देश की रक्षा क्षमता को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करने की दिशा में भारत एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की एक महत्वपूर्ण बैठक में कई बड़े रक्षा सौदों को मंजूरी देने की तैयारी में भारत है, जिसका उद्देश्य तीनों सेनाओं की मारक क्षमता और परिचालन दक्षता को बढ़ाना है। इस बैठक में S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की अतिरिक्त यूनिट्स, ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलें, स्वदेशी अनमैन्ड कॉम्बैट जेट्स और मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट जैसी कई रणनीतिक परियोजनाएं शामिल हैं। यह निर्णय न केवल भारत की सुरक्षा तैयारियों को सुदृढ़ करेगा, बल्कि 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को भी प्रोत्साहन देगा, जो देश के सामरिक भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत की रक्षा क्षमता को नई उड़ान: प्रमुख सौदों पर मंथन
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में होने वाली इस उच्च स्तरीय बैठक में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, तीनों सेनाओं के प्रमुख और रक्षा सचिव जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारतीय वायुसेना के लिए 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदने का प्रस्ताव सबसे अहम एजेंडा में से एक है। ये विमान मौजूदा बेड़े को आधुनिक बनाने और रसद क्षमताओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस टेंडर में ब्राजील की एम्ब्रेयर, अमेरिकी लॉकहीड मार्टिन और रूसी इल्यूशिन जैसी वैश्विक कंपनियां प्रमुख दावेदार मानी जा रही हैं।
S-400 सुदर्शन: पांच अतिरिक्त यूनिट्स पर नजर
भारत की वायु रक्षा प्रणाली की रीढ़ माने जाने वाले S-400 'सुदर्शन' एयर डिफेंस सिस्टम की पांच और यूनिट्स खरीदने की योजना को भी मंजूरी मिलने की संभावना है। भारत पहले ही रूस से 5 S-400 सिस्टम की डिलीवरी का इंतजार कर रहा है, जिसमें से चौथी स्क्वाड्रन अप्रैल-मई तक और पांचवीं नवंबर-दिसंबर तक आने की उम्मीद है। इन अतिरिक्त यूनिट्स की खरीद से देश की हवाई सुरक्षा और अधिक अभेद्य हो जाएगी, जिससे किसी भी हवाई खतरे से निपटने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ावा: अनमैन्ड कॉम्बैट जेट्स और ब्रह्मोस
बैठक में भारतीय वायुसेना के लिए लगभग 4 स्क्वाड्रन्स स्वदेशी रिमोटली पाइलटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट, जिन्हें अनमैन्ड कॉम्बैट जेट्स भी कहा जाता है, खरीदने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। ये अत्याधुनिक ड्रोन लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता में एक नया आयाम जोड़ेंगे। वहीं, भारतीय थलसेना भी ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की बड़ी संख्या में खरीद का प्रस्ताव लेकर आई है। 800 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम ये मिसाइलें जमीनी बलों की आक्रामक शक्ति को कई गुना बढ़ा देंगी। इन सौदों से देश की सैन्य ताकत में गुणात्मक सुधार आएगा और स्वदेशी रक्षा उद्योग को भी गति मिलेगी।
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आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ते कदम: प्रोजेक्ट कुशा और धनुष
इन बड़े सौदों के अलावा, भारतीय वायुसेना को स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली 'प्रोजेक्ट कुशा' की 5 स्क्वाड्रन्स खरीदने की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है, जिसका नेतृत्व DRDO कर रहा है। यह परियोजना भारत को अपनी मिसाइल रक्षा क्षमताओं में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही, भारतीय थलसेना के लिए 300 स्वदेशी 'धनुष' होवित्जर तोपखाने खरीदने के प्रस्ताव पर भी चर्चा और मंजूरी होने की संभावना है। 'धनुष' तोपें भारतीय सेना की तोपखाने की क्षमता को मजबूत करने और स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने में सहायक होंगी।
ये सभी सौदे भारत की रक्षा रणनीति में एक स्पष्ट बदलाव का संकेत देते हैं, जहां आधुनिक सैन्य उपकरणों की खरीद के साथ-साथ स्वदेशी अनुसंधान और विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। यह न केवल देश की रक्षा जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की स्थिति को भी मजबूत करेगा। इन निर्णयों का सीधा प्रभाव देश की सुरक्षा पर पड़ेगा, जिससे भारत अपनी सीमाओं की रक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में अधिक सक्षम होगा। दीर्घकालिक रूप से, यह कदम भारत को एक प्रमुख रक्षा निर्माता और निर्यातक के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा, जिससे अर्थव्यवस्था को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
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