ISRO: अब आम नागरिक भी कर सकेंगे अंतरिक्ष की सैर, इसरो शुरू करने जा रहा सिविलियन एस्ट्रोनॉट्स की भर्ती
भारत के अंतरिक्ष सपनों को एक नई उड़ान मिलने जा रही है। अब तक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के मिशनों में केवल सैन्य पृष्ठभूमि (Military Background) वाले जांबाजों का ही दबदबा रहा है, लेकिन अब यह परंपरा बदलने वाली है। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी अपने भविष्य के मानव मिशनों के लिए 'सिविलियन एस्ट्रोनॉट्स' (Civilian Astronauts) यानी आम नागरिकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने की योजना बना रही है। यह खबर उन करोड़ों भारतीय युवाओं, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए एक सुनहरा अवसर लेकर आई है, जो वर्दी में न होते हुए भी सितारों तक पहुंचने का ख्वाब देखते हैं।
वर्तमान में गगनयान मिशन (Gaganyaan Mission) के पहले बैच के लिए केवल भारतीय वायुसेना (IAF) के टेस्ट पायलटों को ही चुना गया है। इसके पीछे मुख्य कारण शुरुआती मिशनों में सुरक्षा प्रोटोकॉल और तकनीकी जटिलताओं को परखना था। लेकिन अब इसरो की चयन समिति ने भविष्य के मिशनों के लिए एक 'मिश्रित दल' (Mixed Crew) की सिफारिश की है, जिसमें सेना के साथ-साथ नागरिक विशेषज्ञ भी शामिल होंगे।
चयन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव: सेना के साथ जुड़ेंगे वैज्ञानिक और विशेषज्ञ
रिपोर्ट्स के अनुसार, इसरो अपने अगले एस्ट्रोनॉट बैच में कुल 10 सदस्यों को शामिल करने की तैयारी में है। इसमें छह मिशन पायलट (IAF पृष्ठभूमि वाले) और चार सिविलियन स्पेशलिस्ट (Civilian Specialists) हो सकते हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब अंतरिक्ष यान के कॉकपिट में केवल लड़ाकू विमान चलाने वाले पायलट ही नहीं, बल्कि लैब में रिसर्च करने वाले वैज्ञानिक और जटिल मशीनें बनाने वाले इंजीनियर भी नजर आएंगे।
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यह बदलाव केवल नागरिकों तक ही सीमित नहीं है। इसरो अपने सैन्य कोटे (Military Quota) में भी विस्तार करने जा रहा है। अब तक केवल फाइटर पायलटों को ही तरजीह दी जाती थी, लेकिन नई योजना के तहत अब कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलटों (Combat Helicopter Pilots) के लिए भी अंतरिक्ष के दरवाजे खोल दिए जाएंगे। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि अंतरिक्ष यात्रियों का एक बड़ा पूल तैयार किया जा सके, जो भविष्य के विविध मिशनों की चुनौतियों को संभाल सकें।
कौन कर सकेगा आवेदन? क्या होंगी योग्यताएं?
भले ही यह भर्ती 'आम नागरिकों' के लिए है, लेकिन इसके लिए योग्यता के मानक बेहद सख्त होंगे। प्राथमिकता उन उम्मीदवारों को दी जाएगी जिनका शैक्षणिक बैकग्राउंड 'STEM' (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स) में मजबूत होगा। इसरो को ऐसे विशेषज्ञों की तलाश है जो अंतरिक्ष की शून्य गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity) वाली स्थिति में जाकर न केवल जटिल वैज्ञानिक प्रयोग (Scientific Experiments) कर सकें, बल्कि वहां के एडवांस सिस्टम और पेलोड्स को भी कुशलता से संभाल सकें। यह चयन प्रक्रिया पूरी तरह से योग्यता और शारीरिक क्षमताओं पर आधारित होगी।
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और भविष्य का रोडमैप
इसरो के इस बड़े फैसले के पीछे एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य छिपा है। भारत अब केवल एक बार इंसानों को अंतरिक्ष में भेजकर शांत नहीं बैठने वाला है। एजेंसी का लक्ष्य साल में कम से कम दो मानव मिशन संचालित करना है। इसके साथ ही, इसरो ने 'भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन' (BAS) के निर्माण पर भी तेजी से काम शुरू कर दिया है। एक पूर्ण विकसित अंतरिक्ष स्टेशन को संचालित करने के लिए बड़ी संख्या में विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए, इसरो अंतरिक्ष यात्रियों के कुल पूल (Pool of Astronauts) को बढ़ाकर 40 तक करने की योजना बना रहा है।
वैश्विक स्तर पर देखें तो अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) दशकों पहले सिविलियन एस्ट्रोनॉट्स को अपने मिशन का हिस्सा बना चुकी है। नील आर्मस्ट्रांग इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं, जो नौसेना छोड़ने के बाद एक सिविलियन के रूप में अंतरिक्ष में गए थे। अब भारत भी उसी आधुनिक राह पर चल पड़ा है, जहां अंतरिक्ष केवल एक सामरिक क्षेत्र नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अन्वेषण और नागरिक भागीदारी का नया केंद्र बनने जा रहा है। हालांकि, सिविलियन एस्ट्रोनॉट्स की पहली वास्तविक उड़ान गगनयान के चौथे मिशन से शुरू होने की उम्मीद है, लेकिन इसकी तैयारी आज से ही शुरू हो गई है।
तमाम तकनीकी चुनौतियों और ट्रेनिंग सुविधाओं के निर्माण के बीच, सबसे सकारात्मक बात यह है कि अब एक भारतीय वैज्ञानिक या शोधकर्ता को अपनी योग्यता साबित करने के लिए सैन्य प्रशिक्षण की अनिवार्यता से नहीं गुजरना होगा। यह पहल देश में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए नई प्रेरणा साबित होगी। भारत का अंतरिक्ष स्टेशन और उसमें काम करते हमारे वैज्ञानिक जल्द ही दुनिया को नई ऊंचाइयों से रूबरू कराएंगे।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.