सुबह 10 बजे सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचे राष्ट्रपति ट्रंप? अमेरिकी इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में मौखिक दलीलें सुनते हुए, एक ऐतिहासिक घटना

अमेरिकी राजनीति में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम सामने आया जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार सुबह 10 बजे (अमेरिकी समयानुसार) सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। यह अमेरिकी इतिहास में पहली बार हुआ है कि कोई पदस्थ राष्ट्रपति (sitting President) सुप्रीम कोर्ट में वकीलों की मौखिक दलीलें (oral arguments) सुनने के लिए आम जनता के बीच मौजूद रहा हो। ट्रंप का यह कदम उनके एक कार्यकारी आदेश (executive order) को चुनौती देने से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान आया, जिसने देश में जन्मजात नागरिकता (birthright citizenship) के सिद्धांत पर बहस छेड़ दी है। यह घटना न केवल कानूनी गलियारों में, बल्कि आम अमेरिकी नागरिक और वैश्विक पर्यवेक्षकों के लिए भी गहरा महत्व रखती है, क्योंकि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता और राष्ट्रपति पद की शक्तियों के बीच की नाजुक रेखा को दर्शाती है।

राष्ट्रपति ट्रंप सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचे: एक ऐतिहासिक कदम

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस मामले की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, उसे 'बारबरा बनाम ट्रंप' (Barbara v. Trump) के नाम से जाना जाता है। यह मामला अमेरिका में जन्मजात नागरिकता के सिद्धांत से संबंधित है। ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ही दिन एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका उद्देश्य उन बच्चों को अमेरिकी नागरिकता देने से रोकना था, जिनका जन्म अमेरिका में ऐसे माता-पिता से हुआ था जो या तो अवैध रूप से (illegally) देश में रह रहे थे या अस्थायी तौर पर। हालांकि, यह आदेश अभी तक लागू नहीं हो पाया है, क्योंकि कई निचली अदालतों (lower courts) ने इसे तुरंत असंवैधानिक (unconstitutional) करार दे दिया था। अब इस मामले की सुनवाई देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में चल रही है।

जन्मसिद्ध नागरिकता का कानूनी सिद्धांत (legal principle) यह कहता है कि अमेरिका या उसके किसी भी क्षेत्र में जन्म लेने वाला कोई भी व्यक्ति वहां का नागरिक बन जाता है। 1868 में 14वें संशोधन (14th Amendment) के पारित होने के बाद से ही इस कानून की अलग-अलग व्याख्याएं हुई हैं। ट्रंप के इस आदेश के खिलाफ तुरंत कई मुकदमे दायर किए गए थे, जिनमें आप्रवासियों के अधिकारों (immigrant rights) के लिए काम करने वाले समूहों और राज्यों के अटॉर्नी जनरल (Attorney General) द्वारा दायर मुकदमे भी शामिल थे। इन मुकदमों के परिणामस्वरूप निचली अदालतों के फैसलों ने इस आदेश को लागू होने से रोक दिया था। ट्रंप अपनी नीतियों के तहत जन्मसिद्ध नागरिकता के सिद्धांत को शर्तों के साथ ही सही ठहराते हैं।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में बैठने की व्यवस्था आम जनता के लिए खुली है, लेकिन राष्ट्रपति की उपस्थिति विवादास्पद है। इसे न्यायाधीशों पर दबाव डालने की कोशिश (attempt to pressure judges) के तौर पर देखा जा सकता है, क्योंकि अमेरिकी संविधान (US Constitution) में सुप्रीम कोर्ट को व्हाइट हाउस (White House) पर एक स्वतंत्र नियंत्रण (independent check) के तौर पर डिजाइन किया गया है। ट्रंप ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा था कि उन्होंने खुद वहां जाने की योजना बनाई है क्योंकि वे इतने लंबे समय से इस केस के बारे में सुनते आ रहे हैं।

अमेरिकी न्यायपालिका और राष्ट्रपति की उपस्थिति

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप की कोई नीति देश की सबसे बड़ी अदालत के सामने आई हो। सुप्रीम कोर्ट ने अकेले 2025 में ही उनके प्रशासन के कामों से जुड़े लगभग दो दर्जन आपातकालीन मामलों (emergency cases) पर विचार किया था। हालांकि, ज्यादातर मामलों में उनके पक्ष में ही फैसला सुनाया। लेकिन टैरिफ (tariffs) लगाने का मसला ऐसा था जहां ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा और कोर्ट ने उनके खिलाफ फैसला दिया।

अमेरिका में राष्ट्रपतियों ने कभी-कभी सीधे तौर पर अदालत से बातचीत की है, जिसमें उनके द्वारा नियुक्त न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण समारोह (swearing-in ceremonies) या स्वागत कार्यक्रमों में शामिल होना शामिल है। अमेरिकन बार एसोसिएशन (American Bar Association) के अनुसार, कम से कम आठ राष्ट्रपतियों ने अपने वकील के करियर (lawyer's career) के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सामने मुकदमों पर बहस की है। लेकिन ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि अब तक किसी भी पदस्थ राष्ट्रपति ने व्हाइट हाउस से सिर्फ सुनवाई सुनने के लिए अदालत का सफर नहीं किया था। यह घटना अमेरिकी राजनीतिक और कानूनी इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है, जो राष्ट्रपति की भूमिका और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के बीच के संबंधों पर बहस को तेज कर सकती है।

राष्ट्रपति ट्रंप का सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित होना एक प्रतीकात्मक लेकिन शक्तिशाली कदम है। यह उनके प्रशासन की उस नीति के प्रति उनकी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसे कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस घटना का तात्कालिक प्रभाव न्यायधीशों पर प्रत्यक्ष दबाव के रूप में देखा जा सकता है, भले ही इसका कानूनी परिणाम तुरंत स्पष्ट न हो। दीर्घकालिक रूप से, यह घटना अमेरिकी न्यायपालिका की स्वतंत्रता की धारणा (perception of independence) को प्रभावित कर सकती है और भविष्य के राष्ट्रपतियों के लिए एक मिसाल कायम कर सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट 'बारबरा बनाम ट्रंप' मामले में क्या फैसला सुनाता है और यह फैसला अमेरिका की जन्मजात नागरिकता नीति और आप्रवासन (immigration) कानूनों को कैसे प्रभावित करता है।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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