वैश्विक सैन्य ख़र्च में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: संयुक्त राष्ट्र ने दी चेतावनी, विकास पर पड़ रहा है भारी असर
दुनिया भर में जारी भू-राजनैतिक तनावों (geopolitical tensions) के बीच, वैश्विक सैन्य ख़र्च लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है, जिससे संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने गहरी चिंता व्यक्त की है। निरस्त्रीकरण मामलों की उच्च प्रतिनिधि इज़ूमी नाकामित्सु ने हाल ही में आगाह किया कि यह बढ़ती प्रवृत्ति न केवल शांति और स्थिरता को कमजोर कर रही है, बल्कि सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals - SDGs) की प्राप्ति में भी एक बड़ी बाधा बन रही है। उनका यह बयान 'वैश्विक सैन्य व्यय के विरुद्ध कार्रवाई दिवस' (Day of Action against Military Expenditure) के अवसर पर आया, जहाँ उन्होंने दुनिया के समक्ष विकल्पों और उनके परिणामों पर विचार करने का आह्वान किया।
नाकामित्सु ने स्पष्ट किया कि "इन जारी युद्धों के कारण समुदायों को भारी नुक़सान उठाना पड़ रहा है, असमानता बढ़ रही है, जलवायु परिवर्तन (climate change) विस्थापन और अस्थिरता को बढ़ा रहा है, और मानवीय ज़रूरतें लगातार सामूहिक प्रतिक्रिया से अधिक हो रही हैं।" ये चुनौतियाँ ऐसे समय में सामने आ रही हैं जब वैश्विक समुदाय को एकजुट होकर समाधान खोजने की आवश्यकता है, लेकिन इसके बजाय, संसाधनों का एक बड़ा हिस्सा हथियारों और संघर्षों पर खर्च किया जा रहा है।
निरंतर बढ़ रहा है वैश्विक सैन्य ख़र्च: चिंताजनक आंकड़े
स्टॉकहोम अन्तराराष्ट्रीय शान्ति अनुसन्धान संस्थान (Stockholm International Peace Research Institute - SIPRI) द्वारा जारी नवीनतम आँकड़े इस चिंताजनक प्रवृत्ति की पुष्टि करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में वैश्विक सैन्य ख़र्च 2,887 अरब डॉलर (लगभग 2.887 ट्रिलियन डॉलर) तक पहुँच गया, जो 2024 की तुलना में 2.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। यह लगातार 11वाँ वर्ष है जब सैन्य व्यय में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह आंकड़ा अपने आप में चौंकाने वाला है, खासकर जब इसकी तुलना विकास और मानवीय सहायता पर होने वाले खर्च से की जाती है।
तुलनात्मक रूप से देखें तो, 2025 में आधिकारिक विकास सहायता (Official Development Assistance - ODA) कुल 174.3 अरब डॉलर रही, जो 2024 की तुलना में 23.1 प्रतिशत की गिरावट है। इसका मतलब है कि वैश्विक सैन्य ख़र्च की राशि, विकास सहायता राशि से 16 गुना से भी अधिक है। संयुक्त राष्ट्र का 2025 का नियमित बजट 3.72 अरब डॉलर था, जबकि वैश्विक सैन्य ख़र्च इस राशि से लगभग 776 गुना अधिक रहा है। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि दुनिया की प्राथमिकताएं कहाँ केंद्रित हैं।
इज़ूमी नाकामित्सु ने बताया कि "हम अब सतत विकास लक्ष्यों (SDG) की 2030 की समय सीमा से मात्र 4 वर्ष दूर हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि SDG के केवल 5 में से 1 लक्ष्य ही सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।" उन्होंने आगे कहा कि "वहीं, सतत विकास के लिए आवश्यक वार्षिक वैश्विक वित्तीय कमी बढ़कर 4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गई है।" यह कमी सैन्य खर्च की तुलना में बहुत कम है, जिसे अगर सही दिशा में लगाया जाए तो कई वैश्विक समस्याओं का समाधान हो सकता है।
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हथियारों की होड़ और शांति की कीमत
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि बढ़ता सैन्य ख़र्च, न तो अधिक शान्ति ला रहा है और न ही स्थिरता सुनिश्चित कर पा रहा है, बल्कि यह दीर्घकालिक सुरक्षा और सतत विकास की बुनियाद को कमज़ोर करने का ख़तरा उत्पन्न कर रहा है। नाकामित्सु ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि "इतिहास बार-बार यह दिखाता आया है कि हथियारों की होड़ (arms race), शान्ति का मार्ग नहीं खोलती। यह केवल तनाव को बढ़ाती है, आपसी अविश्वास को गहरा करती है और ग़लत आकलन की आशंका को बढ़ा देती है।"
उन्होंने इस प्रक्रिया को एक दुष्चक्र के रूप में वर्णित किया, जहाँ असुरक्षा अधिक सैन्यीकरण (militarization) को जन्म देती है, और सैन्यीकरण आगे चलकर और अधिक असुरक्षा को बढ़ावा देता है। यह एक गंभीर चुनौती है जो देशों को शांतिपूर्ण समाधानों की बजाय सैन्य तैयारियों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के लिए मजबूर करती है। सैन्यीकरण में ख़र्च किया गया प्रत्येक डॉलर, वह राशि है जो अकाल रोकने, स्कूलों के निर्माण, जलवायु सहनशीलता (climate resilience) मज़बूत करने, कूटनीति (diplomacy), युद्ध रोकथाम (conflict prevention) और मानव सुरक्षा को आगे बढ़ाने में प्रयोग नहीं हो पाती है।
नाकामित्सु ने यह भी सवाल उठाया कि "हम किस प्रकार की सुरक्षा का निर्माण कर रहे हैं और उसकी क़ीमत क्या है।" उन्होंने कहा कि आगे का रास्ता स्पष्ट है: हमें 21वीं सदी में सुरक्षा की अवधारणा को नए सिरे से परिभाषित करना होगा। महासचिव की रिपोर्ट में व्यावहारिक क़दमों की रूपरेखा दी गई है, जिनमें कूटनीति को प्राथमिकता देना, विश्वास-निर्माण उपायों को मज़बूत करना, रक्षा बजट में पारदर्शिता (transparency in defense budgets) सुनिश्चित करना और सैन्य ख़र्च के एक छोटे हिस्से को भी सतत विकास की ओर पुनर्निर्देशित करना शामिल है। यह एक ऐसा परिवर्तन है जो न केवल वैश्विक शांति के लिए आवश्यक है, बल्कि मानवता के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.