भारत में रिकॉर्ड 1.43 लाख पेटेंट आवेदन: वैश्विक स्तर पर छठे स्थान पर पहुंचा देश

भारत में पेटेंट आवेदन में रिकॉर्ड वृद्धि, इनोवेशन और बौद्धिक संपदा का प्रतीक

नई दिल्ली: भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1.43 लाख से अधिक पेटेंट आवेदन (patent applications) दाखिल करके एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष (1.1 लाख) की तुलना में 30 प्रतिशत की महत्वपूर्ण वृद्धि दर्शाता है, जो देश में नवाचार (innovation) और बौद्धिक संपदा (intellectual property) के प्रति बढ़ते रुझान को उजागर करता है। इस उपलब्धि के साथ, भारत अब वैश्विक स्तर पर पेटेंट दाखिल करने वाले शीर्ष छह देशों में शामिल हो गया है। यह खबर न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि स्वदेशी नवाचार तेजी से फल-फूल रहे हैं।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री, पीयूष गोयल ने इस उल्लेखनीय वृद्धि का श्रेय सरकारी पहलों (government initiatives) और तमिलनाडु, कर्नाटक तथा महाराष्ट्र जैसे राज्यों के घरेलू इनोवेटर्स (domestic innovators) के अथक प्रयासों को दिया है। उन्होंने बताया कि दाखिल किए गए कुल आवेदनों में से लगभग 70 प्रतिशत देश के भीतर से आए हैं, जो भारत की आत्मनिर्भरता और अनुसंधान एवं विकास (Research and Development) क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक स्पष्ट प्रमाण है। यह वृद्धि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती तकनीकी और वैज्ञानिक prowess का भी संकेत है।

भारत में पेटेंट आवेदन में रिकॉर्ड उछाल: सरकार की भूमिका

सरकार द्वारा उठाए गए कदमों ने इस वृद्धि को गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्टार्टअप्स (startups), लघु संस्थाओं (small entities) और शैक्षणिक संस्थानों (academic institutions) के लिए कम शुल्क (lower fees) और त्वरित समीक्षा (expedited review) जैसी सहायता ने पेटेंट दाखिल करने की प्रक्रिया को अधिक सुलभ और आकर्षक बनाया है। इन नीतियों का प्रभाव 2016-17 से स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जब पेटेंट दाखिल करने की संख्या 45,444 थी, जो वर्तमान संख्या के आधे से भी कम थी। यह दर्शाता है कि लक्षित सरकारी प्रोत्साहन किस प्रकार नवाचार को बढ़ावा दे सकते हैं।

भारत का मजबूत पेटेंट सिस्टम, जो 1970 के पेटेंट अधिनियम (Patent Act, 1970) के तहत संचालित होता है, नवाचार को सुरक्षा और प्रोत्साहन प्रदान करने में सहायक रहा है। इस अधिनियम ने एक ऐसी रूपरेखा तैयार की है जो नवोन्मेषकों को अपने आविष्कारों का पेटेंट कराने और अपनी बौद्धिक संपदा का बचाव करने में मदद करती है, जिससे उन्हें अपने शोध और विकास में निवेश जारी रखने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।

पेटेंट आवेदनों की जांच प्रक्रिया में सुधार

पेटेंट अधिनियम, 1970 के तहत, पेटेंट आवेदन तभी स्वीकृत किए जाते हैं जब वे नवीनता (novelty), आविष्कारशील चरण (inventive step) और औद्योगिक उपयुक्तता (industrial applicability) की आवश्यकताओं का अनुपालन करते हों। यह सुनिश्चित करने के लिए एक सारगर्भित जांच (substantive examination) की जाती है। जांच प्रक्रिया एक 2-स्तरीय सिस्टम (two-tier system) का पालन करती है, जिसमें आवेदनों की प्रारंभिक जांच की जाती है और बाद में नियंत्रक (Controller) द्वारा उनकी समीक्षा की जाती है। यह अधिनियम पेटेंट दिए जाने से पहले और बाद में आपत्ति दर्ज करने का प्रावधान भी करता है, जो प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करता है।

यह रिकॉर्ड वृद्धि भारत को वैश्विक नवाचार मानचित्र (global innovation map) पर एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करती है। यह दर्शाता है कि देश की प्रतिभा और क्षमता को सही नीतियों और समर्थन के साथ कैसे गति दी जा सकती है। यह उपलब्धि न केवल तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देगी, बल्कि इससे नए रोजगार सृजन (job creation) और आर्थिक विकास (economic growth) को भी बल मिलेगा।

वित्त वर्ष 2025-26 में 1.43 लाख पेटेंट आवेदनों का दाखिल होना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह उपलब्धि सरकारी नीतियों, घरेलू प्रतिभा और एक मजबूत बौद्धिक संपदा ढांचे के सफल तालमेल का परिणाम है। भारत अब नवाचार के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में उभर रहा है, और यह प्रवृत्ति देश की अर्थव्यवस्था और तकनीकी भविष्य के लिए दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव डालेगी। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि यह गति बनी रहे और अधिक से अधिक नवोन्मेषक अपनी रचनात्मकता को साकार करने के लिए प्रेरित हों।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

एक टिप्पणी भेजें