गुरुवार को दिल्ली में भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों – विदेश, शिपिंग, पेट्रोलियम, सूचना और प्रसारण – ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देश में कच्चे तेल और गैस की किल्लत को लेकर उठ रही चिंताओं पर स्थिति स्पष्ट की। सरकार ने स्वीकार किया कि मौजूदा हालात चुनौतीपूर्ण हैं और घबराहट के कारण देशभर में एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग में कई गुना बढ़ोतरी देखी गई है। हालांकि, अधिकारियों ने भारत में ईंधन आपूर्ति की समग्र स्थिति को संतोषजनक बताया और नागरिकों से घबराहट से बचने का आग्रह किया। यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब अमेरिका-इजराइल संघर्ष के बीच ऊर्जा सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंताएं बढ़ रही हैं, जिसका सीधा असर आम भारतीय नागरिक और अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
सरकार का आश्वासन: ईंधन की स्थिति संतोषजनक
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की उपलब्धता काफी सहज और संतोषजनक है। भारत अपनी आवश्यकता का लगभग 60% एलपीजी आयात करता है, जिसमें से करीब 90% आपूर्ति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आती है। देश में रोजाना लगभग 50 लाख एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी की जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के लगभग एक लाख पेट्रोल पंपों में से किसी पर भी ईंधन खत्म होने (ड्राई-आउट) की स्थिति नहीं है।
पेट्रोलियम मंत्रालय का बयान
मंत्रालय ने 9 मार्च को एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट के तहत सभी रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने का आदेश दिया था, जिसके बाद घरेलू उत्पादन 25% से बढ़कर 28% हो गया है। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकारों को 48 हजार किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन आवंटित किया जाएगा। सुजाता शर्मा ने वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और प्राथमिकता के आधार पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
विदेश और शिपिंग मंत्रालय की भूमिका
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ईरान छोड़ना चाह रहे भारतीय नागरिकों की मदद कर रहा है। उन्हें आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते बाहर निकलने में सहायता दी जा रही है। उन्होंने दो जहाजों पर हुए हमलों का भी जिक्र किया, जिनमें एक भारतीय नागरिक की मौत हुई और कुछ लापता हुए। शिपिंग मंत्रालय के अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा ने जानकारी दी कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में 28 भारतीय जहाज मौजूद हैं, जिन पर 778 भारतीय नाविक सवार हैं, और सरकार उनकी सुरक्षा पर लगातार नजर रख रही है।
Similar Posts
- एलपीजी संकट: सरकार का बड़ा बयान, घरेलू आपूर्ति सर्वोच्च प्राथमिकता, 'स्पेशल कमेटी' गठित
- एलपीजी गैस की कीमत बढ़ी: आम आदमी को बड़ा झटका, घरेलू सिलेंडर 60 और कमर्शियल 115 रुपये महंगा
- ईरान-इजराइल युद्ध का शेयर बाजार भारत पर कहर: सेंसेक्स 6,723 अंक टूटा, निवेशकों को 34 लाख करोड़ का नुकसान
- भारत का कोयला उत्पादन रिकॉर्ड तोड़: FY26 में 200 मिलियन टन पार, जानिए इस उपलब्धि की वजह और भविष्य की राह
- ईरान से भारतीयों की सुरक्षित घर वापसी: भारत सरकार का व्यापक प्लान, दो देश कर रहे मदद
आपूर्ति संकट के प्रमुख कारण
सरकार ने मौजूदा आपूर्ति संकट की दो प्रमुख वजहें बताईं:
होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का लगभग बंद होना है। यह 167 किमी लंबा जलमार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान-अमेरिका-इजराइल जंग के कारण यह मार्ग अब सुरक्षित नहीं रहा है, जिससे तेल टैंकरों का आवागमन बाधित हुआ है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% और भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल व 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है।
LNG प्लांट पर ड्रोन हमले
पिछले हफ्ते ईरान द्वारा यूएई, कतर, कुवैत और सऊदी जैसे देशों में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमलों के बाद, भारत को गैस आपूर्ति करने वाले सबसे बड़े देश कतर ने अपने एलएनजी प्लांट का उत्पादन रोक दिया है। भारत अपनी 40% एलएनजी (लगभग 2.7 करोड़ टन सालाना) कतर से ही आयात करता है, जिससे देश में गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस स्थिति के कारण देशभर में गैस सिलेंडर एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें देखी जा रही हैं और कालाबाजारी भी बढ़ी है, जहां ₹900 का घरेलू गैस सिलेंडर ₹1800 तक में बेचा जा रहा है।
आगे की राह और संभावित समाधान
इंडियन ऑयल के मुख्य महाप्रबंधक (एलपीजी) के.एम. ठाकुर ने ग्राहकों से घबराहट में बुकिंग न करने की अपील की है। सरकार अब अमेरिका जैसे देशों से वैकल्पिक कार्गो मंगाने पर विचार कर रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर G7 देश अपने आपातकालीन तेल भंडार से आपूर्ति जारी करने पर चर्चा कर रहे हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट को कम किया जा सके। रूस और अल्जीरिया से भी अतिरिक्त कच्चे तेल की उम्मीद है। यह चुनौतियां भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करती हैं, और सरकार अल्पकालिक घबराहट को रोकने के साथ-साथ दीर्घकालिक आपूर्ति विविधीकरण पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।
कुल मिलाकर, सरकार ने देश में ईंधन की उपलब्धता को लेकर उत्पन्न हुई घबराहट को शांत करने का प्रयास किया है, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और कतर के एलएनजी उत्पादन में व्यवधान जैसी वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियां बनी हुई हैं। भारत सरकार इन चुनौतियों से निपटने और आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखने के लिए विभिन्न मोर्चों पर काम कर रही है, ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। आने वाले समय में, वैकल्पिक स्रोतों और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.