कतर गैस संकट: भारत ने तेज की एलएनजी के लिए अमेरिका-रूस से बातचीत, दोहा पहुंचे पुरी
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार एक बड़े संकट का सामना कर रहा है. ईरान के हमलों के कारण कतर के प्रमुख ऊर्जा बुनियादी ढांचे (Energy Infrastructure) को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे वहां से होने वाला लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है. विशेषज्ञों के अनुसार, कतर के इन तबाह हो चुके प्लांट्स को पूरी तरह ठीक होने में अब 5 साल तक का लंबा समय लग सकता है. इस गंभीर कतर गैस संकट और वैश्विक सप्लाई चेन (Global Supply Chain) पर बढ़ते दबाव के बीच, भारत सरकार हरकत में आ गई है. भारत के केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी गुरुवार को दो दिवसीय यात्रा पर कतर की राजधानी दोहा पहुंचे हैं. हवाई अड्डे पर कतर में भारत के राजदूत विपुल और कतर एनर्जी (Qatar Energy) के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया. मंत्री पुरी का यह दौरा घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने की भारत की कोशिशों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
कतर एनर्जी ने लगाया 'फोर्स मेजर', वैश्विक आपूर्ति प्रभावित
कतर की सरकारी स्वामित्व वाली दिग्गज कंपनी, कतर एनर्जी ने पिछले महीने अपने लंबी अवधि के एलएनजी सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स (Long-term LNG Supply Contracts) पर 'फोर्स मेजर' (Force Majeure) लागू कर दिया था. इस अप्रत्याशित कदम के बाद कतर से इटली, बेल्जियम, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे प्रमुख आयातक देशों को जाने वाली एलएनजी की महत्वपूर्ण सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है. हालांकि, राहत की बात यह रही कि प्रभावित देशों की प्रारंभिक सूची में भारत का नाम शामिल नहीं था, लेकिन भारत चूंकि कतर से एलएनजी खरीदने वाले दुनिया के प्रमुख देशों में से एक है, इसलिए इस संकट का परोक्ष असर भारत पर पड़ना तय है. कतर एनर्जी के सीईओ साद अल-काबी के आधिकारिक बयानों के अनुसार, फरवरी के अंत में संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान द्वारा किए गए लक्षित हमलों के कारण कतर के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को व्यापक क्षति पहुंची है. इन हमलों ने देश की कुल एलएनजी निर्यात क्षमता (LNG Export Capacity) का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर प्रभावित किया है. आंकड़ों के मुताबिक, हमलों में कतर के कुल 14 एलएनजी प्लांट्स में से 2 और 2 गैस-टू-लिक्विड (GTL) सुविधाओं में से एक को भारी नुकसान हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप करीब 12.8 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) का उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है.
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मरम्मत में लगेंगे 5 साल, वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में भारतीय कंपनियां
साद अल-काबी ने स्पष्ट किया है कि क्षतिग्रस्त हुए इन अत्याधुनिक और विशाल प्लांट्स की जटिल मरम्मत प्रक्रिया (Repair Process) में तीन से पांच साल का लंबा समय लग सकता है. इस अप्रत्याशित संकट के कारण कतर को हर साल लगभग 20 अरब डॉलर के भारी राजस्व नुकसान (Revenue Loss) का अनुमान लगाया गया है. कतर से होने वाली आपूर्ति में इस बड़ी रुकावट ने न केवल एशिया, बल्कि यूरोप के देशों में भी वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा (Global Energy Security) को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं. इस पृष्ठभूमि में, भारतीय कंपनियां अब एलएनजी की तत्काल और भविष्य की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका (USA), ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे अन्य प्रमुख वैकल्पिक स्रोतों (Alternative Sources) की ओर तेजी से रुख कर रही हैं.
भारत में एलएनजी का उपयोग मुख्य रूप से औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Sector) में ईंधन के रूप में होता है. भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए गैस आयात महत्वपूर्ण है; देश ने 2025 में लगभग 25.5 मिलियन टन एलएनजी का आयात किया था. भारत सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य 2030 तक देश के कुल ऊर्जा मिश्रण (Total Energy Mix) में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक करने का है. कतर में मौजूदा संकट को देखते हुए, भारत अपनी ऊर्जा कूटनीति (Energy Diplomacy) के माध्यम से आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने के प्रयास तेज कर रहा है ताकि घरेलू बाजार पर किसी भी भू-राजनीतिक संकट का न्यूनतम असर पड़े.
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.