नई दिल्ली: भारत अब संचार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखने को तैयार है। दूर संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हाल ही में News18 Rising Bharat Summit में घोषणा की है कि भारत 6G टेक्नोलॉजी के मामले में दुनिया का नेतृत्व करने की तैयारी कर रहा है। यह एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है, क्योंकि भारत पहले मोबाइल टेक्नोलॉजी में वैश्विक स्तर पर पीछे रहता था, लेकिन अब वह न केवल वैश्विक दौड़ में शामिल है, बल्कि नेतृत्व की भूमिका निभाने का लक्ष्य भी रखता है। यह कदम देश के तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रभाव को मजबूत करेगा।
सिंधिया ने अपने संबोधन में बताया कि कैसे भारत ने 2G, 3G और 4G जैसी पिछली मोबाइल तकनीकों में हमेशा दुनिया का अनुसरण किया। हालांकि, 5G के आगमन के साथ यह तस्वीर पूरी तरह बदल गई। भारत ने मात्र 22 महीनों में दुनिया का सबसे तेज़ 5G रोलआउट हासिल किया, जिसमें लगभग 4.5 लाख करोड़ रुपये का भारी निवेश हुआ। आज, देश के लगभग 35% मोबाइल उपयोगकर्ता 5G सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं, जो एक अभूतपूर्व उपलब्धि है।
भारत 6G टेक्नोलॉजी: वैश्विक मानकों में साझेदारी
मंत्री सिंधिया ने स्पष्ट रूप से कहा, “5G में हम दुनिया के साथ चले, लेकिन 6G में हमारा लक्ष्य दुनिया को लीड करना है।” इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में 'भारत 6G एलायंस' की शुरुआत की परिकल्पना की थी। यह एलायंस एक ऐसा व्यापक मंच है, जिसमें विभिन्न कंपनियां, वैज्ञानिक, स्टार्टअप, शोधकर्ता और पूरी तकनीकी मूल्य श्रृंखला एक साथ मिलकर काम कर रही है। शुरुआत में इस एलायंस में केवल 15 सदस्य थे, लेकिन अब यह बढ़कर 100 हो चुके हैं, जो इसकी बढ़ती स्वीकार्यता और प्रभाव को दर्शाता है।
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इस पहल की वैश्विक पहुंच भी तेजी से बढ़ रही है। भारत ने यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, ब्राजील और कई अफ्रीकी देशों सहित 30 से अधिक देशों के साथ साझेदारी की है। यह साझेदारी भारत को 6G के अंतरराष्ट्रीय मानक तय करने वाली मेज पर लाती है, जहां पहले भारत केवल एक दर्शक की भूमिका में होता था। अब भारत इन महत्वपूर्ण चर्चाओं में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है और निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा बन रहा है।
सिंधिया ने यह भी रेखांकित किया कि भारत का "हर व्यक्ति तक हर जगह कनेक्टिविटी" का प्रस्ताव, 6G के अंतरराष्ट्रीय मानकों में शामिल कर लिया गया है। ये मानक अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) और 3GPP जैसी वैश्विक संस्थाओं द्वारा निर्धारित किए जा रहे हैं। यह भारतीय दृष्टिकोण को वैश्विक संचार भविष्य में एकीकृत करने की दिशा में एक बड़ी सफलता है, जो समावेशी विकास और डिजिटल पहुंच के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
तकनीकी नेतृत्व और आत्मनिर्भरता का मार्ग
भारत का 6G टेक्नोलॉजी में वैश्विक नेतृत्व का लक्ष्य केवल तकनीकी प्रगति तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की बढ़ती भू-राजनीतिक और आर्थिक शक्ति का भी प्रतीक है। यह कदम भारत को एक ऐसे राष्ट्र के रूप में स्थापित करता है जो न केवल उन्नत तकनीकों को अपनाता है, बल्कि उन्हें विकसित भी करता है और उनके वैश्विक मानकों को आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण को मजबूत करता है, जहां देश अपनी तकनीकी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं समाधान प्रदान करता है।
यह पहल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर पैदा करेगी, स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाएगी, और डिजिटल विभाजन को पाटने में मदद करेगी। वैश्विक गठबंधन के माध्यम से, भारत अन्य देशों के साथ मिलकर नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देगा, जिससे न केवल भारत को बल्कि पूरे विश्व को लाभ होगा। यह दीर्घकालिक रूप से भारत को एक प्रमुख तकनीकी महाशक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारत का 6G टेक्नोलॉजी में वैश्विक नेतृत्व का महत्वाकांक्षी लक्ष्य देश की बदलती छवि और बढ़ती तकनीकी क्षमता का प्रमाण है। 5G में मिली सफलता के बाद, भारत अब 6G के साथ दुनिया का मार्गदर्शन करने के लिए तैयार है, जो 'भारत 6G एलायंस' और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के माध्यम से संभव होगा। यह डिजिटल भारत के सपने को साकार करने और हर नागरिक तक उन्नत कनेक्टिविटी पहुंचाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है, जो आने वाले दशकों में देश के भविष्य को आकार देगा।
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