अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपने 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) प्लेटफॉर्म पर 'पालंटिर टेक्नोलॉजीज' (Palantir Technologies) नामक कंपनी की जमकर तारीफ की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस सॉफ्टवेयर कंपनी ने युद्ध लड़ने में असाधारण क्षमता और उपकरण साबित किए हैं, जिसका प्रमाण दुश्मनों से पूछा जा सकता है। राष्ट्रपति का यह सीधा समर्थन एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, जो दर्शाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence - AI) अब केवल डिजिटल संचार तक सीमित नहीं, बल्कि ईरान युद्ध में AI ने अमेरिकी सैन्य ऑपरेशंस (military operations) के केंद्र में एक निर्णायक भूमिका निभाई है। यह शायद दुनिया का पहला बड़ा युद्ध है, जहां AI ने रीयल-टाइम (real-time) में सैन्य गतिविधियों को निर्देशित किया।
अमेरिकी सेना का 'असली दिमाग': Maven Smart System
ईरान के तेहरान पर बमबारी से पहले, पेंटागन (Pentagon) के निर्देश पर एक विशेष सॉफ्टवेयर ने हजारों सैटेलाइट (satellite) तस्वीरों और ड्रोन (drone) वीडियो को फ़िल्टर (filter) करके अमेरिकी कमांडरों (commanders) के लिए 1000 से अधिक हमले के विकल्प तैयार किए। जिन रणनीतिक फैसलों में मानवीय विश्लेषकों (human analysts) को कई दिन लग जाते, उन्हें इस AI ने कुछ ही मिनटों में पूरा कर दिया। हमलों को अंजाम तो इंसानों ने ही दिया, लेकिन बीच का सारा जटिल कार्य 'मावेन स्मार्ट सिस्टम' (Maven Smart System - MSS) ने किया। पालंटिर का यह सिस्टम 'एंथ्रोपिक' (Anthropic) कंपनी के 'क्लाउड' (Claude) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (platform) पर चलता है। वाशिंगटन पोस्ट (Washington Post) के अनुसार, क्लाउड का उपयोग पहले आतंकवाद विरोधी अभियानों (counter-terrorism operations) और वेनेजुएला (Venezuela) के राष्ट्रपति को अगवा करने में हुआ था, लेकिन "बड़े पैमाने के युद्ध ऑपरेशंस" में इसका यह पहला इस्तेमाल था। पिछले एक साल में, अमेरिकी सरकार ने मावेन और क्लाउड के इस संयोजन को इतना विकसित कर लिया है कि यह अब अमेरिकी सेना के ज्यादातर हिस्सों में रोज़ाना इस्तेमाल हो रहा है।
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मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिकी सैन्य ऑपरेशंस के प्रमुख रियर एडमिरल ब्रैड कूपर (Rear Admiral Brad Cooper) ने सार्वजनिक रूप से बताया है कि AI प्लेटफॉर्म अधिकारियों को भारी मात्रा में जानकारी को कुछ सेकंड में छानने में मदद करते हैं, जिससे वे "दुश्मन से तेज़ फैसले ले पाते हैं।" मावेन स्मार्ट सिस्टम एक कमांड-एंड-कंट्रोल (command-and-control) तकनीक है, जिसकी शुरुआत 2017 में पेंटागन के "स्कार्लेट ड्रैगन" (Scarlet Dragon) प्रोग्राम से हुई थी। इसका उद्देश्य सेना के सभी हिस्सों (थलसेना, नौसेना, वायुसेना और स्पेस फोर्स - Space Force) की खुफिया जानकारी को एक जगह जोड़कर एक शक्तिशाली AI नेटवर्क (network) बनाना था। व्यवहारिक रूप से, मावेन युद्धक्षेत्र में वाहनों, हथियारों या इमारतों को पहचानता, ट्रैक (track) करता और वर्गीकृत (categorize) करता है। यह लक्ष्य की पहचान करने में लगने वाले समय को कई घंटों से घटाकर एक मिनट से भी कम कर देता है। इसके अतिरिक्त, यह "प्रेडिक्टिव लॉजिस्टिक्स" (predictive logistics) में भी सहायता करता है, यानी कमांडरों को पहले से बताता है कि कहां सामान की कमी पड़ सकती है और कब-कैसे हमला करना चाहिए।
