पश्चिम एशिया संकट: मार्च में भारतीय निर्यात को लगा गहरा झटका, 5 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट

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भारत के वस्तु निर्यात (merchandise exports) को मार्च महीने में पश्चिम एशिया संकट से निर्यात पर चोट लगी है, जिसके परिणामस्वरूप इसमें 7.44% की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह गिरावट बीते पांच महीनों में सबसे बड़ी है, जिससे निर्यात घटकर 38.92 अरब डॉलर रह गया। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

वाणिज्य मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों से पता चला है कि निर्यात में गिरावट के साथ-साथ आयात (imports) में भी 6% से अधिक की कमी आई है। हालांकि, आयात में यह कमी व्यापार घाटे (trade deficit) के लिए कुछ राहत लेकर आई, जो मार्च में घटकर नौ महीने के निचले स्तर 20.67 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह मुख्य रूप से कच्चे तेल (crude oil) और सोने (gold) के आयात में उल्लेखनीय कमी के कारण संभव हुआ, जिससे कुल आयात 6.51% घटकर 59.59 अरब डॉलर रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अप्रैल महीने के लिए भी निर्यात को कठिन बना सकता है।

पश्चिम एशिया संकट: निर्यात पर गहरा प्रभाव और व्यापार संतुलन

पश्चिम एशिया में अमेरिका (USA), इजरायल (Israel) और ईरान (Iran) के बीच 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष ने आपूर्ति श्रृंखलाओं (supply chains) को बाधित किया है, जिसका सीधा असर भारत के निर्यात पर पड़ा है। भारत सामान्यतः हर महीने इस क्षेत्र को लगभग 6 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं का निर्यात करता है, लेकिन संघर्ष के कारण यह आंकड़ा घटकर लगभग 2.0 से 2.5 अरब डॉलर तक सीमित हो गया है। यह गिरावट वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के आर्थिक परिणामों को भी दर्शाती है।

बीते वित्त वर्ष 2023-24 की बात करें तो, भारत का वस्तु निर्यात 0.93% बढ़कर 441.78 अरब डॉलर के अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। वहीं, कुल आयात 7.45% बढ़कर 775 अरब डॉलर रहा। हालांकि, सोने और चांदी (silver) के आयात में उछाल के कारण बीते वित्त वर्ष के दौरान व्यापार घाटा बढ़कर 333.2 अरब डॉलर हो गया।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इस संदर्भ में सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने अनुमान लगाया कि देश के वस्तुओं और सेवाओं (goods and services) का कुल निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में 4.22% की वृद्धि के साथ 860.09 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच जाएगा, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 825.26 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। अग्रवाल ने जोर देकर कहा कि वैश्विक चुनौतियों (global challenges) के बावजूद भारतीय निर्यातक मजबूती दिखा रहे हैं और सकारात्मक वृद्धि दर्ज कर रहे हैं।

भारतीय निर्यातकों की लचीलापन और भविष्य की राह

निर्यातकों की संस्था फियो (FIEO) के अध्यक्ष एससी रल्हन ने भी भारतीय निर्यातकों के लचीलेपन की सराहना की। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं और मांग में उतार-चढ़ाव (demand fluctuations) के बीच 860 अरब डॉलर का निर्यात आंकड़ा पार करना एक बड़ी उपलब्धि है, जो भारतीय निर्यातकों की दृढ़ता और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता को प्रमाणित करता है।

मार्च में निर्यात में गिरावट, विशेष रूप से पश्चिम एशिया संकट के कारण, एक अल्पकालिक चुनौती हो सकती है। हालांकि, बीते वित्त वर्ष में कुल निर्यात में वृद्धि और वाणिज्य सचिव द्वारा प्रस्तुत आशावादी अनुमान दर्शाते हैं कि भारत की निर्यात क्षमता में दीर्घकालिक मजबूती है। सरकार और निर्यातकों को मिलकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को और अधिक लचीला बनाने तथा नए बाजारों की तलाश करने पर ध्यान केंद्रित करना होगा, ताकि भू-राजनीतिक तनावों का सीधा असर भारतीय व्यापार पर कम से कम पड़े और देश आर्थिक विकास की राह पर अग्रसर रह सके।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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