धार भोजशाला मंदिर ही है: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, मस्जिद पक्ष को मिलेगी अलग जमीन
इंदौर, मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने धार भोजशाला के धार्मिक स्वरूप पर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसमें परिसर को मंदिर घोषित किया गया है। इस महत्वपूर्ण निर्णय से न केवल कई दशकों से चले आ रहे विवाद का एक चरण समाप्त हुआ है, बल्कि इसने देश के धार्मिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में एक नई बहस को भी जन्म दिया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भोजशाला परिसर मंदिर ही है और मस्जिद पक्ष को इसके बदले अलग जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए मस्जिद पक्ष को सरकार के समक्ष आवेदन करना होगा।
यह फैसला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) द्वारा संरक्षित भोजशाला परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर चल रहे विवाद का परिणाम है। हिंदू पक्ष इसे प्राचीन विद्या केंद्र और मां सरस्वती का मंदिर मानता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। वहीं, जैन समुदाय का एक वर्ग इसे मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल होने का दावा करता है। हिंदू पक्ष की ओर से दायर याचिका में भोजशाला को मंदिर घोषित करने और हिंदुओं को वर्षभर 24 घंटे पूजा-अर्चना का अधिकार देने की मांग की गई थी। लगभग चार साल तक चली सुनवाई और गहन न्यायिक प्रक्रिया के बाद यह फैसला आया है।
हाई कोर्ट के प्रमुख निर्देश और प्रतिक्रियाएँ
इंदौर खंडपीठ ने अपने फैसले में कई अहम बातें कही हैं। कोर्ट ने न सिर्फ भोजशाला को मंदिर माना, बल्कि सरकार को इंग्लैंड से मां वाग्देवी (Vagdevi idol) की प्रतिमा वापस लाने के प्रयास करने का भी निर्देश दिया है। यह प्रतिमा 1875 में भोजशाला में खुदाई के दौरान मिली थी और बाद में ब्रिटिश अधिकारी इसे इंग्लैंड ले गए थे। हिंदू संगठन लंबे समय से इसकी वापसी की मांग कर रहे हैं। कोर्ट ने अंतरसिंह की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें दोनों पक्षों में सौहार्द बनाए रखने के लिए किसी व्यवस्था का आदेश देने की मांग की गई थी।
इस फैसले के बाद मंदिर पक्ष में खुशी का माहौल है। मंदिर पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, "यह हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिलने की दिशा में एक बड़ी जीत है।" फैसले के तुरंत बाद इंदौर के हाई कोर्ट गेट 3 के सामने हिंदू समर्थकों ने जश्न मनाया। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चुनौती देने की तैयारी कर ली है। मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद, अरशद वारसी और शोभा मेनन ने पैरवी की थी, जबकि मंदिर पक्ष से विष्णु शंकर जैन और मनीष गुप्ता ने तर्क प्रस्तुत किए थे। अब भोजशाला परिसर में नमाज पर रोक लग गई है और केवल पूजा-अर्चना की जाएगी।
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सुरक्षा व्यवस्था और आगे की राह
फैसले की संवेदनशीलता को देखते हुए धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह अलर्ट मोड (Alert mode) पर हैं। गुरुवार रात से ही शहर में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश (Prohibitory orders) लागू कर दिए गए हैं। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना, विरोध या अफवाह से निपटने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। भोजशाला परिसर सहित शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, और पुलिस की लगातार गश्त जारी है।
यह फैसला भले ही एक महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव हो, लेकिन विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। मुस्लिम पक्ष द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी के साथ, यह मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत में पहुंचेगा। वाग्देवी प्रतिमा की वापसी के लिए सरकार के प्रयासों पर भी सबकी निगाहें टिकी रहेंगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि न्यायिक प्रक्रिया का अगला चरण क्या मोड़ लेता है और इस ऐतिहासिक स्थल का भविष्य किस दिशा में आगे बढ़ता है। फिलहाल, धार भोजशाला पर हाई कोर्ट का यह निर्णय हिंदू समाज के लिए एक बड़ी राहत और जीत के रूप में देखा जा रहा है।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.