अमेरिकी राजनीति के गलियारों में अब भविष्य के नेतृत्व और विदेश नीति को लेकर नई बहस छिड़ गई है। इसी क्रम में अमेरिका के पूर्व राजदूत और कद्दावर डेमोक्रेटिक नेता रेहम इमैनुएल (Rahm Emanuel) ने एक बड़ा बयान देकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। इमैनुएल ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि "अगर मैं राष्ट्रपति बना तो भारत से रिश्ते" (If I become President, relations with India) फिर से उसी ऊँचाई और मजबूती पर होंगे, जिसे ट्रंप प्रशासन के दौरान कथित तौर पर कमजोर किया गया था। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इमैनुएल को 2028 के राष्ट्रपति चुनाव के संभावित दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।
भारत-अमेरिका संबंधों पर ट्रंप की नीतियों की आलोचना
रेहम इमैनुएल ने एक हालिया साक्षात्कार के दौरान भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों (Bilateral Relations) पर विस्तार से बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने अपने सबसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारों में से एक, भारत को खुद से दूर धकेल दिया। इमैनुएल के अनुसार, पिछले 30 वर्षों का इतिहास गवाह है कि अमेरिका के हर राष्ट्रपति, चाहे वे किसी भी दल के रहे हों, उन्होंने भारत के साथ संबंधों को प्रगाढ़ बनाने की कोशिश की है। हालांकि, ट्रंप ने इस दशकों पुराने प्रयास और कूटनीतिक प्रगति को काफी नुकसान पहुँचाया है।
इमैनुएल का मानना है कि ट्रंप की भाषा और उनके काम करने के अनिश्चित तरीके ने न केवल भारत, बल्कि जापान और दक्षिण कोरिया जैसे अहम एशियाई सहयोगियों (Asian Allies) के मन में भी अमेरिका की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनके मुताबिक, ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' (America First) नीति ने कई मौकों पर सहयोगी देशों को असहज महसूस कराया है, जिससे वैश्विक मंच पर अमेरिका के रणनीतिक गठबंधनों की नींव कमजोर हुई है।
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पाकिस्तान के प्रति झुकाव और भारत की चिंताएं
इमैनुएल ने विशेष रूप से भारत-पाकिस्तान संबंधों और उसमें अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कई महत्वपूर्ण मौकों पर ट्रंप प्रशासन का झुकाव भारत के बजाय पाकिस्तान के पक्ष में अधिक नजर आया। उनके अनुसार, यह रवैया न केवल भारत के लिए चिंताजनक था, बल्कि अमेरिका की दीर्घकालिक विदेश नीति (Foreign Policy) के हितों के भी खिलाफ था। भारत के प्रति इस तरह के ठंडे रवैये ने नई दिल्ली के नीति निर्माताओं के बीच संशय की स्थिति पैदा की थी।
सैन्य तनाव के दौरान ट्रंप की बयानबाजी पर सवाल
पिछले वर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव (Military Tension) का जिक्र करते हुए इमैनुएल ने कहा कि उस समय ट्रंप की ओर से दिए गए बयान भारत के रुख से पूरी तरह मेल नहीं खाते थे। इससे भारतीय कूटनीतिक हलकों में काफी असहजता पैदा हुई थी। इमैनुएल ने जोर देकर कहा कि एक राष्ट्रपति के तौर पर उनकी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना होगी कि अमेरिका भारत की सुरक्षा चिंताओं और क्षेत्रीय संप्रभुता (Regional Sovereignty) का पूरा सम्मान करे और उसे उचित समर्थन दे।
भविष्य के संकेत और कूटनीतिक विश्लेषण
इमैनुएल का यह बयान केवल राजनीतिक विरोध का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह भविष्य के लिए एक विस्तृत ब्लूप्रिंट की तरह देखा जा रहा है। इलिनोइस से पूर्व प्रतिनिधि रह चुके इमैनुएल का अनुभव और उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा उन्हें 2028 की राष्ट्रपति पद की दौड़ (Presidential Race) में एक मजबूत उम्मीदवार बना सकती है। यदि वे इस दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो भारत के साथ मजबूत संबंध उनके चुनाव अभियान का एक प्रमुख आधार होंगे।
अल्पकालिक रूप से देखें तो इस तरह के बयानों से अमेरिका के भीतर भारत के महत्व पर फिर से ध्यान केंद्रित होता है। वहीं, दीर्घकालिक दृष्टिकोण से यह स्पष्ट होता है कि चीन की बढ़ती चुनौतियों के बीच अमेरिकी नेतृत्व के एक बड़े धड़े का मानना है कि भारत के बिना एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Region) में स्थिरता संभव नहीं है। भले ही चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन इमैनुएल के इन वादों ने नई दिल्ली को भविष्य की अमेरिकी नीतियों की एक झलक जरूर दिखा दी है।