पश्चिम एशिया संकट: ऊर्जा के बाद अब खाद की कमी से वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर मंडराया बड़ा खतरा

पश्चिम एशिया संकट के कारण खाद आपूर्ति में बाधा और वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर मंडराता खतरा

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है। अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर कथित हमले के लगभग 20 दिन बाद, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से पहले ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई, और अब खाद (फर्टिलाइजर) की कमी से वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर एक बड़ा संकट मंडरा रहा है। यह स्थिति दुनिया भर में खाद्य उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है, जिससे करोड़ों लोगों के लिए अनाज की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

पश्चिम एशिया संकट: ऊर्जा से खाद तक, आपूर्ति श्रृंखला पर गहराता असर

पश्चिमी एशिया में उत्पन्न तनाव ने न केवल तेल की कीमतों में उछाल ला दिया है, बल्कि अब यह कृषि क्षेत्र की रीढ़ मानी जाने वाली खाद की आपूर्ति को भी बाधित कर रहा है। 2 मार्च को ईरान के आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ के वरिष्ठ सलाहकार इब्राहिम जबारी द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा के बाद वैश्विक तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थीं। यह जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, और यहां किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ता है।

खाड़ी देशों से वैश्विक स्तर पर निर्यात होने वाले यूरिया और अन्य खाद की आपूर्ति में आई रुकावट एक गंभीर चिंता का विषय है। आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के कुल व्यापारिक यूरिया का लगभग आधा हिस्सा इसी क्षेत्र से होर्मुज मार्ग के माध्यम से निर्यात होता है। संघर्ष के कारण गैस आपूर्ति और शिपिंग में आई बाधा ने खाड़ी क्षेत्र और अन्य जगहों पर कई खाद संयंत्रों को अपना उत्पादन घटाने या पूरी तरह बंद करने पर मजबूर कर दिया है।

उत्पादन पर पड़ा असर और बुवाई का मौसम

कतर एनर्जी ने भी दुनिया के सबसे बड़े यूरिया प्लांट का उत्पादन रोक दिया है, जिसके परिणामस्वरूप भारत सहित कई देशों को अपने यूरिया संयंत्रों का उत्पादन कम करना पड़ा है। भारत में तीन यूरिया संयंत्रों पर इसका सीधा असर पड़ा है। यह संकट ऐसे समय में आया है जब उत्तरी गोलार्ध में बुवाई का महत्वपूर्ण मौसम (मध्य फरवरी से मई) चल रहा है। व्यावसायिक खेती में अच्छी पैदावार सुनिश्चित करने के लिए खाद एक अनिवार्य घटक है, और इसकी कमी से फसल उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना तय है।

एशियाई देश खाड़ी क्षेत्र से आने वाली खाद पर सबसे अधिक निर्भर हैं। एशिया को खाड़ी से 35% यूरिया, 53% सल्फर और 64% अमोनिया निर्यात होता है। भारत, ब्राजील और चीन जैसे बड़े कृषि उत्पादक देश इस आपूर्ति पर विशेष रूप से निर्भर करते हैं, और वे इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में से हैं। खाद की कमी से इन देशों की खाद्य सुरक्षा और कृषि अर्थव्यवस्था पर गंभीर दबाव पड़ सकता है।

आगे की राह और संभावित चुनौतियाँ

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता का यह नया आयाम दुनिया भर में खाद्य कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति में कमी का कारण बन सकता है। खाद की कमी के कारण फसल की पैदावार कम होने से वैश्विक स्तर पर अनाज की उपलब्धता प्रभावित होगी, जिससे विशेष रूप से विकासशील देशों में भूखमरी और कुपोषण का खतरा बढ़ सकता है। यह संकट केवल किसानों और कृषि उद्योग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की थाली पर भी पड़ेगा। सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को इस उभरते खतरे को गंभीरता से लेना होगा और वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखलाओं की तलाश के साथ-साथ कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से पश्चिम एशिया में स्थिरता बहाल करने की दिशा में काम करना होगा।

यह स्थिति बताती है कि कैसे एक क्षेत्रीय संघर्ष के दूरगामी परिणाम वैश्विक स्तर पर महसूस किए जा सकते हैं, और कैसे ऊर्जा सुरक्षा के बाद अब खाद्य सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। यदि यह गतिरोध जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में दुनिया को एक गंभीर खाद्य संकट का सामना करना पड़ सकता है, जिसके सामाजिक और आर्थिक परिणाम व्यापक होंगे।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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