हरियाणा विधानसभा में धान घोटाला: आरोप-प्रत्यारोप की 'बंपर' फसल और जनता...
चंडीगढ़ की विधानसभा में आजकल धान की फसल नहीं, बल्कि आरोपों की फसल लहलहा रही है! हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र का छठा दिन, और मुद्दा वही, जो हमारे देश में कभी पुराना नहीं होता – घोटाला! खासकर जब बात धान खरीद में कथित धांधली की हो, तो सदन में हंगामा होना तो बनता है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा के बीच तीखी बहस ने माहौल को ऐसा गरमाया कि लगा जैसे कोई हाई-वोल्टेज ड्रामा चल रहा हो। और हम, आम भारतीय, इस 'फ्री एंटरटेनमेंट' का पूरा लुत्फ उठा रहे हैं!
तो भैया, हुआ यूं कि प्रश्नकाल के बाद शून्यकाल में कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा ने एक 'विशेष ध्यानाकर्षण प्रस्ताव' रखा। उन्होंने सीधे आरोप लगाया कि यह कोई छोटा-मोटा घोटाला नहीं, बल्कि 'बड़ा घोटाला' है, जो 'बिना राजनीतिक संरक्षण के संभव ही नहीं।' अब जब बात इतने बड़े संरक्षण की आती है, तो जनता के कान खड़े हो जाते हैं। इसके बाद आदित्य सुरजेवाला, आदित्य देवीलाल और बीबी बत्तरा जैसे 'खेमे के खिलाड़ी' भी मैदान में उतरे और गंभीर सवाल उठाए। असल में, यह सिर्फ हरियाणा का मामला नहीं, यह तो उस हर राज्य की कहानी है जहां 'सिस्टम' थोड़ा लचीला और 'अतिथि सत्कार' वाला हो जाता है।
धान घोटाला: 'अतिथि धान' और 'गेट पास' का रहस्य
अशोक अरोड़ा का आरोप था कि उत्तर प्रदेश और बिहार से धान हरियाणा में आ रहा है और उसे 'गेट पास' भी मिल रहे हैं। अब आप ही बताइए, जब धान भी 'बॉर्डर क्रॉस' करने लगे, तो फिर देश की सुरक्षा का क्या? यह तो सीधे-सीधे प्रदेश के किसानों के पेट पर लात मारने जैसा है! आदित्य सुरजेवाला ने इसे 'इलीगल बॉर्डर क्रॉसिंग' कहा, सुनकर लगा जैसे धान नहीं, कोई अंतरराष्ट्रीय जासूस हो! और इनेलो विधायक आदित्य देवीलाल ने तो आंकड़े ही बदल दिए, सीधे 19 हजार करोड़ रुपये के सालाना घोटाले का दावा ठोक दिया और सीबीआई जांच की मांग कर डाली। इतना बड़ा आंकड़ा तो शायद आरबीआई के गवर्नर को भी चक्कर दिला दे!
लेकिन हमारे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी कोई कच्चे खिलाड़ी नहीं हैं। उन्होंने तुरंत मोर्चा संभाला और बताया कि सरकार 'सो नहीं रही थी'। उन्होंने कार्रवाई का पूरा ब्योरा रखा, जिसे सुनकर लगा कि सरकार ने तो धान घोटालेबाजों के खिलाफ 'ऑपरेशन क्लीन' चला रखा है। संयुक्त कमेटी से राइस मिलों का सत्यापन, अनियमितता मिलने पर 12 एफआईआर, 75 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ चार्जशीट, 28 निलंबन और 6 करोड़ 37 लाख रुपये का जुर्माना! वाह! इतना एक्शन तो बॉलीवुड की फिल्मों में भी कम देखने को मिलता है। भविष्य में गड़बड़ी रोकने के लिए 'ई-खरीद पोर्टल अपग्रेड', 'मंडियों की जियो-फेंसिंग' और 'कैमरे' लगाने जैसे 'आधुनिक' उपाय भी बताए गए। अब धान चोरों को 'हाई-टेक' चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा!
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आरोप-प्रत्यारोप का खेल और 'डेटा की सफाई'
सीएम सैनी ने बताया कि 358 करोड़ 52 लाख रुपये सीधे किसानों के खातों में बाजरे की राशि भेजी गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी में धान खरीद का आंकड़ा शून्य होना इस बात का संकेत है कि डेटा 'वास्तविक' है, 'कृत्रिम बढ़ोतरी' नहीं। मतलब, अगर कहीं खरीद नहीं हुई, तो उसे 'ईमानदारी' का सबूत माना जाए! इस पर सदन में फिर हंगामा हुआ। सीएम ने कांग्रेस के समय के 'बड़े घोटालों' का जिक्र किया, जिस पर कांग्रेस विधायकों ने जोरदार विरोध किया। अशोक अरोड़ा ने चुटकी ली, 'यदि पहले भी घोटाले हुए तो उनकी भी सीबीआई जांच करवा दी जाए।' मंत्री रणबीर गंगवा की टिप्पणी पर भी कांग्रेस ने हंगामा किया। बीबी बत्तरा ने कहा कि यह घोटाला पिछले 10 साल से चल रहा है और मिल मालिकों व आढ़तियों की मिलीभगत से हुआ है। सरकार ने दोहराया कि खरीद प्रक्रिया भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार होती है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मतलब, 'सब ठीक है' वाली पुरानी धुन।
तो जनाब, हरियाणा विधानसभा में धान पर गरमा-गरम बहस का यह एपिसोड हमें सिखाता है कि कुछ चीजें कभी नहीं बदलतीं। जैसे धान का 'अतिथि सत्कार' और उस पर होने वाले 'संसदीय संग्राम'। यह तो भारतीय राजनीति का 'एवरग्रीन' ट्रेंड है, जो हर सत्र में 'रीमास्टर' होकर आता है। हर बार नए किरदार, नए डायलॉग, लेकिन कहानी वही पुरानी – 'घोटाला हुआ है, कौन जिम्मेदार है?' उम्मीद है कि अगले सत्र तक इस 'अतिथि' समस्या का कोई स्थायी समाधान मिल जाएगा, वरना 'कैमरे' और 'जियो-फेंसिंग' भी शायद 'घोटालेबाजों' के लिए सिर्फ नई चुनौतियां ही बन कर रह जाएंगी, और हम सिर्फ तालियां पीटते रह जाएंगे!
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.