अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस - AI) एक नया आयाम स्थापित कर रही है। हाल ही में, नासा के ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (TESS - टेस) मिशन के डेटा का विश्लेषण करते हुए एक शक्तिशाली एआई टूल 'रेवन' (Raven) ने 100 से अधिक एक्सोप्लैनेट (सौर मंडल के बाहर के ग्रह) की पुष्टि की है। इनमें से 31 ग्रह पूरी तरह से नए हैं, जो ब्रह्मांड की हमारी समझ को और गहरा करते हैं। यह खोज न केवल खगोल विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे आधुनिक तकनीक हमें अज्ञात रहस्यों को उजागर करने में मदद कर रही है। यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक (University of Warwick) के खगोलविदों द्वारा किए गए इस अध्ययन के निष्कर्ष मंथली नोटिसेस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी (MNRAS) जर्नल में प्रकाशित हुए हैं।
नासा के एआई टूल 'रेवन' ने खोली ब्रह्मांड की नई खिड़कियां
नासा का टेस मिशन, जिसे एक्सोप्लैनेट की खोज के लिए डिज़ाइन किया गया है, हजारों संभावित ग्रहों के संकेत दर्ज करता है। हालांकि, इन संकेतों में से असली ग्रहों और झूठे संकेतों (false positives) के बीच अंतर करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यहीं पर 'रेवन' (Raven) नामक एआई-आधारित टूल की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। इसे लाखों सिमुलेटेड डेटा (simulated data) पर प्रशिक्षित किया गया है, ताकि यह सटीक रूप से पहचान सके कि किसी तारे की चमक में कमी का कारण वास्तव में कोई ग्रह है या कोई अन्य खगोलीय घटना। इस क्षमता के चलते, 'रेवन' ने टेस मिशन के पहले चार वर्षों के दौरान एकत्र किए गए 22 लाख से अधिक तारों के डेटा का विश्लेषण किया, जिससे 118 नए ग्रहों की पुष्टि हुई और 2,000 से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले संभावित ग्रहों की पहचान हुई, जिनमें 1,000 नए हैं।
दुर्लभ ग्रहों की पहचान: अल्ट्रा-शॉर्ट पीरियड और नेप्च्यूनियन डेजर्ट
इस शोध में कुछ बेहद खास और दुर्लभ प्रकार के ग्रह भी मिले हैं। इनमें वे ग्रह शामिल हैं जो अपने तारों के बेहद करीब अत्यंत तेज गति से चक्कर लगाते हैं, और 16 दिनों से भी कम समय में एक परिक्रमा पूरी कर लेते हैं। कुछ तो 'अल्ट्रा-शॉर्ट पीरियड प्लैनेट' (Ultra-Short Period Planet) की श्रेणी में आते हैं, जो 24 घंटे से भी कम समय में अपने तारे का एक चक्कर पूरा कर लेते हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ ग्रह उस रहस्यमय 'नेप्च्यूनियन डेजर्ट' (Neptunian Desert) क्षेत्र में पाए गए हैं, जहां ग्रहों का मिलना बेहद कम माना जाता है। नेप्च्यूनियन डेजर्ट अंतरिक्ष का वह क्षेत्र है जहां नेप्च्यून जैसे आकार के ग्रह (मध्यम आकार के गैस ग्रह) बहुत कम पाए जाते हैं, खासकर तब जब वे अपने तारे के बेहद करीब परिक्रमा करते हों। अध्ययन की प्रमुख लेखिका डॉ. मरीना लाफार्गा मैग्रो (Dr. Marina Lafarga Magro) ने 'रेवन' की क्षमताओं पर प्रकाश डाला, जिससे ये दुर्लभ खोजें संभव हो पाईं।
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यह खोज अंतरिक्ष अनुसंधान में एआई की बढ़ती भूमिका का एक सशक्त उदाहरण है। जहां मानव खगोलविद वर्षों तक डेटा का विश्लेषण करते, वहीं 'रेवन' जैसे उपकरण इस प्रक्रिया को नाटकीय रूप से तेज और अधिक कुशल बना रहे हैं। यह हमें न केवल अधिक ग्रहों की पहचान करने में मदद करता है, बल्कि उन ग्रहों के प्रकारों को भी समझने में सहायता करता है जो हमारे सौर मंडल से पूरी तरह भिन्न हैं। इन खोजों से ग्रहों के निर्माण, विकास और अन्य तारों के आसपास जीवन की संभावनाओं को लेकर हमारी समझ में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।
भविष्य में, एआई-आधारित ऐसे उपकरण और भी अधिक परिष्कृत होते जाएंगे, जिससे खगोलविद ब्रह्मांड के और भी गहरे रहस्यों को उजागर कर पाएंगे। यह तकनीक मानव और मशीन के सहयोग से अंतरिक्ष अन्वेषण के एक नए युग की शुरुआत कर रही है, जहां हम उन सवालों के जवाब ढूंढ सकते हैं जो दशकों से अनुत्तरित रहे हैं। यह आशा की जाती है कि ऐसे शक्तिशाली एआई टूल की मदद से आने वाले समय में और भी कई महत्वपूर्ण खोजें सामने आएंगी, जो ब्रह्मांड में हमारी जगह को समझने में सहायक होंगी।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.