पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल: ममता को सबसे बड़ा झटका, TMC के 19 सांसद बागी गुट में शामिल होने का दावा
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सुलग रही असंतोष की चिंगारी को एक बड़े सियासी विस्फोट में बदल दिया है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पार्टी के 19 सांसद बागी गुट में शामिल हो चुके हैं, जिनमें आसनसोल से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक अभूतपूर्व संकट खड़ा कर रहा है और पार्टी के भविष्य पर गंभीर सवालिया निशान लगा रहा है।
तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों से मिल रही खबरों के मुताबिक, पार्टी अभी सीधे दो हिस्सों में बंटने की कगार पर खड़ी है। इस दावे ने बंगाल के राजनीतिक गलियारों में ऊहापोह और तेज कर दी है। जिन बागी सांसदों के नाम सामने आ रहे हैं, उनमें ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली जादवपुर से सांसद सायनी घोष और कोलकाता दक्षिण की सांसद माला रॉय भी शामिल हैं, जिन्होंने कथित तौर पर काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले अलग गुट को समर्थन देने की सहमति जताई है। यदि यह औपचारिक रूप लेता है, तो लोकसभा में विद्रोही सांसदों की संख्या 22 तक पहुंच सकती है।
बागी खेमे में कौन-कौन से प्रमुख चेहरे?
सूत्रों द्वारा जारी की गई बागी सांसदों की सूची में राज्य के अलग-अलग हिस्सों से चुनकर आए कई बड़े चेहरे शामिल हैं। यह सूची तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि इसमें पार्टी के कई स्थापित नेता और नए चेहरे दोनों ही शामिल हैं। प्रमुख नामों में शामिल हैं:
शत्रुघ्न सिन्हा (आसनसोल), काकोली घोष दस्तीदार (बारासात), जगदीश चंद्र बसुनिया (कूचबिहार), खलीलुर रहमान (जंगीपुर), यूसुफ पठान (बहरामपुर), अबू ताहिर खान (मुर्शिदाबाद), पार्थ भौमिक (बैरकपुर), बापी हलदार (मथुरापुर), सायनी घोष (जादवपुर), माला रॉय (कोलकाता दक्षिण), मिताली बाग (आरामबाग), दीपक अधिकारी / देव (घाटाल), कालीपद सोरेन (झाड़ग्राम), जून मालिया (मेदिनीपुर), अरूप चक्रवर्ती (बांकुरा), शर्मिला सरकार (बर्धमान पूर्व), असित कुमार माल (बोलपुर), शताब्दी रॉय (बीरभूम), और रचना बनर्जी (हुगली)।
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यह सूची न केवल पार्टी के संसदीय दल में एक बड़े विभाजन का संकेत देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि असंतोष जमीनी स्तर से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक फैल चुका है। राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने भी हाल ही में पार्टी और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, जिसे उन्होंने व्यक्तिगत और राजनीतिक कारणों से प्रेरित बताया था। उधर, विधानसभा में भी तृणमूल की स्थिति कमजोर होती दिख रही है। विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि विद्रोही विधायकों की संख्या बढ़कर 64 हो गई है और यह आंकड़ा आगे भी बढ़ेगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि "हम ही असली तृणमूल हैं, कांग्रेस में विलय का कोई सवाल नहीं है"।
नेतृत्व पर गंभीर सवाल और आगे की राह
इस संकट के बीच, वरिष्ठ नेता शताब्दी रॉय ने पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यदि केवल दो सांसद पार्टी छोड़ते तो इसे व्यक्तिगत मामला माना जा सकता था, लेकिन 20 से अधिक सांसदों का साथ छोड़ना नेतृत्व की गंभीर विफलता का प्रमाण है। शताब्दी रॉय ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने संगठन के भीतर बढ़ती नाराजगी को समय रहते नहीं समझा, जबकि अभिषेक बनर्जी और आई-पैक (I-PAC) को अत्यधिक अधिकार देने से जमीनी कार्यकर्ताओं का भरोसा कमजोर हुआ। यह बयान पार्टी के अंदरूनी कलह को और उजागर करता है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस अभूतपूर्व संकट से गुजर रही है। पार्टी के भीतर जारी बगावत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। यह घटनाक्रम न केवल पार्टी की सांगठनिक ताकत को कमजोर करेगा, बल्कि आगामी चुनावों में इसके प्रदर्शन पर भी गहरा असर डाल सकता है। ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वे कैसे इस बगावत को संभालते हैं और पार्टी की एकजुटता बनाए रखते हैं। आने वाले दिन बंगाल की राजनीति के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.