भारतीय आईटी सेक्टर (IT Sector) की दिग्गज कंपनी एचसीएल टेक्नोलॉजीज (HCL Technologies) के निवेशकों के लिए यह हफ्ता किसी बड़े झटके से कम साबित नहीं हुआ है। बाजार में छाई अनिश्चितता और कंपनी के कमजोर भविष्य के अनुमानों के चलते HCL Tech Share Fall का सिलसिला लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। पिछले तीन कारोबारी सत्रों के भीतर कंपनी के शेयरों में करीब 15 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों की संपत्ति में लगभग 59,000 करोड़ रुपये की सेंध लगी है। यह गिरावट न केवल कंपनी के लिए बल्कि पूरे आईटी इंडेक्स के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
HCL Tech Share Fall: 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंचा शेयर
देश की तीसरी सबसे बड़ी आईटी सेवा प्रदाता कंपनी, एचसीएल टेक के शेयरों में गिरावट का दौर शुक्रवार को भी नहीं थमा। कारोबारी सत्र के दौरान शेयर करीब 4.5 फीसदी और टूटकर अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर (52-week Low) 1,218.90 रुपये पर आ गया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मंगलवार को जारी हुए चौथी तिमाही के नतीजों के बाद से ही निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ है। हालांकि कंपनी ने मुनाफे में वृद्धि दर्ज की है, लेकिन भविष्य के लिए जो रेवेन्यू गाइडेंस (Revenue Guidance) दिया गया है, उसने बाजार को निराश किया है।
आंकड़ों पर गौर करें तो वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में एचसीएल टेक का शुद्ध लाभ (Net Profit) सालाना आधार पर 4.2 प्रतिशत बढ़कर 4,488 करोड़ रुपये रहा। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू भी 12.34 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 33,981 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इन सकारात्मक आंकड़ों के बावजूद, कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Cap) महज तीन दिनों में 59,000 करोड़ रुपये घट गया है। इसका मुख्य कारण वित्तीय वर्ष 2027 के लिए दिया गया 1 से 4 प्रतिशत का बेहद मामूली रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान है।
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दिग्गज ब्रोकरेज फर्मों ने घटाई रेटिंग और टारगेट प्राइस
एचसीएल टेक के कमजोर प्रदर्शन और भविष्य की धुंधली तस्वीर को देखते हुए कई वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों (Brokerage Houses) ने अपनी रेटिंग में बदलाव किया है। जेफरीज (Jefferies) ने कंपनी की रेटिंग को डाउनग्रेड करते हुए 'Underperform' कर दिया है और इसका टारगेट प्राइस घटाकर 1,165 रुपये कर दिया है। जेफरीज का अनुमान है कि इस साल कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ केवल 2.4 फीसदी रह सकती है, जो 2023 के बाद का सबसे निचला स्तर होगा।
इसी तरह, जेपी मॉर्गन (JP Morgan) ने हालांकि 'Neutral' रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस को 1,419 रुपये से घटाकर 1,370 रुपये कर दिया है। एचएसबीसी (HSBC) और सिटी (Citi) जैसी संस्थाओं ने भी अपने टारगेट प्राइस में कटौती की है। इसके विपरीत, सीएलएसए (CLSA) ने अभी भी 1,519 रुपये के टारगेट के साथ 'Outperform' रेटिंग बनाए रखी है। इन अलग-अलग राय के बीच निवेशकों में भारी असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिसका सीधा असर शेयर की कीमतों पर दिख रहा है।
मार्केट सेंटीमेंट और आगे की राह
एचसीएल टेक में आई यह गिरावट केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे भारतीय आईटी उद्योग की सुस्ती को दर्शाती है। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और क्लाइंट्स द्वारा खर्च में कटौती (Spend Cuts) की वजह से भारतीय आईटी कंपनियां दबाव महसूस कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लघु अवधि (Short-term) में शेयर में अभी और अस्थिरता बनी रह सकती है, क्योंकि बाजार अब कंपनी के अगले कदमों और वैश्विक मांग में सुधार का इंतजार कर रहा है।
दीर्घकालिक निवेशकों के लिए, जानकारों का सुझाव है कि गिरावट के इस दौर में जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय कंपनी के बुनियादी ढांचे (Fundamentals) पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि रेवेन्यू ग्रोथ के अनुमान कम हैं, लेकिन कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी और कैश फ्लो अभी भी मजबूत बने हुए हैं। आने वाले हफ्तों में व्यापक बाजार की चाल और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर फैसले भी एचसीएल टेक जैसे लार्ज-कैप शेयरों की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। फिलहाल, दलाल स्ट्रीट (Dalal Street) पर एचसीएल टेक के निवेशकों की नजरें संभलने के संकेतों पर टिकी हैं।