UP बोर्ड में अनोखी गुरु दक्षिणा: 'ऑनलाइन पैसे भेजें या जय श्री राम कहो...'— छात्र बने डिजिटल भिखारी!

यूपी बोर्ड परीक्षा कॉपियों में छात्र ऑनलाइन पैसे और धार्मिक नारे लिखकर पास होने की अपील कर रहे हैं।

यूपी बोर्ड की नई गुरु दक्षिणा: 'ऑनलाइन पैसे भेजो या जय श्री राम कहो...'— छात्र बने डिजिटल भिखारी!

परीक्षा का मौसम! भारत में ये सिर्फ़ छात्रों के लिए नहीं, बल्कि अभिभावकों, कोचिंग सेंटरों और पेपर चेकर गुरुओं के लिए भी किसी 'ड्रामा सीरीज़' से कम नहीं होता। लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश बोर्ड के परीक्षार्थियों ने जो नया ट्रेंड सेट किया है, उसे देखकर बॉलीवुड के स्क्रिप्टराइटर भी कहेंगे, "भाई साहब, ये तो हम सोच ही नहीं पाए!" ग्रेटर नोएडा में यूपी बोर्ड की कॉपियों की जाँच चल रही है, और जो नज़ारे सामने आ रहे हैं, वो दिखाते हैं कि हमारे छात्रों ने 'गुरु दक्षिणा' और 'भगवान भरोसे' की परंपरा को एक नए, हाइटेक और धार्मिक रंग में रंग दिया है।

पहले छात्र पास होने के लिए ₹100-₹500 का नोट कॉपी में रख देते थे, या 'गुरुजी, मेरी बहन की शादी है' जैसी भावुक अपील लिखते थे। अब ज़माना बदल गया है! 21वीं सदी के इन छात्रों ने पास होने के लिए डिजिटल युग का ब्रह्मास्त्र इस्तेमाल किया है। कॉपियों में मोबाइल नंबर लिखकर संदेश दे रहे हैं: 'फोन कर लें, ऑनलाइन पैसे भेज देंगे।' मतलब, सीधे-सीधे डिजिटल 'गुरु दक्षिणा' की पेशकश! वो भी गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसी 'मुश्किल' कॉपियों में सबसे ज़्यादा। शिक्षकों ने तो पहली बार ऐसा 'ऑनलाइन भिखमंगापन' देखा है, और वे निर्देशों का पालन करते हुए सिर खुजा रहे हैं।

जब श्रद्धा और डिजिटल जुगाड़ साथ चलें: 'ऊँ नम शिवाय' से 'ससुराल में बदनामी' तक!

आप सोच रहे होंगे कि बस यही? नहीं जनाब, ये तो बस 'ट्रेलर' है! जब डिजिटल जुगाड़ काम न आया, तो हमारे छात्रों ने सीधे 'ऊपर वाले' से संपर्क साधा। गलत उत्तरों के नीचे 'ऊँ नम शिवाय', 'जय श्री राम' जैसे धार्मिक नारे लिखे गए हैं। अब सवाल ये है कि क्या भगवान वाकई चेकर की कलम रोकेंगे या 'मोक्ष' की जगह 'फेल' का टिकट मिलेगा? ये तो रिजल्ट ही बताएगा!

एक छात्रा ने तो परीक्षा की कॉपी को 'मेट्रिमोनियल वेबसाइट' या 'रियलिटी शो' बना दिया। उसने लिखा है, 'गुरुजी पास कर दो। निकाह के कारण पढ़ नहीं पाई। ससुराल में फेल होने का रिजल्ट आया तो बदनामी होगी। कृपा करके नइया पार लगा दीजिए।' अब आप बताइए, क्या यह बोर्ड परीक्षा है या 'सासु माँ' को इंप्रेस करने का 'लास्ट चांस'? यह दिखाता है कि भारत में डिग्री सिर्फ़ नौकरी के लिए नहीं, बल्कि 'ससुराल में इज़्ज़त' के लिए भी कितनी ज़रूरी है!

शिक्षा का भविष्य: जहां पास होना 'ट्रांज़ेक्शनल' है, और भगवान 'मार्क्स डिवाइडर'!

जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार सिंह ने बताया कि मूल्यांकन प्रक्रिया अंतिम चरण में है और 4 अप्रैल तक बढ़ा दी गई है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि शिक्षक निर्देशों का पालन कर रहे हैं। अब सवाल यह है कि क्या ये 'निर्देश' इन डिजिटल गुरु दक्षिणा ऑफर, धार्मिक नारों और 'निकाह' वाले बहाने को भी कवर करते हैं? क्या शिक्षकों को अब फ़ोन पे या गूगल पे के इस्तेमाल की ट्रेनिंग लेनी चाहिए? या एक 'धार्मिक स्लोगन डिक्शनरी' भी साथ रखनी चाहिए ताकि पता चले कि किस नारे पर कितने ग्रेस मार्क्स मिल सकते हैं?

यह घटना सिर्फ़ कुछ छात्रों की शरारत नहीं है, यह हमारे शिक्षा प्रणाली पर बढ़ते दबाव और 'कैसे भी पास होने की मानसिकता' का एक आईना है। जहां बच्चे पढ़ाई से ज़्यादा 'जुगाड़' और 'डिजिटल डोनेशन' पर भरोसा कर रहे हैं। क्या अगले साल यूपी बोर्ड की कॉपियों के साथ QR कोड का विकल्प भी आएगा? या छात्रों को एक 'डिजिटल दक्षिणा' ऐप डाउनलोड करना पड़ेगा? यह 'भारतीय ड्रामा एपिसोड' सिर्फ़ पास-फेल का नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक और नैतिक सोच के नए आयाम खोल रहा है।

निष्कर्ष में, लगता है कि अब यूपी बोर्ड को अपने मूल्यांकन दिशानिर्देशों में एक नया सेक्शन जोड़ना पड़ेगा: 'डिजिटल गुरु दक्षिणा पॉलिसी' और 'धार्मिक नारे - मार्क्स आवंटन नियमावली'। क्योंकि जब शिक्षा 'ऑनलाइन' हो सकती है, तो 'गुरु दक्षिणा' और 'भगवान से सिफारिश' क्यों नहीं? बस उम्मीद है कि शिक्षकों को इन 'ऑनलाइन ट्रांजेक्शन' का कमीशन मिलेगा, वरना अगले साल वे भी अपनी सैलरी बढ़ाने के लिए कॉपियों में अपने यूपीआई आईडी लिखने लगेंगे!

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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