सरकारी नीतियों से टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग में 72% का उछाल, BSNL भी पटरी पर: एक विस्तृत विश्लेषण

भारत की टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग में PLI स्कीम और सरकारी नीतियों से उत्पादन और निर्यात में वृद्धि

भारत ने टेलीकॉम उपकरणों और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वैश्विक मंच पर अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है, और इसका श्रेय काफी हद तक सरकार की दूरदर्शी नीतियों को जाता है। विशेष रूप से, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम ने देश में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है, जिससे भारत आयात पर निर्भर रहने वाले देश से एक बड़े निर्यातक के रूप में उभरा है। इस क्रांतिकारी बदलाव का असर हाल ही में मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 जैसे वैश्विक मंचों पर भी दिखा, जहाँ 'भारत पवेलियन' ने देश की 5G, 6G, AI और ओपन RAN जैसी तकनीकों में बढ़ती ताकत और नवाचार क्षमता का प्रदर्शन किया। यह न केवल देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है, जो लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर और डिजिटल कनेक्टिविटी को सशक्त कर रहा है।

सरकारी नीतियों से टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग में क्रांति: एक्सपोर्ट में बंपर उछाल

भारत सरकार द्वारा टेलीकॉम और नेटवर्किंग प्रोडक्ट्स के लिए शुरू की गई ₹12,195 करोड़ की PLI स्कीम ने घरेलू उत्पादन और निवेश को अभूतपूर्व बढ़ावा दिया है। इस योजना के तहत स्वीकृत लाभार्थियों से हजारों करोड़ के निवेश की उम्मीद है, जिसका सीधा लक्ष्य आने वाले वर्षों में उत्पादन और निर्यात को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। दिसंबर 2025 तक, PLI स्कीम ने विभिन्न सेक्टर्स में ₹2.16 लाख करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित किया है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग सबसे आगे रही।

इस नीतिगत समर्थन का परिणाम टेलीकॉम सेक्टर की सेल्स ग्रोथ और निर्यात में जबरदस्त उछाल के रूप में सामने आया है। भारत के टेलीकॉम निर्यात में पिछले कुछ वर्षों में 72% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़ा 2020-21 के ₹10,000 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹18,406 करोड़ (लगभग US$ 2.03 बिलियन) तक पहुंच गया है। इस प्रगति ने भारत को GPON ONTs जैसे महत्वपूर्ण ब्रॉडबैंड इक्विपमेंट्स में लगभग आत्मनिर्भर बना दिया है, जो डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने के लिए आवश्यक हैं।

BSNL का शानदार कमबैक: वित्तीय सेहत और सब्सक्राइबर बेस में सुधार

इन सकारात्मक घटनाक्रमों के बीच, सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL ने भी पिछले साल लागू किए गए सुधारों के बाद अपनी वित्तीय सेहत में बड़ी मजबूती दिखाई है। कंपनी का EBITDA (ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की कमाई) पिछले साल के लगभग ₹2,300 करोड़ से बढ़कर FY25 में ₹5,200 करोड़ के पार पहुंच गया है, और यह वृद्धि आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। BSNL के सब्सक्राइबर बेस में भी इजाफा हुआ है, जो 8.5 करोड़ से बढ़कर 9.27 करोड़ हो गया है।

कंपनी ने ₹25,000 करोड़ के करीब का अब तक का सबसे बड़ा कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) किया है, जिसका मुख्य उपयोग 4G नेटवर्क के विस्तार में किया जा रहा है। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि BSNL ने पिछले 18 सालों में पहली बार लगातार कुछ तिमाहियों में लाभ दर्ज किया है, जो इसके पुनरुद्धार का एक बड़ा संकेत है और यह दर्शाता है कि सरकारी समर्थन और रणनीतिक निवेश से सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को भी पटरी पर लाया जा सकता है।

भविष्य की राह और वैश्विक चुनौतियाँ

जहां भारत में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग और BSNL के प्रदर्शन में शानदार तेजी देखने को मिली है, वहीं वैश्विक टेलीकॉम उपकरण बाजार, जिसका आकार 2024 में लगभग USD 757.55 बिलियन था, अपनी चुनौतियों से जूझ रहा है। 5G नेटवर्क के विस्तार और हाई-स्पीड डेटा की बढ़ती मांग से यह बाजार संचालित होता है, लेकिन एरिक्सन (Ericsson) और नोकिया (Nokia) जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियों को 2023 में राजस्व में गिरावट का सामना करना पड़ा। भारत जहां घरेलू बाजार में तेजी दिखा रहा है, वहीं दुनिया भर के ऑपरेटर्स मूल्य निर्धारण दबाव और ARPU (प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व) में स्थिरता जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। वैश्विक टेलीकॉम उद्योग का राजस्व धीरे-धीरे बढ़ रहा है, लेकिन CAPEX (पूंजीगत व्यय) की तीव्रता लगभग 18% बनी हुई है, और AI का बढ़ता इस्तेमाल नेटवर्क परफॉर्मेंस और नए बिजनेस मॉडल्स को आकार दे रहा है।

इन सकारात्मक संकेतों के बावजूद, भारतीय टेलीकॉम सेक्टर के सामने कुछ बड़े सवाल बने हुए हैं। BSNL का टर्नअराउंड काफी हद तक सरकारी निवेश पर निर्भर है। निजी कंपनियों जैसे Jio और Airtel, जिनके पास भारी निजी निवेश है, के मुकाबले BSNL की सीधी प्रतिस्पर्धा अभी भी एक बड़ी चुनौती है। इसके अलावा, वैश्विक दिग्गजों जैसे Huawei, Ericsson, Nokia की तुलना में भारत की अपनी R&D और इनोवेशन क्षमता कितनी मजबूत है, इसकी जांच जरूरी है। सरकारी प्रोत्साहन (जैसे PLI स्कीम) से उत्पादन तो बढ़ा है, लेकिन सब्सिडियों के बिना ऑर्गेनिक मार्केट में इनकी प्रतिस्पर्धात्मकता और लाभप्रदता पर सवाल बने हुए हैं।

भारत के टेलीकॉम सेक्टर ने सरकारी नीतियों और रणनीतिक निवेश के दम पर एक नया अध्याय लिखा है, जिससे घरेलू उत्पादन और निर्यात में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, और BSNL जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भी पुनरुद्धार की राह पर है। आगे चलकर, भारतीय टेलीकॉम सेक्टर की तरक्की 5G, ग्रामीण कनेक्टिविटी और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग पर निर्भर करेगी। यह देखना अहम होगा कि क्या भारतीय कंपनियां नीतिगत समर्थन के बिना भी वैश्विक लीडर्स को टक्कर दे पाती हैं और इस गति को बनाए रख पाती हैं।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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