वाभाविक रूप से गर्म होगी। 2025 में यह असंतुलन 1960 के बाद सबसे ज्यादा पहुंच गया। यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न (University of Melbourne) की जलवायु वैज्ञानिक मैंडी फ्रॉयड (Mandy Freud) और ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी (ANU) की सारा पर्किन्स-किरकपैट्रिक (Sarah Perkins-Kirkpatrick) जैसी विशेषज्ञ इस गति को अत्यधिक चिंताजनक मानती हैं और कहती हैं कि पिछले तीन सालों में तापमान में बड़े बदलाव केवल जलवायु परिवर्तन की वजह से ही हो सकते हैं। सतह के तापमान से अकेले गर्मी का अंदाजा लगाना गलत है क्योंकि सिर्फ 1 प्रतिशत गर्मी हवा में रहती है, बाकी ज्यादातर समुद्र में जमा हो रही है।

यह रिपोर्ट हमें स्पष्ट चेतावनी दे रही है कि पृथ्वी का मौसम पहले से कहीं अधिक असंतुलित हो चुका है। यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन (Emissions) नहीं रोका गया, तो भीषण गर्मी (Extreme Heat), भारी बारिश (Heavy Rainfall), सूखा (Drought), समुद्री तूफान (Cyclones) और बाढ़ (Floods) जैसी चरम मौसमी घटनाएं और बढ़ेंगी। ये घटनाएं सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा, वैश्विक अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित करेंगी। ऐसे में, वैश्विक स्तर पर तत्काल और प्रभावी कदम उठाना अनिवार्य हो गया है, ताकि हमारी धरती को इस गंभीर संकट से बचाया जा सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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