वैश्विक उथलपुथल के बीच म्याँमार में गहराया भूख संकट: UN की चेतावनी

म्याँमार में भूकम्प प्रभावित लोग खाद्य असुरक्षा और ईंधन संकट का सामना कर रहे हैं।

नैरोबी: पिछले वर्ष म्याँमार में आए विनाशकारी भूकम्प के एक साल बाद भी, देश की आबादी एक गंभीर मानवीय संकट से जूझ रही है, जिस पर अब वैश्विक उथलपुथल का साया मंडरा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एजेंसी, विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के एक नए विश्लेषण के अनुसार, भूकम्प प्रभावित क्षेत्रों में म्याँमार में भूख संकट गहराने की आशंका है, क्योंकि वैश्विक ईंधन संकट और बढ़ती कीमतें आम लोगों की कमर तोड़ रही हैं। यह स्थिति उस देश के लिए और भी चिंताजनक है जो पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता और मानवीय चुनौतियों से जूझ रहा है।

पिछले वर्ष 28 मार्च को आए 7.7 तीव्रता के भूकम्प ने मैंडले, सगाइंग और मैगवे जैसे इलाक़ों में भारी तबाही मचाई थी, जिसमें लगभग 3.8 हज़ार लोगों की जान चली गई और 5 हज़ार से ज़्यादा लोग घायल हुए। इस आपदा ने हज़ारों घरों और बुनियादी ढाँचे को तबाह कर दिया, जिससे लाखों लोग प्रभावित हुए। WFP की रिपोर्ट बताती है कि भूकम्प के एक वर्ष बाद भी, हर 6 में से 1 घर-परिवार खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहा है, जबकि लगभग 50 फ़ीसदी परिवार मामूली तौर पर ही खाद्य सुरक्षित हैं, और किसी भी नए व्यवधान से उनके लिए भोजन की समस्या खड़ी हो सकती है।

म्याँमार में भूख संकट: वैश्विक झटकों से बढ़ी चुनौती

विश्व खाद्य कार्यक्रम के देशीय निदेशक माइकल डनफ़र्ड ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि भूकम्प की बर्बादी से बचे लोग अभी पूरी तरह से उबर भी नहीं पाए थे कि अब उन्हें एक नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। डनफ़र्ड के अनुसार, म्याँमार के लोगों ने हिंसक टकराव, जलवायु आपदाओं और भयावह भूकम्प जैसे अनेक झटकों को सहा है, और अब मध्य पूर्व में भड़के युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक ईंधन संकट ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "हमें अब उनके साथ खड़ा होना होगा। भूकम्प के एक वर्ष बाद, वे एक और ऐसा झटका बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं।"

ईंधन की किल्लत और बढ़ती कीमतें

मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण परिवहन और सप्लाई चेन में भारी उथलपुथल मची हुई है, जिसका सीधा असर म्याँमार में ईंधन की किल्लत के रूप में दिख रहा है। ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे खाद्य वस्तुओं और कृषि सम्बन्धी सामान को लाने-ले जाने की लागत बढ़ गई है। यह अतिरिक्त दबाव उन लोगों पर पड़ रहा है जो पहले से ही अपनी आजीविका चलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस स्थिति का असर उन किसानों पर भी पड़ा है जो मॉनसून के मौसम में अपनी फ़सलों की तैयारी कर रहे थे। अगले तीन महीनों में उर्वरक की मांग बढ़ने की संभावना है, लेकिन ईंधन की कमी और अन्य ज़रूरी सामान की बढ़ती कीमतों के कारण कृषि उत्पादन का ख़र्चा भी बढ़ने की आशंका है।

सहायता की आवश्यकता और दीर्घकालिक स्थिरता

WFP के अनुसार, इस उतार-चढ़ाव का सबसे अधिक असर उन इलाक़ों में होने की आशंका है जो म्याँमार में हिंसा और भूकम्प से सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं, जैसेकि चिन, काचिन, काया, राख़ीन, शन और सगाइंग प्रान्त। म्याँमार की क़रीब 25 प्रतिशत आबादी, यानी 1.24 करोड़ लोग, पहले से ही भरपेट भोजन नहीं पा रहे हैं। पिछले एक वर्ष के दौरान, यूएन एजेंसी ने 5 लाख से अधिक भूकम्प प्रभावितों तक मानवीय राहत और आपदा से उबरने के लिए समर्थन पहुँचाया है।

फ़िलहाल, सहायता संगठन अब आपात राहत मुहैया कराने के बजाय, स्थानीय समुदायों के लिए बुनियादी ढाँचों को बहाल करने में जुटे हैं, ताकि दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है जो संकटग्रस्त समुदायों को अपने पैरों पर फिर से खड़ा होने में मदद करेगा। हालांकि, इस वर्ष देश भर में 15 लाख लोगों तक जीवनरक्षक सहायता पहुँचाने के लिए यूएन खाद्य कार्यक्रम को 15 करोड़ डॉलर की आवश्यकता है। पर्याप्त धनराशि के अभाव में, यूएन एजेंसी को अपनी प्राथमिकताएँ तय करनी होंगी, जिससे बड़ी संख्या में लोग सहायता के दायरे से दूर हो सकते हैं। विशेष रूप से वे भूकम्प-प्रभावित समुदाय, जो अपनी आजीविका को फिर से शुरू करने की कोशिशों में जुटे हैं और मानवीय सहायता पर अपनी निर्भरता घटाना चाहते हैं, वे सबसे अधिक प्रभावित होंगे।

म्याँमार में गहराता यह भूख संकट, वैश्विक घटनाओं और स्थानीय आपदाओं का एक जटिल परिणाम है। यदि समय रहते पर्याप्त अंतरराष्ट्रीय सहायता और समर्थन नहीं मिला, तो लाखों लोगों के लिए स्थिति और भी विकट हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी संगठन लगातार इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि म्याँमार के लोगों को इस कठिन समय में अकेला नहीं छोड़ा जा सकता, और उनके पुनर्निर्माण व खाद्य सुरक्षा के प्रयासों को निरंतर समर्थन की आवश्यकता है।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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