4PM News को 'एंटी-इंडिया' बताने पर सरकार का दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा, अगली सुनवाई 28 अप्रैल को!

Delhi High Court सुनवाई, 4PM News, सरकार का हलफनामा, IT Act, डिजिटल मीडिया

नई दिल्ली: यूट्यूब चैनल 4PM News को ब्लॉक किए जाने के मामले में केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। सरकार ने अदालत में दायर हलफनामे में दावा किया है कि यह डिजिटल समाचार प्लेटफॉर्म (digital news platform) "एंटी-इंडिया भावनाएं फैलाने" और "डिजिटल लॉबिंग" (digital lobbying) में शामिल था, जिसके चलते मार्च में इसे ब्लॉक करने का निर्णय लिया गया। यह मामला अब डिजिटल मीडिया की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच के जटिल संतुलन पर एक महत्वपूर्ण बहस का केंद्र बन गया है।

केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि 4PM News का कंटेंट एक सुनियोजित पैटर्न का हिस्सा था, जिसमें "स्पेकुलेटिव, एकतरफा, दुर्भावनापूर्ण और अप्रमाणित" सामग्री प्रसारित की जा रही थी। हलफनामे के अनुसार, चैनल पर ऐसे वीडियो पोस्ट किए गए, जिनमें भारत सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए गए। इनमें देश की रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता करने, पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियों की पूर्व जानकारी होने और विदेशों में भारतीयों की सुरक्षा को खतरे में डालने जैसे मुद्दे शामिल थे।

सरकार के आरोप: एंटी-इंडिया नैरेटिव और डिजिटल इको चैंबर

सरकार ने विशेष रूप से 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बैसरन इलाके में हुए आतंकी हमले का भी जिक्र किया। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी और 17 अन्य घायल हुए थे। पुलिस के अनुसार, आतंकियों ने पर्यटकों को धर्म पूछकर निशाना बनाया था। केंद्र का आरोप है कि चैनल ने इस हमले को लेकर भी भ्रामक और भड़काऊ सामग्री प्रसारित की, जिसमें भारत की सैन्य कार्रवाई की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए। इससे सशस्त्र बलों पर जनता का भरोसा कमजोर होने का खतरा पैदा हुआ।

हलफनामे में यह भी कहा गया है कि 4PM News एक "डिजिटल इको चैंबर" (digital echo chamber) की तरह काम करता है, जहां एक ही तरह का कंटेंट बार-बार दिखाकर जनमत को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। सरकार के मुताबिक, चैनल का कंटेंट देश की संप्रभुता (sovereignty), अखंडता (integrity), रक्षा, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था (public order) के लिए हानिकारक पाया गया। ऐसे में, यह सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम (IT Act) की धारा 69A के तहत कार्रवाई के दायरे में आता है, जिसके तहत 12 मार्च को चैनल को ब्लॉक करने का आदेश दिया गया था।

4PM News का पलटवार: अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला?

वहीं, 4PM News और उसके एडिटर संजय शर्मा ने सरकार की इस कार्रवाई को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनका तर्क है कि न तो यूट्यूब और न ही सरकार की ओर से उन्हें ब्लॉक करने का कोई औपचारिक आदेश या स्पष्ट कारण उपलब्ध कराया गया। संजय शर्मा ने इसे सरकार की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग (critical reporting) पर सीधा हमला बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए कहा है कि "देश विरोधी नैरेटिव का लेबल लगाकर 4PM को बंद करना दरअसल सच से डर का सबसे बड़ा सबूत है।" शर्मा के अनुसार, यह सिर्फ एक चैनल की लड़ाई नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की आज़ादी (freedom of expression) पर सीधा हमला है, और जब सवाल पूछना "खतरा" और सत्ता की आलोचना "देश विरोध" बना दी जाए, तो लोकतंत्र (democracy) खतरे में है।

यह मामला भारत में डिजिटल समाचार प्लेटफॉर्मों (digital news platforms) के भविष्य और उनके संचालन के नियमों को लेकर कई सवाल खड़े करता है। एक ओर सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के अपने दायित्व पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर मीडिया घराने और पत्रकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा की वकालत कर रहे हैं। इस कानूनी लड़ाई का परिणाम देश में ऑनलाइन पत्रकारिता (online journalism) के दायरे और सरकार व मीडिया के बीच के संबंधों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है।

इस बहुचर्चित मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 28 अप्रैल को निर्धारित की गई है। इस सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों पर आगे विचार किया जाएगा, और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस जटिल मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है। यह सिर्फ एक यूट्यूब चैनल के भाग्य का फैसला नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका और उसकी सीमाओं पर एक व्यापक बहस का मंच भी है।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

एक टिप्पणी भेजें