Global Food Crisis 2026: दुनिया की दो-तिहाई भूख अब केवल इन 10 युद्धग्रस्त देशों में, UN ने जारी की चेतावनी

Global food crisis in 10 war torn countries UN report

दुनिया की दो-तिहाई भूख: 10 युद्धग्रस्त देशों में सिमटता भीषण खाद्य संकट, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

दुनिया भर में भुखमरी और पोषण के मोर्चे पर हालात भयावह होते जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की नवीनतम 'खाद्य संकट पर वैश्विक रिपोर्ट 2026' (Global Report on Food Crises 2026) के अनुसार, दुनिया की दो-तिहाई भूख अब केवल 10 युद्धग्रस्त देशों में केंद्रित होकर रह गई है। रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि साल 2025 के दौरान 47 देशों के करीब 26.6 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा (Severe Food Insecurity) की चपेट में थे। यह आंकड़ा न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि पिछले एक दशक की तुलना में लगभग दोगुना हो गया है, जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

युद्ध और संघर्ष: भुखमरी का सबसे बड़ा कारण

इस रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि वर्तमान में भूख का सबसे बड़ा कारण प्राकृतिक आपदाएं नहीं, बल्कि मानव निर्मित युद्ध और संघर्ष (Conflict and War) हैं। खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के महानिदेशक क्यू डोंग्यू ने चेतावनी दी है कि खाद्य असुरक्षा की यह स्थिति अब केवल एक अस्थायी समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह निरंतर और बार-बार होने वाली एक गंभीर चुनौती बन गई है। आंकड़ों के अनुसार, भुखमरी का सामना कर रहे कुल लोगों में से आधे से अधिक हिस्से के लिए सीधे तौर पर युद्ध और टकराव जिम्मेदार हैं।

दुनिया की कुल खाद्य असुरक्षित आबादी का दो-तिहाई हिस्सा अब इन 10 देशों में केंद्रित है: एशिया और मध्य पूर्व में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार, पाकिस्तान, सीरिया, यमन और गाजा। वहीं अफ्रीका में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC), नाइजीरिया, दक्षिण सूडान और सूडान सबसे अधिक प्रभावित हैं। विशेष रूप से, 2025 का साल इतिहास में इसलिए दर्ज हुआ क्योंकि रिपोर्ट में एक ही वर्ष के भीतर दो अलग-अलग क्षेत्रों—गाजा और सूडान के कुछ हिस्सों में अकाल (Famine) दर्ज किया गया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इसे युद्धों को समाप्त करने के लिए एक वैश्विक 'कार्रवाई की पुकार' (Call to Action) बताया है।

बच्चों और विस्थापितों पर विनाशकारी प्रभाव

संकटग्रस्त क्षेत्रों में न केवल भोजन की कमी है, बल्कि बीमारियों का फैलाव और बुनियादी सेवाओं तक पहुंच का अभाव स्थिति को और अधिक जानलेवा बना रहा है। इस संकट का सबसे मानवीय और हृदयविदारक प्रभाव बच्चों और विस्थापितों (Displaced People) पर देखा जा रहा है। 2025 में लगभग 3.55 करोड़ बच्चे तीव्र कुपोषण (Acute Malnutrition) का शिकार हुए। इनमें से 1 करोड़ बच्चे 'सीवियर वेस्टिंग' (Severe Wasting) की स्थिति में पहुंच गए हैं। यह एक ऐसी घातक स्थिति है जहां बच्चे का शरीर इतना कमजोर हो जाता है कि उसका प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) सामान्य बीमारियों से लड़ने में भी अक्षम हो जाता है।

यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के उच्चायुक्त बरहम सलीह ने स्पष्ट किया है कि जबरन विस्थापन और खाद्य असुरक्षा आपस में एक दुष्चक्र (Vicious Cycle) की तरह जुड़े हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य संकट वाले क्षेत्रों में करीब 8.5 करोड़ लोग विस्थापित हुए हैं, जिनमें शरणार्थियों को स्थानीय लोगों की तुलना में कहीं अधिक भूख का सामना करना पड़ रहा है।

संरचनात्मक संकट और 2026 के लिए चिंताजनक अनुमान

विशेषज्ञों का विश्लेषण है कि भूख अब एक 'संरचनात्मक' (Structural) वैश्विक चुनौती बन चुकी है। विडंबना यह है कि 2016 के बाद से विनाशकारी भूख में नौ गुना की वृद्धि हुई है, लेकिन इसके विपरीत मानवीय सहायता के लिए मिलने वाले धन (Funding) में भारी कटौती हुई है। यह सहायता पिछले एक दशक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। इसके अलावा, कई देशों द्वारा डेटा उपलब्ध न कराए जाने के कारण वास्तविक संकट रिपोर्ट किए गए आंकड़ों से कहीं अधिक बड़ा हो सकता है।

आने वाले साल यानी 2026 के लिए भी आसार अच्छे नहीं दिखाई दे रहे हैं। जलवायु झटके (Climate Shocks) और मध्य पूर्व में बाजार की उथल-पुथल के कारण खाद्य कीमतों के उच्च स्तर पर बने रहने की आशंका है। एफएओ ने जोर दिया है कि अब केवल आपातकालीन सहायता से काम नहीं चलेगा, बल्कि स्थानीय खाद्य उत्पादन को बचाने और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करना होगा ताकि अस्थिरता के इस चक्र को तोड़ा जा सके। जब तक युद्ध और टकराव समाप्त नहीं होते, तब तक दुनिया के इन हिस्सों में भूख की जड़ें और गहरी होती रहेंगी।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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