पंजाब के पटियाला में हुए रेलवे ट्रैक पर ब्लास्ट (Patiala railway track blast) की जिम्मेदारी खालिस्तान टाइगर फोर्स (Khalistan Tiger Force - KTF) ने ली है। इस आतंकी संगठन ने सोशल मीडिया (Social Media) पर एक पोस्ट के जरिए दावा किया है कि इस धमाके के पीछे जर्मनी में बैठे जसविंदर मुल्तानी का हाथ है। यह घटना सोमवार रात को पटियाला के शंभू इलाके के पास एक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Freight Corridor - DFC) रेलवे ट्रैक पर हुई, जिसे ट्रैक को उड़ाने की एक गंभीर कोशिश माना जा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर पंजाब में सीमा पार से संचालित होने वाली आतंकी गतिविधियों की आशंका को बढ़ा दिया है।
पटियाला रेलवे ट्रैक पर ब्लास्ट: जांच और संदिग्ध की पहचान
पुलिस ने मंगलवार को बताया कि सोमवार रात को धमाका करने की कोशिश कर रहा एक व्यक्ति इस प्रयास में मारा गया। मारे गए संदिग्ध की पहचान तरन तारन जिले के पंजवार गांव निवासी जगरूप सिंह के तौर पर हुई है। धमाके की जगह पर स्पेशल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (रेलवे) शशि प्रभा द्विवेदी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज (CCTV footage) में संदिग्ध को अमृतसर में अपनी मोटरसाइकिल पार्क करते हुए देखा गया था। धमाका शंभू-अंबाला रेल ट्रैक के एक हिस्से पर हुआ था, जहां से एक अज्ञात शव बरामद हुआ था, जो धमाके से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। शुरुआत में इसे कम तीव्रता वाला धमाका माना गया था, लेकिन जांच में यह ट्रैक को उड़ाने की एक सोची-समझी कोशिश निकली। इस धमाके से ट्रैक को भी कुछ नुकसान पहुंचा और रेलवे लाइन के नीचे एक छोटा सा गड्ढा बन गया।
गौरतलब है कि पिछले तीन महीनों में फ्रेट कॉरिडोर (Freight Corridor) पर यह दूसरा धमाका है, जिसके चलते एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (National Investigation Agency - NIA) की जांच की संभावना जताई है। यह लगातार हो रही घटनाएं राज्य में शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती पेश कर रही हैं।
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आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ और ISI कनेक्शन
पटियाला पुलिस ने इस मामले में बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए बॉर्डर पार से काम कर रहे एक आतंकवादी मॉड्यूल (Terrorist Module) के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। डीआईजी पटियाला रेंज कुलदीप सिंह चहल और एसएसपी पटियाला वरुण शर्मा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस (Press Conference) में बताया कि पुलिस टीमों ने सिर्फ 12 घंटे के अंदर इस ऑपरेशन को अंजाम देकर शंभू-अंबाला रेलवे रूट पर हुए बम धमाके की गुत्थी सुलझा ली है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मॉड्यूल का लीडर प्रदीप सिंह खालसा, कुलविंदर सिंह बंगा, सतनाम सिंह सत्ता और गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी शामिल हैं। इनके पास से भारी मात्रा में जंगी हथियार, जिसमें एक बम, दो पिस्तौल, जिंदा राउंड, आईईडी (IED) बनाने का सामान और मलेशिया में बैठे हैंडलर्स से संपर्क करने के लिए इस्तेमाल होने वाले टेक्निकल डिवाइस (Technical Device) बरामद किए गए हैं।
पूछताछ में यह खुलासा हुआ है कि यह मॉड्यूल पाकिस्तानी इंटेलिजेंस एजेंसी (Pakistani Intelligence Agency - ISI) और विदेश (मलेशिया) में मौजूद खालिस्तानी कट्टरपंथी ग्रुप्स (Khalistani Radical Groups) के सीधे संपर्क में था। इनका मुख्य मकसद पंजाब में आतंकी घटनाओं को अंजाम देकर शांति भंग करना और डर का माहौल बनाना था। इन आरोपियों के खिलाफ एक्सप्लोसिव्स एक्ट (Explosives Act) की धारा 3, रेलवे एक्ट (Railway Act) की धारा 150 और अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट (Unlawful Activities Prevention Act - UAPA) के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस आरोपियों को कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड (Police Remand) लेगी ताकि बॉर्डर पार और विदेश में मौजूद उनके अन्य साथियों के बारे में पूरी जांच की जा सके।
यह घटना और उसके बाद की गिरफ्तारियां दर्शाती हैं कि पंजाब में अभी भी खालिस्तानी तत्वों की सक्रियता बनी हुई है, जिन्हें विदेशी ताकतों से समर्थन मिल रहा है। रेलवे जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे (Critical Infrastructure) को निशाना बनाना देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में केंद्रीय एजेंसियों, विशेषकर एनआईए (NIA) की इसमें संभावित भागीदारी इस खतरे की गंभीरता को रेखांकित करती है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को इन खतरों से निपटने के लिए और अधिक सतर्क और समन्वित प्रयास करने होंगे, ताकि राज्य में शांति और व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके और ऐसे आतंकी मंसूबों को नाकाम किया जा सके।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.