अमेरिका के जाने-माने अर्थशास्त्री और डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के मुखर आलोचक प्रोफेसर जेफरी (Professor Jeffrey Sachs) ने हाल ही में भारत की वैश्विक भूमिका को लेकर एक महत्वपूर्ण भविष्यवाणी की है। उन्होंने सुझाव दिया है कि भारत ईरान युद्ध (Iran War) में शांतिदूत (Peacemaker) की भूमिका निभा सकता है और ब्रिक्स (BRICS) की अध्यक्षता करते हुए अमेरिका के "भ्रम" को दूर करने में अहम योगदान दे सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक भू-राजनीति (Geopolitics) तेजी से बदल रही है और भारत की स्थिति एक बड़ी शक्ति के रूप में मजबूत हो रही है, जो भारत तोड़ सकता है अमेरिका का एकतरफा प्रभुत्व।
प्रोफेसर जेफरी का यह बयान ब्रिटिश पत्रकार अफशीन रत्तांसी (Afshin Rattansi) के कार्यक्रम 'न्यू ऑर्डर विद अफशीन रत्तांसी' (New Order with Afshin Rattansi) में आया। उन्होंने भारत की बढ़ती कूटनीतिक शक्ति और सभ्यतागत विरासत पर जोर देते हुए कहा कि भारत के पास वह सामर्थ्य है जिससे वह अमेरिकी नीतिगत भ्रमों को चुनौती दे सके। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दुनिया एक बहुध्रुवीय व्यवस्था (Multipolar World Order) की ओर बढ़ रही है और कई देश वैश्विक मंच पर अपनी स्वायत्त भूमिका निभाने के इच्छुक हैं।
भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत पर जेफरी का बयान
अपने इंटरव्यू में प्रोफेसर जेफरी ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत के पास निश्चित रूप से वह कद (Stature), वह शक्ति (Power) और वह गरिमा (Dignity) है, जिससे वह अमेरिका के भ्रमों को 'न' कह सके। उन्होंने भारत की जनसंख्या और सभ्यतागत इतिहास का हवाला देते हुए इसकी तुलना अमेरिका से की। जेफरी के अनुसार, "जनसंख्या के मामले में भारत अमेरिका से चार गुना बड़ा है और अपने सभ्यतागत इतिहास के मामले में 10 गुना बल्कि उससे भी कहीं ज्यादा पुराना है।" यह तुलना भारत को अंतरराष्ट्रीय मामलों में एक मजबूत और स्वतंत्र आवाज के रूप में स्थापित करती है। उन्होंने आगे कहा कि भारत अमेरिका से साफ-साफ कह सकता है कि 'अपना यह दुर्व्यवहार बंद करो' (Stop your misbehavior), जो अमेरिकी विदेश नीति (US Foreign Policy) में एकतरफा फैसलों की ओर इशारा करता है।
प्रोफेसर जेफरी ने यह भी सुझाव दिया कि भारत को यह काम अकेले नहीं, बल्कि सामूहिक रूप से करना चाहिए। उन्होंने रूस (Russia), चीन (China), ब्राजील (Brazil) और ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने की वकालत की। उनके मुताबिक, इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास है, जो उसे इस भूमिका को निभाने का एक विशेष अवसर प्रदान करती है।
BRICS की महत्ता और भारत की अध्यक्षता
जेफरी ने ब्रिक्स (BRICS) को अत्यंत महत्वपूर्ण, प्रभावशाली और पूरी दुनिया के लिए लाभकारी संगठन बताया। उन्होंने इसे वैश्विक स्थिरता (Global Stability) का एक मजबूत आधार करार दिया। जेफरी ने कहा कि ब्रिक्स दुनिया की आधी आबादी (Half of the World's Population) और दुनिया की आधी जीडीपी (Half of the World's GDP) का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें कई प्रमुख देश इसके सदस्य हैं। यह तथ्य ब्रिक्स की बढ़ती आर्थिक और भू-राजनीतिक शक्ति को दर्शाता है, जो पश्चिमी देशों के नेतृत्व वाले वैश्विक संस्थानों (Western-led Global Institutions) के लिए एक संभावित विकल्प प्रस्तुत करता है।
जेफरी ने इस बात पर जोर दिया कि हम अमेरिका द्वारा संचालित दुनिया में नहीं जी रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम ऐसी दुनिया में नहीं हैं, जहां अमेरिका किसी दूसरे देश को पाषाण युग में धकेलने की धमकी दे सके।" यह बयान अंतरराष्ट्रीय कानूनों (International Laws) और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर (UN Charter) के महत्व पर प्रकाश डालता है, जिस पर एक सभ्य दुनिया आधारित है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेताओं से बातचीत करना या उनसे निपटना कोई सुखद अनुभव नहीं होता, इसलिए सहयोगी देशों के साथ मिलकर काम करना अधिक प्रभावी होगा। जेफरी भारत, चीन और रूस को केवल ब्रिक्स के सह-सदस्यों के रूप में ही नहीं, बल्कि एक-दूसरे के सहयोगी (Allies) के रूप में देखते हैं।
आगे की संभावनाएं और कूटनीतिक प्रभाव
प्रोफेसर जेफरी का यह बयान भारत की विदेश नीति के लिए गहरे निहितार्थ रखता है। यह न केवल ईरान युद्ध जैसे क्षेत्रीय संघर्षों में भारत की मध्यस्थता क्षमता को रेखांकित करता है, बल्कि वैश्विक मंच पर एक स्वतंत्र और प्रभावशाली खिलाड़ी के रूप में उसकी स्थिति को भी मजबूत करता है। ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत को एक ऐसे मंच पर नेतृत्व करने का अवसर देती है जो पश्चिमी शक्तियों के प्रभुत्व को चुनौती देने और एक अधिक संतुलित विश्व व्यवस्था (Balanced World Order) बनाने की क्षमता रखता है। यह भारत को अमेरिका जैसे देशों के साथ अपने संबंधों को पुनर्परिभाषित करने और अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) बनाए रखने में मदद कर सकता है। यह दर्शाता है कि भारत अब केवल एक विकासशील देश नहीं, बल्कि एक वैश्विक शक्ति है जो अपने मूल्यों और हितों के आधार पर स्वतंत्र निर्णय ले सकता है।
कुल मिलाकर, जेफरी की भविष्यवाणी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर प्रस्तुत करती है। यह भारत को वैश्विक शांति और स्थिरता में योगदान देने, ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों को सशक्त बनाने और एक बहुध्रुवीय विश्व में अपनी पहचान स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करती है, जिससे भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा में और वृद्धि होगी।