FSSAI का अश्वगंधा पर बड़ा फैसला: अब सिर्फ जड़ का होगा इस्तेमाल, पत्तियां बैन – जानें आपके लिए क्या बदलेगा

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भारत में स्वास्थ्य सप्लीमेंट्स (Health Supplements) और न्यूट्रास्यूटिकल्स (Nutraceuticals) के बाजार में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने अश्वगंधा (Ashwagandha) के इस्तेमाल को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। इन नए नियमों के तहत, अश्वगंधा का उपयोग केवल उसकी जड़ (Root) और उसके एक्सट्रैक्ट (Extract) तक ही सीमित रखा जाएगा, जबकि इसकी पत्तियों (Leaves) का इस्तेमाल पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह फैसला उन आम उपभोक्ताओं और दवा निर्माताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जो इस लोकप्रिय आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी का सेवन या उत्पादन करते हैं।

FSSAI का सख्त निर्देश: अश्वगंधा की पत्तियों पर पूर्ण प्रतिबंध

न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) के हवाले से एफएसएसएआई (FSSAI) ने स्पष्ट किया है कि अश्वगंधा का उपयोग हेल्थ सप्लीमेंट्स, न्यूट्रास्यूटिकल्स और विशेष डाइट वाले फूड प्रोडक्ट्स (Food Products) में किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए केवल जड़ ही मान्य होगी। हाल ही में यह सामने आया था कि कुछ कंपनियां इन उत्पादों में अश्वगंधा की पत्तियों और उनके एक्सट्रैक्ट का भी इस्तेमाल कर रही थीं, जो निर्धारित नियमों का उल्लंघन था। रेगुलेटर (Regulator) ने साफ शब्दों में कहा है कि अश्वगंधा की पत्तियों का किसी भी रूप में—चाहे वह कच्चा हो या एक्सट्रैक्ट—इस्तेमाल करना अनुमति के दायरे में नहीं आता।

यह सख्ती केवल एफएसएसएआई तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आयुष मंत्रालय (Ayush Ministry) ने भी दवा और उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को यही निर्देश दिए हैं कि वे केवल अश्वगंधा की जड़ का ही उपयोग करें। इस निर्णय के बाद, सभी राज्यों के फूड सेफ्टी कमिश्नरों (Food Safety Commissioners) और अधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया है। उन्हें सख्त निगरानी रखने और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के आदेश दिए गए हैं, ताकि बाजार में बिकने वाले उत्पादों की गुणवत्ता में कोई समझौता न हो। यदि किसी उत्पाद में अश्वगंधा की पत्तियों का इस्तेमाल पाया गया, तो उस पर कड़ी कार्रवाई तय है।

क्या है अश्वगंधा और क्यों है यह इतना खास?

अश्वगंधा (Ashwagandha), जिसका वैज्ञानिक नाम विथानिया सोम्नीफेरा (Withania somnifera) है, आयुर्वेद (Ayurveda) की सबसे शक्तिशाली और प्रसिद्ध जड़ी-बूटियों में से एक है। इसे 'एडेप्टोजेन' (Adaptogen) की श्रेणी में रखा जाता है, जिसका अर्थ है कि यह शरीर को तनाव (Stress) से लड़ने और संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। 'अश्वगंधा' शब्द संस्कृत के दो शब्दों—अश्व (घोड़ा) और गंध (महक)—से बना है। इसकी जड़ों से घोड़े के पसीने जैसी गंध आती है, और पारंपरिक रूप से माना जाता है कि इसका सेवन करने से व्यक्ति को घोड़े जैसी ताकत मिलती है। यह एक छोटा झाड़ीदार पौधा होता है, जिसमें पीले फूल और लाल फल लगते हैं। आयुर्वेद में मुख्य रूप से इसकी जड़ों का इस्तेमाल चूर्ण या अर्क (Extract) के रूप में किया जाता है।

अश्वगंधा के चमत्कारी औषधीय गुण

इसके उपयोग के पीछे कई वैज्ञानिक और पारंपरिक कारण हैं:

  • तनाव और चिंता कम करना: क्लिनिकल रिसर्च (Clinical Research) दर्शाते हैं कि अश्वगंधा शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol), जो एक स्ट्रेस हार्मोन है, के स्तर को कम करता है, जिससे दिमाग शांत रहता है।
  • शारीरिक शक्ति और मांसपेशियों की वृद्धि: एथलीट (Athletes) और जिम जाने वाले लोग मांसपेशियों की ताकत और स्टेमिना (Stamina) बढ़ाने के लिए इसका उपयोग करते हैं।
  • नींद की गुणवत्ता: इसके नाम 'सोम्नीफेरा' का अर्थ ही है "नींद लाने वाला"। यह अनिद्रा (Insomnia) की समस्या को दूर कर गहरी नींद लाने में सहायक है।
  • पुरुष स्वास्थ्य: यह टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) के स्तर को बढ़ाकर प्रजनन क्षमता (Fertility) और स्पर्म काउंट (Sperm Count) में सुधार के लिए जाना जाता है।
  • ब्लड शुगर कंट्रोल: कुछ शोध बताते हैं कि यह इंसुलिन संवेदनशीलता (Insulin Sensitivity) को बढ़ाकर डायबिटीज (Diabetes) के लिए फायदेमंद हो सकता है।

हालांकि, इसके इस्तेमाल से पहले किसी विशेषज्ञ, डॉक्टर या फिजिशियन की सलाह लेना हमेशा महत्वपूर्ण है।

एफएसएसएआई और आयुष मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ये नए निर्देश उपभोक्ता सुरक्षा (Consumer Safety) और उत्पाद की गुणवत्ता (Product Quality) सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। यह दर्शाता है कि नियामक संस्थाएं (Regulatory Bodies) स्वास्थ्य सप्लीमेंट्स के बाजार पर कड़ी नजर रख रही हैं ताकि उपभोक्ताओं को केवल प्रमाणित और सुरक्षित उत्पाद ही मिलें। इससे न केवल अश्वगंधा आधारित उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ेगी, बल्कि यह पूरे आयुर्वेदिक और न्यूट्रास्यूटिकल उद्योग में पारदर्शिता लाने में भी मदद करेगा। यह कदम उन कंपनियों के लिए एक चेतावनी है जो नियमों का पालन नहीं करती हैं और साथ ही उन उपभोक्ताओं के लिए एक राहत है जो गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की तलाश में हैं।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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