दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग रविवार को तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुंचे हैं, और आज, सोमवार को वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय शिखर वार्ता करेंगे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक समीकरणों पर दबाव है। इस शिखर वार्ता का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को गहरा करना और उनकी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है, जो भारत और दक्षिण कोरिया दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। यह दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) और ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) जैसे अहम मुद्दों पर भी सहयोग की संभावना तलाशेगा।
राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने भारत पहुंचने से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर एक वीडियो साझा करते हुए भारत के प्रति अपनी प्रशंसा व्यक्त की थी। उन्होंने लिखा, "दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला और बहुत तेजी से बढ़ता हुआ देश। अगर आप ध्यान से देखें, तो सच में ऐसे कई मौके हैं जिनसे दोनों देशों को फायदा होगा, बिना किसी दबाव या जबरदस्ती के। आइए, हम भारत के साथ मिलकर एक शानदार भविष्य की शुरुआत करें, एक ऐसा देश जो शांति और लोकतंत्र पसंद करता है।" यह पोस्ट भारत के प्रति उनके सकारात्मक दृष्टिकोण और मजबूत साझेदारी की इच्छा को दर्शाता है।
भारत-दक्षिण कोरिया संबंध: आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी का विस्तार
यह प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ली के बीच तीसरी आमने-सामने की मुलाकात होगी। इससे पहले, पिछले साल जी7 (G7) और जी20 (G20) शिखर सम्मेलनों के दौरान दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई थी। इन मुलाकातों ने दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने की नींव रखी है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (National Security Advisor) वाई सुंग-लैक के अनुसार, इस शिखर वार्ता में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ली शिपबिल्डिंग (Shipbuilding), मैरीटाइम इंडस्ट्री (Maritime Industry), फाइनेंस (Finance), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence - AI) और डिफेंस (Defense) जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर विशेष रूप से चर्चा करेंगे। ये क्षेत्र दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं और भविष्य में विकास की अपार संभावनाएं रखते हैं।
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इसके अलावा, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सहयोग भी एजेंडा में सबसे ऊपर रहने की संभावना है। भारत और दक्षिण कोरिया दोनों ही आयातित ऊर्जा (Imported Energy) पर बहुत अधिक निर्भर हैं और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता से जूझ रहे हैं। ऐसे में, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना दोनों देशों के साझा हित में है। शिखर वार्ता के बाद, राष्ट्रपति ली भारतीय व्यावसायिक नेताओं के साथ एक राउंडटेबल (Roundtable) में शामिल होंगे और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा आयोजित एक स्टेट लंच (State Lunch) में भी शिरकत करेंगे।
राष्ट्रपति ली के भारत आगमन पर केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा (कॉर्पोरेट मामले) ने एयरपोर्ट पर उनका और फर्स्ट लेडी किम ही क्यूंग का गर्मजोशी से स्वागत किया। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी रविवार को दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति से मुलाकात की और विभिन्न क्षेत्रों में संबंध बढ़ाने की उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने भरोसा जताया कि यह दौरा दोनों देशों के बीच 'खास रणनीतिक साझेदारी' (Special Strategic Partnership) को और मजबूत करेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी इस दौरे को दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है। जायसवाल ने एक्स पर पोस्ट किया था, "कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति ली जे म्युंग का भारत के राजकीय दौरे पर नई दिल्ली आने पर बहुत गर्मजोशी से स्वागत है। यह राष्ट्रपति ली का भारत का पहला दौरा है।"
यह दौरा भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति (Act East Policy) के तहत दक्षिण कोरिया के साथ संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का संकेत है। दोनों देश लोकतंत्र और शांति के साझा मूल्यों में विश्वास रखते हैं, जो उनकी रणनीतिक साझेदारी को और भी मजबूत आधार प्रदान करता है। पश्चिम एशिया में मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच, भारत और दक्षिण कोरिया के बीच गहरा होता सहयोग न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक संतुलित और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने में सहायक होगा। यह शिखर वार्ता भविष्य में आर्थिक, तकनीकी और रक्षा सहयोग के नए रास्ते खोलेगी, जिससे दोनों देशों के नागरिकों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभ होगा।
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