भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन: 10 साल बाद फिर सजेगा मंच, नई दिल्ली में जुटेंगे बड़े नेता, जानें क्या है उद्देश्य
दुनिया भर में तेजी से बदल रहे राजनीतिक और आर्थिक समीकरणों के बीच, भारत 31 मई को एक बेहद महत्वपूर्ण भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। नई दिल्ली में होने वाला यह महामंथन भारत और अफ्रीकी देशों के बीच दोस्ती, साझेदारी और व्यापार को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का लक्ष्य रखता है। यह सम्मेलन लगभग एक दशक बाद आयोजित हो रहा है, जिसमें कई बड़े अफ्रीकी नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों के लिए प्रगति और विकास की एक नई कहानी लिखना है, जिसका लाभ न केवल इन क्षेत्रों को मिलेगा, बल्कि यह वैश्विक मंच पर भी एक सशक्त संदेश देगा।
इस सम्मेलन का एजेंडा काफी व्यापक है, जिसमें भविष्य की रणनीतियों पर गहन चर्चा की जाएगी। शिखर सम्मेलन के अंत में एक महत्वपूर्ण घोषणा पत्र भी जारी किया जाएगा, जो भविष्य में साथ मिलकर काम करने का पूरा खाका प्रस्तुत करेगा। इस योजना का सबसे बड़ा लक्ष्य भारत के साल 2047 तक पूरी तरह से विकसित देश बनने के सपने को अफ्रीका के विकास मॉडल 'एजेंडा 2063' (Agenda 2063) के साथ जोड़ना है। भारत हमेशा से इस बात पर जोर देता रहा है कि अफ्रीका का विकास वहां के लोगों की जरूरतों और प्राथमिकताओं के अनुरूप ही हो। इसी दूरदर्शी सोच के साथ, भारत ने साल 2018 के बाद से अफ्रीका में अपने 17 नए राजनयिक कार्यालय (Diplomatic Offices) खोले हैं, जिससे अब वहां भारत के कुल 46 कार्यालय हो गए हैं। यह कदम दोनों पक्षों के बीच संवाद और सहयोग को और अधिक सुगम बनाता है।
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भारत-अफ्रीका व्यापार और निवेश: एक मजबूत साझेदारी
आर्थिक मोर्चे पर, भारत आज व्यापार के मामले में अफ्रीका का चौथा सबसे बड़ा साझेदार बनकर उभरा है और वहां पैसा लगाने वाले शीर्ष पांच देशों में शामिल है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत और अफ्रीका के बीच 81.99 अरब डॉलर का विशाल व्यापार दर्ज किया गया है। इसमें भारत ने 42.6 अरब डॉलर का पेट्रोलियम और दवाइयों (Pharmaceuticals) जैसा सामान अफ्रीका को बेचा है, जबकि 39.2 अरब डॉलर का सामान वहां से खरीदा है। इसके अतिरिक्त, 1996 से लेकर 2025 तक अफ्रीका में भारत का कुल निवेश लगभग 80 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। भारतीय कंपनियों ने ऊर्जा (Energy), खनन (Mining), टेलीकॉम (Telecom) और खेती जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है, जो दोनों क्षेत्रों के लिए आर्थिक वृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर रही है।
व्यापार और निवेश के अलावा, भारत अफ्रीकी देशों की जमीनी तरक्की में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अब तक 41 अफ्रीकी देशों को बिजली, पानी की आपूर्ति, परिवहन और कृषि से जुड़े प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए 10 अरब डॉलर से अधिक का आसान कर्ज (लाइन ऑफ क्रेडिट - Line of Credit) प्रदान किया है। इसमें से 4.5 अरब डॉलर की लागत वाले 220 प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूरे भी हो चुके हैं। इसके अलावा, भारत अपनी एक विशेष योजना के तहत अफ्रीका के 33 सबसे कम विकसित देशों को उनके 98.2 प्रतिशत सामान पर बिना टैक्स के व्यापार करने की छूट दे रहा है, जिससे इन गरीब देशों को भारी आर्थिक लाभ मिल रहा है और उनकी अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती मिल रही है।
यह शिखर सम्मेलन भारत और अफ्रीका के बीच संबंधों को एक नई दिशा देगा। वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और अफ्रीका की अपार क्षमता को देखते हुए, यह साझेदारी न केवल दोनों के लिए, बल्कि पूरे दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) के लिए एक मॉडल बन सकती है। यह बैठक भविष्य के लिए एक रोडमैप तैयार करेगी, जहां साझा विकास, सतत प्रगति और एक अधिक संतुलित विश्व व्यवस्था की नींव रखी जाएगी। आने वाले समय में इस साझेदारी के और मजबूत होने की पूरी संभावना है, जिससे दोनों क्षेत्रों के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे।
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