ईरान और इजराइल के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव ने शेयर बाजार भारत पर गहरा असर डाला है। इस युद्ध की आशंकाओं के चलते भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से सेंसेक्स 6,723 अंक तक टूट चुका है, जिसके परिणामस्वरूप निवेशकों की संपत्ति में 34 लाख करोड़ रुपये की भारी कमी आई है। यह स्थिति आम नागरिकों और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए चिंताजनक है, क्योंकि बाजार की अस्थिरता सीधे तौर पर निवेश और आर्थिक विकास को प्रभावित करती है।
ईरान-इजराइल युद्ध का भारतीय शेयर बाजार पर गहरा असर
अमरीका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और इजराइल-ईरान संघर्ष के लंबा खिंचने की आशंकाओं ने वैश्विक बाजारों में निराशा फैला दी है। इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा, जहां बीते हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को निफ्टी 50 और सेंसेक्स 2% से अधिक गिर गए। युद्ध की शुरुआत से अब तक, सेंसेक्स में 6,723 अंकों की गिरावट आई है, जो प्रतिशत के हिसाब से 8.27% की कमी है। यह गिरावट इतनी बड़ी है कि मार्च 2026 में भारतीय बाजार 8% गिर चुके हैं, जो मार्च 2020 में कोरोना महामारी के बाद की सबसे बड़ी मासिक गिरावट है।
पश्चिम एशिया संकट के कारण भारतीय बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों की बाजार पूंजी (मार्केट कैपिटलाइजेशन) में 34 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है। हालांकि, इस बड़ी गिरावट के बावजूद, भारतीय शेयर बाजार (निफ्टी 50) का वैल्यूएशन अमरीका और जापान को छोड़कर अन्य सभी देशों की तुलना में अभी भी अधिक है, जिसका अर्थ है कि भारतीय बाजार अभी भी अपेक्षाकृत महंगा है।
बाजार में गिरावट के कई अन्य कारण भी रहे हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और रुपये में लगातार जारी गिरावट ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। इसके साथ ही, भारत ने अमरीका के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने को कुछ महीनों के लिए टालने का फैसला किया है। यह निर्णय ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत सहित 16 देशों के खिलाफ नई जांच शुरू करने के बाद लिया गया, जिसने बाजार की नकारात्मक धारणा को और मजबूत किया। पहले से ही दबाव में चल रहे बाजार में मेटल स्टॉक्स में बड़ी बिकवाली ने शुक्रवार को गिरावट को और बढ़ा दिया।
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अमरीका-ईरान के बीच सैन्य तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। नॉर्वे की एनर्जी रिसर्च फर्म रायस्टैड एनर्जी ने चेतावनी दी है कि इस लड़ाई से खाड़ी देशों की 20 लाख बैरल प्रतिदिन तक की रिफाइनिंग क्षमता खतरे में पड़ गई है, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली और भविष्य की चुनौतियां
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) पहले से ही भारतीय बाजार में बिकवाल बने हुए थे, लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद उन्होंने अपनी बिकवाली और तेज कर दी है। इसके चलते इंडेक्स में भारी वजन रखने वाले शेयर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, FII ने मार्च में अब तक 56,883 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। इस भारी बिकवाली ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला है।
आगे की राह चुनौतीपूर्ण दिख रही है। भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, रुपये का कमजोर होना और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भारतीय शेयर बाजार के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह की अस्थिरता पैदा कर सकती है। हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित मजबूती और विकास की संभावनाएं बनी हुई हैं, लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही हैं। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे बाजार की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखें और सोच-समझकर निवेश के फैसले लें।
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