चीन ने हाल ही में अपने पहले हरित ऊर्जा प्रोजेक्ट (green energy project) का सफलतापूर्वक परिचालन शुरू कर दिया है, जो सीधे एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर से जुड़ा हुआ है। यह परियोजना, जिसने 3 मई को उत्तरी पश्चिमी चीन के निंग्ज़िया स्वायत्त क्षेत्र (Ningxia Autonomous Region) में अपनी सेवाएं देना शुरू किया, देश की बढ़ती कंप्यूटिंग शक्ति की मांग और जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों को संतुलित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
एस.सी.एम.पी. (SCMP) और चाइना सेंट्रल टेलीविजन (CCTV) की रिपोर्टों के अनुसार, निंग्ज़िया को चीन का पवन और सौर ऊर्जा केंद्र (wind and solar energy hub) माना जाता है। यह पहल एआई (AI) और अन्य डिजिटल प्रौद्योगिकियों के कारण तेजी से बढ़ती बिजली की खपत को नियंत्रित करने और उसे नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) स्रोतों से जोड़ने की चीन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
चीन का हरित ऊर्जा डेटा सेंटर: एआई और स्थिरता का संगम
यह महत्वाकांक्षी परियोजना वर्तमान में 500 मेगावाट की सौर ऊर्जा क्षमता (solar energy capacity) से लैस है और इस वर्ष के अंत तक इसमें 1.5 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता (wind energy capacity) भी जुड़ने की उम्मीद है। यह प्रणाली निंग्ज़िया के झोंगवेई शहर (Zhongwei city) में स्थित एक क्लाउड कंप्यूटिंग सुविधा (cloud computing facility) से सीधे जुड़ी हुई है, जिसका मुख्य उद्देश्य डेटा सेंटर की बिजली आपूर्ति और संचालन में तालमेल स्थापित करना है।
इस अनूठी व्यवस्था के तहत, जब नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत प्रचुर मात्रा में बिजली का उत्पादन करेंगे या बिजली की कीमतें कम होंगी, तो डेटा सेंटर प्रसंस्करण कार्यों को प्राथमिकता देगा। इससे न केवल ग्रिड पर दबाव कम होगा, बल्कि परिचालन लागत (operational cost) और कार्बन उत्सर्जन (carbon emission) में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। एक बार पवन ऊर्जा वाला हिस्सा पूरा हो जाने के बाद, इस परियोजना से प्रति वर्ष 4.3 बिलियन किलोवाट-घंटे बिजली उत्पन्न होने की उम्मीद है, जो लगभग 3.65 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन में कमी के बराबर है।
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बढ़ती एआई मांग और चीन की रणनीतिक पहल
चीन वर्तमान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास के कारण कंप्यूटिंग शक्ति (computing power) की मांग में भारी वृद्धि देख रहा है, जिसके परिणामस्वरूप बिजली की खपत भी लगातार बढ़ रही है। बीजिंग (Beijing) इस बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ-साथ 2030 से पहले अपने कार्बन उत्सर्जन को चरम पर पहुंचाने और फिर धीरे-धीरे कम करने के लक्ष्य को भी प्राप्त करना चाहता है।
इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, देश अपनी "डेटा पूर्व, कंप्यूटिंग पश्चिम" (data east, computing west) रणनीति को बढ़ावा दे रहा है। इस रणनीति का उद्देश्य ऊर्जा-गहन डेटा प्रोसेसिंग (energy-intensive data processing) गतिविधियों को पश्चिमी क्षेत्रों में स्थानांतरित करना है, जहां नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत प्रचुर मात्रा में और सस्ते उपलब्ध हैं। झोंगवेई शहर की क्लाउड कंप्यूटिंग सुविधा (cloud computing facility) इसका एक प्रमुख उदाहरण है, जहां चीन की शीर्ष दस कंप्यूटिंग कंपनियों में से छह कंपनियां काम करती हैं और कुल बिजली खपत का 90% से अधिक हरित ऊर्जा से आता है।
तेजी से बढ़ती बिजली खपत और सरकारी योजनाएँ
चीन विद्युत परिषद (China Electricity Council) के सांख्यिकी और डिजिटल खुफिया विभाग (Statistics and Digital Intelligence Department) के उप निदेशक जियांग डेबिन (Jiang Debin) ने बताया कि चीन के इंटरनेट डेटा सेवा उद्योग (internet data service industry) में बिजली की खपत पिछले पांच वर्षों में औसतन 36% की वार्षिक वृद्धि दर से तेजी से बढ़ी है। इस वर्ष की पहली तिमाही में, उद्योग ने 22.9 बिलियन किलोवाट-घंटे बिजली की खपत की, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 44% की वृद्धि है और अब यह चीन की कुल बिजली खपत का लगभग 1% हिस्सा है।
मार्च में जारी एक चीनी सरकारी कार्य रिपोर्ट (Chinese government work report) में सुपर-लार्ज-स्केल स्मार्ट कंप्यूटिंग क्लस्टर (super-large-scale smart computing clusters) के लिए नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (new infrastructure projects) को तैनात करने का भी वादा किया गया था, जिसमें बिजली आपूर्ति के साथ कंप्यूटिंग क्षमता के विकास का समन्वय करने पर जोर दिया गया था। चीन के नए अवसंरचना विकास कार्यक्रम (new infrastructure development program) में इन तत्वों को पहली बार स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है, जो हरित और स्थायी डिजिटल भविष्य की दिशा में देश की गंभीरता को दर्शाता है।
यह परियोजना न केवल चीन की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता (environmental sustainability) के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एआई-संचालित अर्थव्यवस्थाओं (AI-driven economies) के लिए एक महत्वपूर्ण मॉडल प्रस्तुत करेगी। यह दर्शाता है कि तकनीकी प्रगति और पर्यावरणीय जिम्मेदारी एक साथ चल सकती हैं, जिससे एक अधिक टिकाऊ भविष्य का मार्ग प्रशस्त होगा।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.