भारत में बाधा-मुक्त टोल संग्रह: निर्बाध यात्रा और राजस्व सुरक्षा की नई पहल

बाधा-मुक्त टोल संग्रह प्रणाली लागू होने से भारतीय राजमार्गों पर वाहन बिना रुके गुजर रहे हैं

भारत में बाधा-मुक्त टोल संग्रह की नई सुबह: निर्बाध यात्रा का मार्ग प्रशस्त

भारत ने अपने राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली के तरीके में एक क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत की है, जिसका सीधा असर लाखों वाहन चालकों और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। हाल ही में गुजरात के राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच)-48 के सूरत-भरूच खंड पर स्थित चोरायासी टोल प्लाजा पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) प्रणाली की शुरुआत के साथ, देश में बाधा-मुक्त टोल संग्रह का युग शुरू हो गया है। यह अत्याधुनिक प्रणाली स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (ANPR - Automatic Number Plate Recognition) जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग कर वाहनों को बिना रुके सुचारु टोल वसूली को सक्षम बनाती है, जिससे यात्रा का समय, ईंधन की खपत और टोल प्लाजा पर होने वाली भीड़ में भारी कमी आने की उम्मीद है।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने वर्ष 2024 में ही इस स्वचालित टोल कटौती प्रणाली की परिकल्पना की थी, जिसे वे भारत को निर्बाध राजमार्ग संचालन की ओर ले जाने और राष्ट्रीय राजमार्ग टोल वसूली से होने वाली लगभग 10,000 करोड़ रुपये की हेराफेरी को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं। यह प्रणाली पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करती है, क्योंकि यह टोल वसूली क्षेत्र से गुजरते समय कैमरों के माध्यम से वाहन की नंबर प्लेट पढ़ लेती है, जिससे टोल प्लाजा की भौतिक आवश्यकता ही समाप्त हो जाती है। फास्टैग (FASTag) की शुरुआत से औसत प्रतीक्षा समय पहले ही 47 सेकंड तक कम हो गया था, लेकिन यह नई प्रणाली इसे और भी कम कर देगी। दिल्ली के अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 पर स्थित मुंडका में भी इस तकनीक का सफल परीक्षण चल रहा है, जो आने वाले समय में पूरी तरह से बाधा-मुक्त क्षेत्र बन जाएगा।

वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के अनुसार, सरकार चालू वित्त वर्ष में लगभग 200 टोल प्लाजा पर MLFF के लिए निविदाएं (tenders) जारी करने की योजना बना रही है। इसका अंतिम लक्ष्य लगभग 1,200 टोल प्लाजा तक पहुंचना और अंततः इसे पूरे देश में लागू करना है। हालांकि, चीन की निगरानी तकनीक से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं के कारण, सरकार द्वारा इन कैमरों का निर्माण करने वाली दूसरे देशों की कंपनियों की तलाश करने में योजना में कुछ समय के लिए विलंब हुआ है।

राजस्व सुरक्षा और निर्बाध टोल संग्रह की चुनौतियां

यह प्रणाली टोल प्लाजा पर टोल न चुकाने वाले वाहन मालिकों के अभद्र व्यवहार और तोड़फोड़ की घटनाओं पर भी अंकुश लगाने में सहायक होगी। वैश्विक स्तर पर MLFF कोई नई तकनीक नहीं है और अन्य देशों में भी इसके सफल परिणाम देखने को मिले हैं। हालांकि, भारत में दोषपूर्ण या निष्क्रिय फास्टैग उपयोगकर्ताओं से होने वाली राजस्व हानि (revenue loss) अभी भी एक चिंता का विषय बनी हुई है। केंद्र सरकार इस समस्या के समाधान के लिए एक मुआवजा तंत्र (compensation mechanism) पर काम कर रही है। इस वर्ष की शुरुआत में MLFF पर आयोजित एक सम्मेलन में, वैश्विक कंपनियों ने ऐसे मामलों के लिए कानूनी उपायों की उपलब्धता पर जोर दिया था। केंद्र सरकार ने हाल ही में नियमों में बदलाव करते हुए 'भुगतान नहीं हुए उपयोग शुल्क' (Unpaid User Fee) की नई परिभाषा दी है। अब शुल्क नहीं चुकाने वाले उपयोगकर्ताओं को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC - No Objection Certificate) और फिटनेस प्रमाण पत्र (Fitness Certificate) नहीं मिलेगा। यह कदम राजमार्ग संचालकों के राजस्व नुकसान से जुड़े डर को दूर करने के लिए उठाया गया है, जिन्हें पहले ही 3,000 रुपये के फास्टैग वार्षिक पास की शुरुआत के कारण हुए राजस्व नुकसान के लिए सरकार द्वारा मुआवजा दिया जा रहा है।

राजमार्ग मंत्रालय ने इस पहल को भारत के टोल ढांचे के डिजिटलीकरण (digitization) और वैश्विक मानकों के अनुरूप राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना (highway infrastructure) के आधुनिकीकरण में एक अहम मील का पत्थर बताया है। इस प्रणाली से यात्रा का समय काफी कम होने से राजमार्गों पर भीड़ घटने, ईंधन दक्षता (fuel efficiency) में सुधार, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन (emissions) में कमी और टोल संचालन में मानव हस्तक्षेप कम होने की उम्मीद है।

नितिन गडकरी ने संसद को यह भी बताया था कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित राजमार्ग प्रबंधन प्रणाली 2026 के अंत तक पूरे भारत में लागू कर दी जाएगी। उन्होंने कहा था कि इससे यात्रियों को टोल प्लाजा पर अब और इंतजार नहीं करना पड़ेगा, जिससे 1,500 करोड़ रुपये मूल्य के ईंधन की बचत होगी और सरकारी राजस्व में 6,000 रुपये का इजाफा होगा। यह नई प्रणाली पूरी तरह से 'पे-एज-यू-ड्राइव' (Pay-as-you-drive) मॉडल को सक्षम बनाएगी, क्योंकि उपयोगकर्ताओं को केवल तय की गई किलोमीटर की संख्या के लिए ही टोल का भुगतान करना होगा। यह कदम देश में सड़क यात्रा को अधिक कुशल, पारदर्शी और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव लाएगा।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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