देश में जासूसी नेटवर्क का बड़ा खुलासा: 53 खातों में विदेशी फंडिंग, NIA करेगी जांच

भारत में जासूसी नेटवर्क, विदेशी फंडिंग और एनआईए की जांच

गाजियाबाद: देश में एक बड़े जासूसी नेटवर्क (Spy Network) का पर्दाफाश हुआ है, जिसके तार पाकिस्तान, यूके, मलेशिया और सऊदी अरब तक फैले हुए हैं। इस मामले में अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जांच अपने हाथों में ले ली है। गाजियाबाद के कौशांबी से पकड़े गए आईएसआई (ISI) से जुड़े 21 जासूसों की करतूतों की जांच के दौरान 53 बैंक खातों में 1.27 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग (Foreign Funding) का बड़ा खुलासा हुआ है, जिसके बाद प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एनआईए ने यह फैसला किया है। यह घटना भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) के लिए एक गंभीर चुनौती पेश करती है और सीमा पार जासूसी (Cross-border Espionage) के बढ़ते खतरे को उजागर करती है।

देश में जासूसी नेटवर्क: 53 खातों में विदेशी फंडिंग का खुलासा और NIA की एंट्री

मामले की शुरुआत कौशांबी थाने में दर्ज एक प्राथमिकी (FIR) से हुई थी, जिसकी जांच पहले एसआईटी (SIT) के साथ एनआईए, आईबी (IB) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त रूप से की थी। एसआईटी की जांच में सामने आया कि जासूसी नेटवर्क से जुड़े आरोपियों के लिए कुल 53 बैंक खातों में विदेश से पैसा आया था। इन खातों में 1.27 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग का पता चला है। यह राशि पंजाब, पश्चिम बंगाल और बिहार के विभिन्न खातों में भेजी गई थी, जिसमें सबसे अधिक रकम बिहार के भागलपुर पते पर मिले बैंक खाते में जमा की गई थी। देशविरोधी गतिविधियों की गहनता को देखते हुए, अब इस पूरे प्रकरण की जांच एनआईए स्वतंत्र रूप से करेगी। एजेंसी ने डीसीपी सिटी को पत्राचार कर केस ट्रांसफर करने के लिए कहा है।

विदेशी फंडिंग का जाल: पंजाब, बिहार और पश्चिम बंगाल तक फैले खाते

खुलासे के अनुसार, इस जासूसी नेटवर्क के लिए धन विदेश से आ रहा था और इसे भारतीय खातों में वितरित किया जा रहा था। एसआईटी जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि विदेशी फंडिंग का यह जाल कई राज्यों में फैला हुआ है, जिससे इस नेटवर्क की व्यापकता का पता चलता है। यह दर्शाता है कि दुश्मन देश भारतीय नागरिकों का उपयोग करके देश के भीतर एक मजबूत वित्तीय और सूचना नेटवर्क स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे।

जासूसी नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय तार और संवेदनशील जानकारी की रिकॉर्डिंग

जांच में इस जासूसी नेटवर्क के तार पाकिस्तान, यूके (UK), मलेशिया (Malaysia) और सऊदी अरब (Saudi Arabia) तक जुड़े मिले हैं, जो इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रकृति को पुष्ट करता है। यह केवल एक स्थानीय मामला नहीं, बल्कि एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है। इस नेटवर्क ने भारत की संवेदनशील जानकारी जुटाने का प्रयास किया था।

आठ घंटे की रिकॉर्डिंग और बड़ी साजिश की तैयारी

जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सोनीपत रेलवे स्टेशन पर लगे एक कैमरे के जरिए ट्रेनों के संचालन की करीब आठ घंटे की वीडियो रिकॉर्डिंग पड़ोसी देशों में भेजी गई थी। विशेषज्ञों की जांच में इसकी पुष्टि होने के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह नेटवर्क करीब दो साल से सक्रिय था। पाकिस्तान में बैठा मुख्य सरगना सरफराज भारत में जासूसों का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा कर रहा था, जिसका उद्देश्य संवेदनशील स्थानों की जानकारी जुटाकर भविष्य में बड़ी साजिश को अंजाम देना था। आरोपियों के मोबाइल फोन से कई संदिग्ध चैट (Chat), फोटो और वीडियो भी बरामद हुए हैं।

गिरफ्तारियां और सोशल मीडिया के जरिए भर्ती

इस मामले में गाजियाबाद और हापुड़ से अब तक कुल 29 संदिग्धों को पकड़ा जा चुका है, जिनमें छह नाबालिग भी शामिल हैं। बीती 14 मार्च को सुहैल मलिक और साने इरम समेत आधा दर्जन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इस जासूसी नेटवर्क का खुलासा हुआ था। इसके बाद 20 व 21 मार्च को कई और संदिग्धों को पकड़ा गया, और एसआईटी ने 24 मार्च को दिल्ली, शामली व कौशांबी से तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया है कि गिरोह के मुख्य सदस्य समीर उर्फ शूटर ने वर्ष 2023 में हथियारों के साथ अपने फोटो और वीडियो सोशल मीडिया (Social Media) पर अपलोड किए थे। इन्हीं पोस्ट को देखकर सुहैल मलिक और नौशाद अली ने उससे संपर्क किया। उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप (WhatsApp Group) में जोड़कर पाकिस्तान में बैठे सरफराज के निर्देश पर अलग-अलग टास्क दिए जाने लगे। यह दिखाता है कि कैसे सोशल मीडिया का दुरुपयोग युवाओं को देशविरोधी गतिविधियों में शामिल करने के लिए किया जा रहा है।

यह घटना देश की आंतरिक सुरक्षा (Internal Security) के लिए एक गंभीर चेतावनी है। विदेशी फंडिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं की भर्ती का तरीका दिखाता है कि दुश्मन ताकतें किस तरह से भारतीय समाज में घुसपैठ कर रही हैं। एनआईए द्वारा इस मामले की जांच अपने हाथ में लेना एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह एजेंसी अंतरराष्ट्रीय और जटिल मामलों को सुलझाने में विशेषज्ञता रखती है। इस जांच से न केवल इस विशेष नेटवर्क का पर्दाफाश होगा, बल्कि भविष्य में ऐसे प्रयासों को रोकने के लिए आवश्यक रणनीतियों को भी विकसित करने में मदद मिलेगी। इस प्रकरण में शामिल नाबालिगों की उपस्थिति चिंताजनक है, जो युवाओं को कट्टरता और जासूसी के जाल में फंसाने की साजिशों को उजागर करती है। आगे की जांच में इस नेटवर्क के सभी छिपे हुए पहलुओं को सामने लाने और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने की उम्मीद है।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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