AI के इस्तेमाल पर विवाद और भविष्य की चुनौतियाँ
नवंबर 2025 में एंथ्रोपिक और पालंटिर ने क्लाउड को मावेन में एकीकृत किया था, जिससे यह डेटा को समझने, पुरानी घटनाओं से तुलना करने और कमांडरों को गहरी समझ देने में सक्षम हो गया। हालांकि, इस पर कुछ विवाद भी हुआ। फरवरी में पेंटागन ने कहा था कि एंथ्रोपिक ने स्वायत्त हथियारों (autonomous weapons) या निगरानी (surveillance) में क्लाउड के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी थी, इसलिए इसे मावेन से हटाया जाएगा। पालंटिर ने वैकल्पिक AI खोजने की बात कही। इसके बावजूद, रॉयटर्स (Reuters) ने पिछले महीने रिपोर्ट किया कि पेंटागन ने मावेन को "आधिकारिक कार्यक्रम" (official program) घोषित कर दिया है। डिप्टी डिफेंस सेक्रेटरी (Deputy Defense Secretary) स्टिव फाइनबर्ग (Stive Fineberg) ने लिखा कि यह प्लेटफॉर्म कमांडरों को "दुश्मनों को हर डोमेन (domain) में पता लगाने, रोकने और हावी होने के लिए आवश्यक आधुनिकतम उपकरण" देगा। मावेन पहले भी सोमालिया (Somalia), इराक-सीरिया (Iraq-Syria), अफगानिस्तान (Afghanistan) और रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine war) की निगरानी में इस्तेमाल हो चुका है।
ईरान अभियान में AI के इस तीव्र उपयोग पर सवाल उठ रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि मावेन जैसे उपकरण इतनी तेज़ी से काम करते हैं कि आउटपुट (output) की सही जांच के लिए समय बहुत कम मिलता है। अगर AI कोई गलती कर दे, तो इंसान के पास उसे पकड़ने का मौका न रहे। अमेरिकी कांग्रेस (US Congress) में डेमोक्रेट नेता (Democrat leaders) AI प्लेटफॉर्म्स पर अधिक निगरानी की मांग कर रहे हैं, खासकर ईरान के मिनाब शहर (Minab city) में स्कूल पर हुए हमले की घटना के बाद, जिसमें ईरानी अधिकारियों के अनुसार 168 लोग मारे गए, जिनमें लगभग 110 बच्चे थे। पेंटागन से पूछा जा रहा है कि क्या उस टारगेट (target) की पहचान AI ने की थी। पालंटिर के यूके-यूरोप प्रमुख (UK-Europe Head) लुईस मॉस्ले (Louis Mosley) ने बीबीसी (BBC) को बताया कि मावेन ईरान युद्ध प्रबंधन में "बहुत महत्वपूर्ण" रहा, लेकिन अंतिम फैसला हमेशा इंसान ही लेता है। पालंटिर का सॉफ्टवेयर अब पेंटागन में इतनी गहराई से जुड़ चुका है कि कंपनी एक साधारण डिफेंस ठेकेदार (defense contractor) से बढ़कर अमेरिकी सैन्य ऑपरेशंस की केंद्रीय कंपनी बन गई है। कंपनी को पिछले साल अमेरिकी थलसेना (US Army) से 10 अरब डॉलर तक का बड़ा ठेका मिला है, और इसका शेयर प्राइस (share price) पिछले एक साल में दोगुना हो गया है, जिससे मार्केट कैपिटलाइज़ेशन (market capitalization) लगभग 3 लाख करोड़ रुपये (350-360 अरब डॉलर) तक पहुँच गया है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का युद्ध में यह बढ़ता दखल आधुनिक सैन्य रणनीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नए आयाम खोल रहा है। जहां एक ओर यह निर्णय लेने की प्रक्रिया को गति और सटीकता प्रदान करता है, वहीं इसके नैतिक और मानवीय नियंत्रण से जुड़े सवाल भी गंभीर चुनौतियां पेश कर रहे हैं। भविष्य में AI आधारित युद्ध प्रणालियों का विकास और उनका उपयोग वैश्विक भू-राजनीति (geopolitics) और सैन्य संतुलन को कैसे प्रभावित करेगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.