भारत-बांग्लादेश तीस्ता विवाद में चीन की एंट्री: ढाका ने कबूला 'सीक्रेट मास्टरप्लान', भारत की चिंताएं बढ़ीं

भारत-बांग्लादेश तीस्ता विवाद में चीन की दखलंदाजी और भारत की सुरक्षा चिंताएं

भारत-बांग्लादेश तीस्ता विवाद में चीन की दखलंदाजी: ढाका का 'सीक्रेट मास्टरप्लान' कबूलना

भारत और बांग्लादेश के बीच दशकों पुराने तीस्ता नदी जल विवाद (Teesta River Water Dispute) में अब चीन की सीधी दखलअंदाजी (Direct Intervention) ने नई दिल्ली की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ढाका ने खुद स्वीकार किया है कि वह तीस्ता प्रोजेक्ट (Teesta Project) के लिए चीन द्वारा तैयार किए गए एक 'सीक्रेट मास्टरप्लान' (Secret Masterplan) पर बीजिंग के साथ बातचीत कर रहा है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान (Khalilur Rahman) के इस कबूलनामे ने इस भू-राजनीतिक (Geopolitical) मुद्दे को एक नया और संवेदनशील मोड़ दे दिया है, क्योंकि यह प्रोजेक्ट भारत के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'सिलीगुड़ी कॉरिडोर' (Siliguri Corridor) के बेहद करीब है, जो भारत की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। यह घटनाक्रम न केवल जल बंटवारे के मुद्दे को जटिल बनाता है, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन (Regional Power Balance) और भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) पर भी सीधा असर डालता है।

तीस्ता नदी का पानी भारत और बांग्लादेश दोनों के लिए जीवनरेखा है। इस नदी के जल बंटवारे को लेकर दोनों देशों के बीच 2011 से एक समझौता लंबित है, जो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के कड़े विरोध के कारण रुका हुआ था। बांग्लादेश लंबे समय से इस समझौते के लिए भारत पर दबाव बना रहा है और उसका धैर्य अब जवाब देता दिख रहा है।

चीन का 'मास्टरप्लान' और भारत की सुरक्षा चिंताएं

हाल ही में, बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने सार्वजनिक रूप से इस बात की पुष्टि की कि उनकी सरकार चीन के एक महत्वाकांक्षी 'मास्टरप्लान' पर विचार कर रही है। चीन ने तीस्ता नदी के प्रबंधन (River Management) और उसके किनारों के विकास (Embankment Development) के लिए एक अरब डॉलर का भारी-भरकम प्रस्ताव दिया है। बांग्लादेश इस परियोजना को लेकर बीजिंग के साथ लगातार संपर्क में है। जानकार मानते हैं कि ढाका, भारत पर दबाव बनाने और तीस्ता समझौते को गति देने के लिए अब 'चाइना कार्ड' (China Card) खेल रहा है।

भारत के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर है। तीस्ता नदी भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (North-Eastern States) को शेष भारत से जोड़ने वाले 'चिकन नेक' (Chicken Neck) कहे जाने वाले सिलीगुड़ी कॉरिडोर के बहुत करीब से बहती है। यह इलाका सैन्य और रणनीतिक (Military and Strategic) दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। यदि चीन इस क्षेत्र में तीस्ता परियोजना के बहाने अपने इंजीनियरों और मशीनों के साथ प्रवेश करता है, तो वह विकास की आड़ में भारत की इस संवेदनशील सीमा (Sensitive Border) पर अपनी पैठ बना सकता है। इससे चीन को भारतीय सैन्य गतिविधियों (Indian Military Activities) पर नजर रखने और भविष्य में किसी भी स्थिति में भारत के लिए चुनौती खड़ी करने का अवसर मिल सकता है।

भारत की सुरक्षा पर चीन की रणनीतिक चाल

बांग्लादेश द्वारा चीन को इस संवेदनशील परियोजना में शामिल करना केवल जल विवाद का समाधान खोजने की कोशिश नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय भू-राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत भी देता है। ढाका की मजबूरी या रणनीति कुछ भी हो, चीन इस अवसर का लाभ उठाकर भारत के पड़ोसी देशों में अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाहता है। यह चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' (String of Pearls) रणनीति का एक और विस्तार हो सकता है, जिसका उद्देश्य भारत को घेरना है।

हालांकि, बांग्लादेश के लिए भी चीन के साथ इस तरह के 'सीक्रेट मास्टरप्लान' पर आगे बढ़ना एक तलवार की धार पर चलने जैसा हो सकता है। चीन के कर्ज जाल (Debt Trap) और उसकी विस्तारवादी नीतियों (Expansionist Policies) के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए, ढाका को भविष्य में इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। एक ओर जहां यह भारत पर तीस्ता समझौते को अंतिम रूप देने का दबाव बढ़ाएगा, वहीं दूसरी ओर यह बांग्लादेश को चीन के रणनीतिक प्रभाव में धकेल सकता है। पश्चिम बंगाल में हालिया राजनीतिक बदलावों के बाद तीस्ता समझौते को लेकर नई उम्मीदें जगी थीं, लेकिन चीन की एंट्री ने इस पूरे मामले को और भी जटिल बना दिया है।

यह घटनाक्रम भारत के लिए एक कूटनीतिक चुनौती (Diplomatic Challenge) प्रस्तुत करता है। नई दिल्ली को न केवल बांग्लादेश के साथ तीस्ता समझौते को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए सक्रिय होना होगा, बल्कि चीन की बढ़ती क्षेत्रीय दखलंदाजी का भी प्रभावी ढंग से मुकाबला करना होगा। क्षेत्रीय स्थिरता और भारत की सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर एक संतुलित और दूरदर्शी रणनीति अपनाई जाए, ताकि कोई भी 'सीक्रेट मास्टरप्लान' भारत की सुरक्षा को खतरे में न डाल सके।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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