बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में '2026 हरित विकास सम्मेलन' (Green Growth Summit 2026) को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ़्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) के कार्यकारी सचिव साइमन स्टील ने एक महत्वपूर्ण बात पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक संघर्षों के कारण ऊर्जा बाज़ार में आई अस्थिरता ने एक बार फिर नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन, जल इत्यादि) के रणनीतिक महत्व को स्पष्ट कर दिया है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर के देश ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंतित हैं, और यह आम नागरिकों के लिए ऊर्जा बिल और जीवन-यापन की लागत से सीधे जुड़ा हुआ है.
साइमन स्टील ने यूरोपीय देशों के जलवायु और पर्यावरण मंत्रियों, व्यवसायियों, निवेशकों और अन्य प्रमुख हितधारकों को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त होने वाली नवीकरणीय ऊर्जा में "हालात बदलने की क्षमता है." उन्होंने स्पष्ट किया कि सूर्य की रोशनी या हवा किसी संकरे समुद्री मार्ग पर निर्भर नहीं करती, न ही उन्हें महंगी नौसैनिक सुरक्षा की आवश्यकता होती है. यह स्वतंत्रता नवीकरणीय ऊर्जा को देशों के लिए वैश्विक उथल-पुथल से बचने और शक्ति की राजनीति से एक अलग रास्ता अपनाने में मदद करने का एक शक्तिशाली साधन बनाती है.
UNFCCC प्रमुख ने रेखांकित किया कि नवीकरणीय ऊर्जा यूरोप के लोगों की कई प्रमुख आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक है. यह ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाती है, अच्छे रोज़गार के अवसर पैदा करती है, सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार लाती है और जीवन-यापन की बढ़ती लागत से राहत प्रदान कर सकती है. ये सभी कारक किसी भी देश के नागरिकों के लिए सीधे तौर पर महत्वपूर्ण हैं, जो उन्हें अधिक स्थिर और स्वस्थ भविष्य की ओर ले जाते हैं.
जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता: एक दोहराता संकट
साइमन स्टील ने गंभीर चेतावनी देते हुए कहा कि "जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता को कमज़ोर कर रही है." उन्होंने बताया कि इसकी जगह बढ़ती लागत और अत्यधिक बाहरी निर्भरता ले रही है, जिससे राष्ट्र भू-राजनीतिक दबावों के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि मतदाता जिस बड़े बदलाव की मांग कर रहे हैं, जलवायु कार्रवाई उसे बड़े पैमाने पर पूरा कर सकती है. नवीकरणीय ऊर्जा और सहनसक्षम ढाँचा ऊर्जा बिलों को कम रखने में मदद करते हैं और कहीं अधिक रोज़गार पैदा करते हैं, जो आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है.
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जलवायु प्रमुख ने यह भी बताया कि जीवाश्म ईंधन से होने वाले प्रदूषण को कम करने से वायु साफ़ होती है, जिससे स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार आता है. यह हैरानी की बात है कि जीवाश्म ईंधन संकट के जवाब में कुछ लोग उसी समस्या को और बढ़ाने की वकालत कर रहे हैं, नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ते बदलाव को धीमा करना चाहते हैं, जबकि यह स्पष्ट है कि नवीकरणीय ऊर्जा अधिक सस्ती, अधिक सुरक्षित और तेज़ी से उपलब्ध हो सकती है. साइमन स्टील ने इसे "केवल एक भ्रम" बताया, क्योंकि इतिहास गवाह है कि जीवाश्म ईंधन से जुड़ा संकट बार-बार लौटता है. उन्होंने कहा कि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता का अर्थ है कि अर्थव्यवस्थाएँ, घरों के बजट और कारोबार, "एक अस्थिर दुनिया में भू-राजनीतिक झटकों और क़ीमतों के उतार-चढ़ाव के मोहताज रहेंगे."
नवीकरणीय ऊर्जा: सुरक्षा और समृद्धि का आधार
ब्रसेल्स में मंत्रियों के लिए साइमन स्टील का संदेश बिल्कुल साफ़ था: यदि यूरोपीय देश जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भर बने रहे, तो वे एक संकट से दूसरे संकट की ओर झूलते रहेंगे, और इसकी क़ीमत घरों व उद्योगों को चुकानी पड़ेगी. उन्होंने बताया कि यूरोपीय संघ दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भर क्षेत्रों में से एक है, जिसने वर्ष 2024 में इसके आयात पर 420 अरब यूरो से अधिक ख़र्च किए थे. यह आंकड़ा ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा में तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता को दर्शाता है.
हालांकि, अवसर भी "असीम" हैं. साइमन स्टील ने बताया कि वर्ष 2025 में नवीकरणीय ऊर्जा ने कोयले को पीछे छोड़ते हुए दुनिया के सबसे बड़े बिजली स्रोत का स्थान हासिल कर लिया. इसके साथ ही, स्वच्छ ऊर्जा में 2 हज़ार अरब डॉलर से अधिक का निवेश हुआ, जोकि जीवाश्म ईंधन में हुए निवेश का दोगुना था. उन्होंने कहा, "इस क्षेत्र में अवसर बेहद व्यापक हैं." जलवायु कार्रवाई और महत्वाकांक्षा में अग्रणी होने के नाते, यूरोप के प्रयास, संसाधन निवेश और नवाचारी समाधानों को गति दे रहे हैं, और स्थानीय कंपनियाँ, स्वच्छ उद्योगों व हरित विकास में अग्रिम पंक्ति में हैं.
उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि हरित विकास को अपनाकर यूरोपीय देश, हज़ारों अरब यूरो के उन निवेश अवसरों का स्थायी लाभ उठा सकते हैं, जिनकी शुरुआत अभी हुई है. इसके लिए शिक्षा, मज़बूत संस्थाओं, कुशल नियमन, सामाजिक न्याय, नवाचार एवं बौद्धिक संपदा समेत अन्य मोर्चों पर सक्रियता दर्शानी होगी, साथ ही ठोस योजनाओं और नीतियों का समर्थन भी ज़रूरी होगा. साइमन स्टील ने याद दिलाया कि पिछली सदी में, जब युद्ध से जूझ रहा यूरोप एकजुट होकर सहयोग की नींव रख रहा था, तब ऊर्जा उसकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर थी. देशों ने समझ लिया था कि सहयोग के ज़रिये सुरक्षित और सस्ती ऊर्जा आपूर्ति ही शांति व समृद्धि का आधार बन सकती है. आज ये सच पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं, जो नवीकरणीय ऊर्जा को न केवल पर्यावरणीय बल्कि भू-रणनीतिक अनिवार्यता भी बनाते हैं.
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