तमिलनाडु की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बाद, जीत के 100 घंटे बाद विजय पथ पर TVK की गाड़ी आखिरकार मंज़िल तक पहुँच गई है। थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) को सरकार बनाने का न्योता मिल गया है, जिससे राज्य में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया है। यह घटनाक्रम न केवल तमिलनाडु के लिए बल्कि भारतीय राजनीति में उभरते नए चेहरों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देता है। एक फिल्मी सितारे से राजनेता बने विजय ने बेहद कम समय में यह उपलब्धि हासिल की है, लेकिन बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने की उनकी यात्रा आसान नहीं रही।
दरअसल, हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में विजय की पार्टी TVK ने 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था। हालांकि, यह आंकड़ा बहुमत के जादुई आंकड़े 118 से 10 कम था। ऐसे में, सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए विजय को कई दिनों तक दिल्ली में राज्यपाल से मुलाकात करनी पड़ी। दो बार दावा पेश करने के बावजूद, राज्यपाल ने बहुमत सिद्ध करने की बात कही थी। शुक्रवार (08 मई) को थलापति विजय ने तीसरी बार लोकभवन पहुंचकर राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश किया, जिसके बाद उन्हें आखिरकार निमंत्रण मिल गया। मीडिया रिपोर्ट्स (Media Reports) के अनुसार, विजय ने इस बार बहुमत का पूरा जुगाड़ कर लिया था, जिसके बाद ही वह राज्यपाल के पास पहुंचे।
विजय पथ पर TVK की गाड़ी: बहुमत का सफर और सहयोगी दल
TVK के लिए सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने का रास्ता गठबंधन और समर्थन के बिना संभव नहीं था। सबसे पहले, कांग्रेस (Congress) ने विजय का साथ दिया। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएमके (DMK) के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस ने नतीजों के बाद डीएमके से गठबंधन तोड़कर TVK को समर्थन देने का ऐलान किया। कांग्रेस के पांच विधायकों के समर्थन से TVK का आंकड़ा 108 से बढ़कर 113 तक पहुंच गया।
इसके बाद, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPI(M)) ने भी TVK को समर्थन देने की घोषणा की, जिससे पार्टी की संख्या 116 हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि विदुथलाई चिरुथिगल काची (VCK) भी TVK को समर्थन देने के पक्ष में है, हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इन सबके अतिरिक्त, खबरों की मानें तो इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) भी TVK को बाहर से समर्थन देने पर विचार कर रही है। इन सभी संभावित समर्थनों को मिलाकर, TVK का आंकड़ा 120 तक पहुंच जाता है, जो बहुमत के आंकड़े 118 से 2 अधिक है। यह संख्या राज्य विधानसभा की कुल 234 सीटों में से एक स्पष्ट बहुमत को दर्शाती है।
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थलापति विजय का राजनीति में उदय बेहद तेज़ी से हुआ है। महज दो साल पहले राजनीति में कदम रखने वाले विजय ने सिनेमा से संन्यास लेकर पूर्णकालिक राजनेता बनने का फैसला किया था। उन्होंने इस विधानसभा चुनाव में दो सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों पर जीत हासिल की। उनकी इस जीत में युवाओं और महिलाओं का विशेष समर्थन बताया जा रहा है। हालांकि, मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें एक सीट से इस्तीफा देना होगा, जिसके बाद TVK के पास विधानसभा में 107 सीटें बचेंगी।
आगे की राह और संभावित प्रभाव
TVK के लिए सरकार बनाना एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन असली चुनौती अब शुरू होगी। विभिन्न विचारधाराओं वाले दलों के समर्थन से बनी यह गठबंधन सरकार (Coalition Government) कितनी स्थिर और प्रभावी होगी, यह देखना दिलचस्प होगा। विजय को अपने सहयोगी दलों को साथ लेकर चलना होगा और राज्य के विकास के लिए साझा नीतियों पर काम करना होगा। उनकी सरकार के फैसलों का तमिलनाडु की जनता, अर्थव्यवस्था (Economy) और सामाजिक ताने-बाने पर गहरा प्रभाव पड़ना तय है। एक नए राजनीतिक दल के रूप में TVK के पास अपनी छाप छोड़ने का यह एक सुनहरा अवसर है, लेकिन इसके लिए उन्हें कुशल नेतृत्व और प्रभावी शासन देना होगा।
थलापति विजय की यह जीत न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि जनता पारंपरिक राजनीतिक दलों से इतर नए विकल्पों को भी स्वीकार करने को तैयार है। तमिलनाडु में आने वाले समय में एक नई राजनीतिक दिशा देखने को मिल सकती है, जहां एक लोकप्रिय चेहरे के नेतृत्व में नई सरकार राज्य की चुनौतियों का सामना करेगी और अपनी नीतियों से जनता का विश्वास जीतने का प्रयास करेगी।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.