अल्बानिया के तिराना में आयोजित प्रतिष्ठित मुहामेत मालो 2026 कुश्ती टूर्नामेंट में भारतीय पहलवान सविता ने महिलाओं की 62 किग्रा फ्रीस्टाइल कैटेगरी में कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है। यह 20 वर्षीय युवा पहलवान के लिए यूडब्ल्यूडब्ल्यू रैंकिंग सीरीज इवेंट में पहला पोडियम स्थान है। सविता की इस जीत के साथ ही, इस साल के दूसरे यूडब्ल्यूडब्ल्यू रैंकिंग सीरीज इवेंट में भारत के पदकों का आंकड़ा बढ़कर चार हो गया है, जिसमें एक स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य पदक शामिल हैं। यह उपलब्धि भारतीय कुश्ती के बढ़ते कद और युवा प्रतिभाओं की क्षमता को दर्शाती है, जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार अपनी छाप छोड़ रहे हैं।
सविता का शानदार प्रदर्शन और भारत की पदक तालिका
शनिवार को हुए कांस्य पदक मुकाबले में सविता ने 2025 ज़ाग्रेब ओपन चैंपियन, अमेरिका की अडाउगो नवाचुक्वु को 7-5 के करीबी अंतर से मात दी। इस जीत ने उन्हें सीनियर यूडब्ल्यूडब्ल्यू टूर्नामेंट में अपना पहला पदक दिलाया। सविता का टूर्नामेंट में सफर उल्लेखनीय रहा। उन्होंने क्वालिफिकेशन राउंड में ब्राजील की ओलंपियन लाइस नून्स को पिन करके शानदार शुरुआत की, लेकिन क्वार्टरफाइनल में मौजूदा यूरोपीय चैंपियन अनास्तासिया सिडेलनिकोवा से 12-2 से हार गईं। सिडेलनिकोवा के फाइनल में पहुंचने के कारण सविता को कांस्य पदक का मौका मिला, जिसे उन्होंने बखूबी भुनाया।
युवा चैंपियन का ट्रैक रिकॉर्ड
सविता का यह प्रदर्शन उनके शानदार आयु-वर्ग करियर का विस्तार है। वह अंडर-17 और अंडर-20 वर्ग की पूर्व विश्व चैंपियन रह चुकी हैं। 2023 में उन्होंने जॉर्डन में अंडर-20 विश्व स्वर्ण पदक जीता था और उसी वर्ष तुर्किये में अपना अंडर-17 विश्व खिताब भी बरकरार रखा था। इसके अतिरिक्त, वह दो बार की अंडर-17 एशियाई चैंपियन भी हैं, जिन्होंने 2022 और 2023 में बिश्केक में लगातार खिताब अपने नाम किए हैं। यह दर्शाता है कि सविता लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन कर रही हैं और अब उन्होंने सीनियर वर्ग में भी अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी है।
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सविता की सफलता के अलावा, भारत ने इस टूर्नामेंट में अन्य पदक भी हासिल किए हैं। अंडर-23 विश्व चैंपियन सुजीत कलकल ने पुरुषों की 65 किग्रा कैटेगरी में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय दल को पहली बड़ी सफलता दिलाई थी। वहीं, महिलाओं की 50 किग्रा फ्रीस्टाइल कैटेगरी में प्रियांशी प्रजापत ने रजत पदक और मुस्कान ने कांस्य पदक जीतकर भारत की झोली भरी। हालांकि, कुछ निराशाएं भी हाथ लगीं, जब अपेक्षा विट्ठल पाटिल (65 किग्रा) और कीर्ति (68 किग्रा) अपने-अपने कांस्य पदक मुकाबलों में हार गईं। ग्रीको-रोमन वर्ग में 77 किग्रा कैटेगरी में निशांत फोगाट और अमन मेडल राउंड से पहले ही बाहर हो गए।
भारतीय कुश्ती के लिए भविष्य की संभावनाएं
भारत ने मुहामेत मालो 2026 के लिए 48 सदस्यीय मजबूत कुश्ती दल भेजा था, जिसमें पुरुष फ्रीस्टाइल, महिला वर्ग और ग्रीको-रोमन कैटेगरी में 16-16 पहलवान शामिल थे। ओलंपिक पदक विजेता अमन सहरावत और दो बार की विश्व कुश्ती चैंपियनशिप कांस्य पदक विजेता अंतिम पंघाल जैसे प्रमुख पहलवानों की अनुपस्थिति के बावजूद, युवा खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन भारतीय कुश्ती की गहराई और प्रतिभा पूल की मजबूती को दर्शाता है। यूडब्ल्यूडब्ल्यू रैंकिंग सीरीज इवेंट्स अंतरराष्ट्रीय अनुभव प्रदान करने और महत्वपूर्ण रैंकिंग अंक हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो बड़े टूर्नामेंटों में बेहतर सीडिंग सुनिश्चित करते हैं।
यह टूर्नामेंट रविवार को संपन्न होगा, और भारत के चार पदकों के साथ, यह प्रदर्शन देश में कुश्ती के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत देता है। युवा पहलवानों का अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकना यह बताता है कि भारतीय कुश्ती सही दिशा में आगे बढ़ रही है और भविष्य में और अधिक सफलताएं प्राप्त करने की क्षमता रखती है। यह परिणाम न केवल व्यक्तिगत पहलवानों के लिए बल्कि पूरे भारतीय खेल समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.