खुलासा: दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा का सर्वर और हैकर्स के कंप्यूटर थे एक ही नेटवर्क पर, समान मिली ID

दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा सर्वर हैक: नेटवर्क आईडी समान

खुलासा: दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा के सर्वर और हैकर्स के कंप्यूटर थे एक ही नेटवर्क पर, समान मिली आईडी

पिछले साल 17 दिसंबर को जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले के घगवाल में आयोजित हुई दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा में सेंधमारी का मामला अब और भी सनसनीखेज मोड़ ले चुका है। फोरेंसिक जांच (forensic investigation) में हुए चौंकाने वाले खुलासों से पता चला है कि परीक्षा केंद्र का सर्वर (server) और परीक्षा में धांधली करने वाले हैकरों के कंप्यूटर (computer) एक ही नेटवर्क (network) पर काम कर रहे थे। जांच में दोनों की नेटवर्क आईडी (network ID) समान पाई गई है, जो इस पूरे रैकेट की गहराई को उजागर करती है। यह घटना लाखों युवाओं के सपनों और देश की सुरक्षा प्रणाली में सेंध की गंभीर चिंताएं पैदा करती है।

दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा: हैकर्स ने बिछाई थी अंडरग्राउंड केबल, सर्वर से सीधा कनेक्शन

दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा केंद्र में हुए इस हाई-प्रोफाइल साइबर अपराध (cyber crime) की परतें अब धीरे-धीरे खुल रही हैं। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम ने परीक्षा केंद्र के सर्वर रूम और हैकर्स से जब्त किए गए 10 कंप्यूटरों की गहन जांच की। विशेषज्ञों ने इन सभी कंप्यूटरों से डेटा (data) निकालकर करीब पांच महीने तक लगातार उसका विश्लेषण किया। इस विस्तृत जांच में सामने आया कि हैकरों ने सर्वर तक पहुंच बनाने के लिए एक अत्यंत सुनियोजित तरीका अपनाया था। उन्होंने परीक्षा केंद्र के पास सड़क के दूसरी ओर लगभग डेढ़ महीने पहले ही एक कमरा किराए पर ले लिया था और वहां से परीक्षा केंद्र के सर्वर तक एक अंडरग्राउंड केबल (underground cable) बिछाई थी। यह तकनीकी जालसाजी (technical fraud) इस बात का स्पष्ट संकेत देती है कि यह कोई साधारण हैकिंग नहीं, बल्कि एक संगठित और पेशेवर गिरोह का काम था।

जांच के दौरान, जब्त किए गए कंप्यूटरों में रिमोट एक्सेस टूल (remote access tool), ट्रोजन वायरस (Trojan virus) और फिशिंग एप (phishing app) जैसे कई संदिग्ध सॉफ्टवेयर (software) भी मिले हैं, जो दूर से ही सिस्टम को नियंत्रित करने और गोपनीय जानकारी चुराने में सक्षम थे।

डाटा रिकवरी ने खोली सच्चाई: मिटाने की कोशिश की गई थी अहम जानकारी

इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण खुलासा तब हुआ जब एफएसएल टीम ने सर्वर के कंप्यूटरों से हटाए गए डेटा को रिकवर (data recovery) किया। जांच में सामने आया कि सर्वर के कई कंप्यूटरों में बिटलॉकर सुरक्षा प्रणाली (BitLocker security system) मौजूद थी, जो डेटा को एन्क्रिप्ट (encrypt) करती है। इसके बावजूद, तीन कंप्यूटरों से डेटा मिटाने की कोशिश की गई थी, शायद सबूत मिटाने के इरादे से। हालांकि, एफएसएल टीम ने इस हटाए गए डेटा को सफलतापूर्वक रिकवर कर लिया। इसी रिकवर किए गए डेटा से परीक्षा केंद्र के सर्वर और हैकर्स के कंप्यूटरों के बीच सीधा संबंध सामने आया, जिसने इस पूरे स्कैम (scam) की सच्चाई को उजागर कर दिया। दोनों के नेटवर्क आईडी का समान होना इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि हैकर सीधे परीक्षा केंद्र के नेटवर्क में घुसपैठ कर चुके थे।

यह घटना देश में भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाती है। जब सरकारी नौकरियों के लिए आयोजित होने वाली परीक्षाओं में इस तरह की सेंधमारी होती है, तो यह न केवल पात्र उम्मीदवारों के मनोबल को तोड़ती है, बल्कि न्याय और पारदर्शिता (transparency) की नींव को भी कमजोर करती है। सरकार और संबंधित एजेंसियों को ऐसे साइबर हमलों (cyber attacks) से निपटने के लिए अपनी साइबर सुरक्षा (cybersecurity) प्रणालियों को और मजबूत करना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और लाखों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखा जा सके। इस मामले में दोषियों को कड़ी सजा मिलना आवश्यक है ताकि एक स्पष्ट संदेश जाए कि ऐसे अपराधों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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