लखनऊ: कला और संस्कृति के शहर लखनऊ में एक बार फिर रंगमंच का जादू बिखरने वाला है। बेन्हर्स फोरम फॉर थिएट्रिकल आर्ट्स (बफ्टा) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय लखनऊ नाट्य उत्सव 'नाट्य निर्वाण' सीजन-2 का आगाज़ 27 मार्च से होने जा रहा है। विश्व रंगमंच दिवस के शुभ अवसर पर शुरू हो रहा यह उत्सव शहर के कला प्रेमियों और रंगमंच जगत के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है। इसका पोस्टर सोमवार को गोमतीनगर स्थित शीरोज कैफे में एक प्रेसवार्ता के दौरान लॉन्च किया गया, जिसने इस भव्य आयोजन की औपचारिक शुरुआत की घोषणा की।
यह नाट्य उत्सव न केवल लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करेगा, बल्कि देश भर से आए प्रसिद्ध कलाकारों और निर्देशकों को एक मंच भी प्रदान करेगा। आयोजकों का लक्ष्य रंगमंच के प्रति जनसामान्य की रुचि को बढ़ाना और इस कला विधा को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। 'नाट्य निर्वाण' सीजन-2 लखनऊ के कला परिदृश्य में एक नई ऊर्जा का संचार करने के लिए तैयार है, जो दर्शकों को विभिन्न शैलियों और विषयों पर आधारित नाटकों का अनुभव कराएगा।
लखनऊ नाट्य उत्सव: ‘नाट्य निर्वाण’ में सम्मान और नाट्य प्रस्तुतियां
बफ्टा के संस्थापक तारिक खान ने प्रेसवार्ता में बताया कि उत्सव का शुभारंभ 27 मार्च को विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर होगा। इस तीन दिवसीय आयोजन में कई अंग्रेजी नाटकों का भी मंचन किया जाएगा, जो दर्शकों को विविधतापूर्ण नाट्य अनुभव प्रदान करेगा। रंगमंच के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए फिल्मकार व नाटककार जावेद सिद्दीकी और प्रसिद्ध अभिनेत्री व नाटककार नादिरा बब्बर को 'द थेस्पियन' सम्मान से नवाजा जाएगा। यह लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड उनके दशकों के समर्पण और कला के प्रति निष्ठा को सलाम है।
बफ्टा की लखनऊ इकाई के निर्देशक शुभम तिवारी और नाट्य उत्सव की क्यूरेटर गुंजन जैन ने जानकारी दी कि यह प्रतिष्ठित आयोजन उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे प्रेक्षागृह में संपन्न होगा। इस उत्सव में दिल्ली, भोपाल, मुंबई और लखनऊ समेत देश के कई कोनों से मशहूर नाट्य निर्देशक अपने छह उत्कृष्ट नाटक लेकर आ रहे हैं। यह विभिन्न शहरों की नाट्य शैलियों और विचारों का संगम होगा, जो दर्शकों के लिए एक अनूठा अनुभव होगा।
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उत्सव के अंतिम दिन, यानी 29 मार्च को, बफ्टा नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के संस्थापक बादल सरकार के 100 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाएगा। यह भारतीय रंगमंच के एक महान स्तंभ को श्रद्धांजलि होगी, जिनके योगदान ने देश में नाट्य कला की दिशा बदल दी। इस विशेष अवसर पर एक परिचर्चा का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें वरिष्ठ नाटककार सलीम आरिफ, बफ्टा के संस्थापक तारिक खान और अनिल रंजन भौमिक जैसे दिग्गज रंगकर्मी शामिल होंगे। यह परिचर्चा बादल सरकार के विचारों और आधुनिक रंगमंच पर उनके प्रभाव पर प्रकाश डालेगी।
नाट्य उत्सव: लखनऊ के सांस्कृतिक पटल पर प्रभाव
‘नाट्य निर्वाण’ सीजन-2 जैसे आयोजन लखनऊ के सांस्कृतिक पटल पर गहरा प्रभाव डालते हैं। ये न केवल शहर के निवासियों को उच्च गुणवत्ता वाले नाट्य प्रदर्शन देखने का अवसर देते हैं, बल्कि स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर के दिग्गजों के साथ जुड़ने और सीखने का मौका भी प्रदान करते हैं। ऐसे उत्सव कला और संस्कृति के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलता है और रंगमंच की विधा को एक नई पहचान मिलती है। यह आयोजन लखनऊ को देश के सांस्कृतिक मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करेगा, जिससे शहर की 'नवाबों के शहर' की पहचान में 'कला और रंगमंच के शहर' का एक नया आयाम जुड़ेगा।
तीन दिवसीय यह नाट्य उत्सव लखनऊ के कला प्रेमियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव का वादा करता है। 'नाट्य निर्वाण' सीजन-2 न केवल मनोरंजन का माध्यम बनेगा, बल्कि विचार-मंथन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र साबित होगा। रंगमंच के इस महाकुंभ में भाग लेने और भारतीय नाट्य कला की समृद्ध परंपरा का अनुभव करने के लिए शहरवासी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.