श्रीनगर: ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा की, जिसके तहत प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई-IV) के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर के लिए लगभग 8,000 करोड़ रुपए की सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। यह कदम केंद्र शासित प्रदेश में ग्रामीण संपर्क (rural connectivity), कृषि और आजीविका को एक नई दिशा देने वाला साबित होगा। इस बड़ी पहल का उद्देश्य दूरदराज के इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है, जिससे स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर में सुधार आ सके।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने श्रीनगर के एसके आईसीसी (SK ICC) में आयोजित एक गरिमापूर्ण कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को पीएमजीएसवाई-IV (बैच-II) के तहत स्वीकृत परियोजनाओं के लिए स्वीकृति पत्र सौंपा। मंत्री चौहान ने इस अवसर पर कहा कि एक वर्ष के भीतर इतनी बड़ी सड़क परियोजनाओं को मंजूरी मिलना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है और यह जम्मू-कश्मीर के समग्र विकास के प्रति केंद्र सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि पीएमजीएसवाई-IV के अनुमोदन के दोनों चरणों में केंद्र शासित प्रदेश को प्राथमिकता दी गई है।
जम्मू-कश्मीर में सड़क निर्माण से 'दिलों को जोड़ने' का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि इन परियोजनाओं का लक्ष्य केवल सड़कें बनाना नहीं है, बल्कि दूरदराज के गांवों, बस्तियों और दुर्गम क्षेत्रों को स्कूलों, अस्पतालों और बाजारों जैसी आवश्यक सेवाओं से जोड़ना है। उनका जोर इन क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा में एकीकृत करने पर था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यापक दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरकार केवल भौतिक सड़कें बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि 'दिलों को जोड़ने' के लिए भी प्रतिबद्ध है। चौहान ने भावुक लहजे में कहा कि जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए 'दिल और दिल्ली' दोनों के दरवाजे खुले हैं, जो क्षेत्र के प्रति केंद्र के भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है।
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सड़क परियोजनाओं के अलावा, केंद्रीय मंत्री ने महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए अन्य महत्वपूर्ण पहलों की भी घोषणा की। दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 4,568.23 करोड़ रुपए से अधिक की 'मूल स्वीकृति' जारी की गई। इसका उद्देश्य महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups - SHGs) को मजबूत करना है। चौहान ने कहा कि सरकार का ध्यान केवल 'लखपति दीदियों' को तैयार करने पर नहीं, बल्कि उन्हें मजबूत और टिकाऊ उद्यमियों में बदलने पर भी है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने घोषणा की कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research - ICAR) के वैज्ञानिकों की एक टीम को जम्मू-कश्मीर में जलवायु, मिट्टी, जल संसाधनों और कृषि क्षमता का अध्ययन करने तथा एक व्यापक रोडमैप तैयार करने के लिए भेजा जाएगा, जिससे कृषि क्षेत्र को भी गति मिल सके।
विकास की नई राह पर जम्मू-कश्मीर: मुख्यमंत्री अब्दुल्ला का स्वागत
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इन पहलों का गर्मजोशी से स्वागत किया और लगभग 8,000 करोड़ रुपए की सड़क परियोजनाओं की मंजूरी को 'असाधारण' बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक ही चरण में इतनी बड़ी मात्रा में परियोजनाओं की मंजूरी चुनौतीपूर्ण भौगोलिक स्थिति और बिखरी हुई आबादी वाले क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने स्मरण कराया कि पीएमजीएसवाई के पहले के चरणों ने पहले ही दूरदराज के क्षेत्रों को स्कूलों, स्वास्थ्य सेवाओं और बाजारों से जोड़कर कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव लाया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पीएमजीएसवाई-IV शेष बस्तियों को जोड़ने में मदद करेगा, जिससे कोई भी क्षेत्र विकास से अछूता नहीं रहेगा। यह कदम जम्मू-कश्मीर में समावेशी विकास (inclusive development) की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा, जो न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक एकीकरण को भी बढ़ावा देगा।
यह परियोजनाएं जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। बेहतर सड़कें न केवल आवागमन को सुगम बनाएंगी बल्कि कृषि उत्पादों को बाजारों तक पहुंचाने में भी मदद करेंगी, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी। महिला स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने और कृषि अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करने से समग्र आर्थिक विकास को गति मिलेगी। इन पहलों से जम्मू-कश्मीर में एक नए युग की शुरुआत होने की उम्मीद है, जहां ग्रामीण समुदाय सशक्त होंगे और क्षेत्र राष्ट्रीय विकास में सक्रिय भागीदार बनेगा।
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