कभी देश और छत्तीसगढ़ के लिए एक विकट चुनौती रहा नक्सलवाद (Naxalism) अब लगभग इतिहास बनने की कगार पर है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 31 मार्च 2026 तक इसे जड़ से खत्म करने की डेडलाइन तय की गई थी, लेकिन छत्तीसगढ़ की वर्तमान सरकार ने इस लक्ष्य को समय से काफी पहले ही हासिल कर लिया है। हाल ही में न्यूज 18 इंडिया डायमंड स्टेट समिट छत्तीसगढ़ (News18 India Diamond State Summit Chhattisgarh) में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय (CM Vishnudev Sai) ने इस बड़ी सफलता के पीछे की रणनीति और छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद का सफाया कैसे हुआ, इसका खुलासा किया। उनकी पुर्नवास नीति (Rehabilitation Policy) और डबल इंजन सरकार (Double Engine Government) की प्रभावी रणनीति ने इस समस्या पर निर्णायक वार किया है।
छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद का अंत: एक नई सुबह की कहानी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में बताया कि जब दिसंबर 2023 में उनकी सरकार सत्ता में आई, तब राज्य का 75 प्रतिशत हिस्सा नक्सलवाद से प्रभावित था। उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार (Congress Government) पर केंद्र के साथ सहयोग न करने का आरोप लगाया, जिसके कारण समस्या विकराल होती गई। हालांकि, डबल इंजन सरकार बनने के बाद स्थिति तेजी से बदली। गृह मंत्री अमित शाह ने समीक्षा बैठक के बाद नक्सलवाद को खत्म करने की एक स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की, और आज मुख्यमंत्री को यह कहते हुए गर्व है कि गृह मंत्री का संकल्प पूरा हुआ है और छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है।
साय ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अपील पर उन्होंने अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या कम की है और धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की ओर बढ़ने की बात कही। यह देशहित में डीजल-पेट्रोल के खर्च में कमी लाने और सोना न खरीदने की प्रधानमंत्री की अपील का सीधा असर है।
पुर्नवास नीति और जनता का सहयोग: निर्णायक हथियार
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, जो स्वयं बस्तर क्षेत्र (Bastar Region) के आदिवासी समाज से आते हैं, ने नक्सलवाद की जड़ों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जहां शोषण होता है और विकास नहीं पहुंचता, वहीं नक्सलवाद पनपता है और भोले-भाले आदिवासियों को धोखा देकर अपना मोहरा बनाता है। उनकी सरकार ने इस चक्र को तोड़ने का संकल्प लिया। गृह मंत्री के आह्वान पर और मुख्यमंत्री के रूप में, उन्होंने नक्सलियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने की अपील की।
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अन्य राज्यों की नीतियों का अध्ययन करके छत्तीसगढ़ एक प्रभावी पुर्नवास नीति लेकर आया। इसका परिणाम यह हुआ कि तीन हजार से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण (Surrender) किया। इस नीति के तहत, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार द्वारा मुख्यधारा में लौटने और बेहतर जीवन जीने में मदद की जा रही है। साथ ही, सुरक्षा बलों (Security Forces) को भी यह स्पष्ट निर्देश दिया गया कि वे गोलीबारी का जवाब गोलीबारी से दें। जवानों का हौसला बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने खुद सुरक्षा कैंपों (Security Camps) का दौरा किया और केंद्रीय गृह मंत्री ने भी उनका मनोबल बढ़ाया। इस पूरे अभियान में जनता का सहयोग "मोदी है तो मुमकिन है" के विश्वास के साथ मिला, जिससे इस बड़ी चुनौती का सामना करना संभव हो सका।
यह सफलता सिर्फ कानून-व्यवस्था की जीत नहीं है, बल्कि यह विकास और विश्वास बहाली की भी जीत है। नक्सलवाद के खात्मे से बस्तर जैसे क्षेत्रों में विकास की नई राहें खुलेंगी, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। यह घटना देश के अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों (Naxal Affected States) के लिए भी एक मिसाल पेश करती है कि दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रभावी नीतियों और जनभागीदारी से किसी भी समस्या का समाधान किया जा सकता है। यह छत्तीसगढ़ के लिए एक नए, शांतिपूर्ण और समृद्ध भविष्य का संकेत है।
छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद का सफाया एक लंबा और कठिन सफर रहा है, लेकिन अब यह राज्य शांति और विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह सफलता न केवल राज्य के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो यह दर्शाती है कि सामूहिक प्रयासों से बड़ी से बड़ी चुनौतियों को भी पार किया जा सकता है।
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