RPSC कृषि विज्ञान पेपर लीक: 50 चयनित अभ्यर्थी SOG के रडार पर, कटारा के नेटवर्क का बड़ा खुलासा

RPSC कृषि विज्ञान भर्ती पेपर लीक मामले में SOG की जांच, बाबूलाल कटारा और चयनित अभ्यर्थियों पर फोकस

राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता एक बार फिर सवालों के घेरे में है। RPSC स्कूल व्याख्याता कृषि विज्ञान भर्ती परीक्षा 2022 के पेपर लीक मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। इस बहुचर्चित मामले में SOG ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए 50 चयनित अभ्यर्थियों को अपने रडार पर लिया है। यह जांच अब केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि तत्कालीन RPSC सदस्य बाबूलाल कटारा को मिले राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण, उनके विस्तृत नेटवर्क और पूरी भर्ती प्रक्रिया में संभावित मिलीभगत की परतों को भी खोल रही है। यह घटनाक्रम राज्य के युवाओं और प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में विश्वास रखने वालों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

कटारा का नेटवर्क और 50 अभ्यर्थियों पर शक की सुई

SOG की गहन जांच में सामने आया है कि कृषि विज्ञान विषय में कुल 280 पद थे, लेकिन मुख्य सूची में सिर्फ 50 अभ्यर्थियों को ही सफल घोषित किया गया था। यह असामान्य आंकड़ा जांच एजेंसी को इस बात की पड़ताल करने पर मजबूर कर रहा है कि कहीं चयन प्रक्रिया में पेपर लीक का अनुचित फायदा तो नहीं पहुंचाया गया। जांच दल अब इन सभी 50 चयनित अभ्यर्थियों की भूमिका को बारीकी से खंगाल रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनकी सफलता ईमानदारी और मेरिट के आधार पर हुई है या फिर इसमें किसी प्रकार की धांधली (malpractice) शामिल है।

पेपर लीक का तरीका और माफिया से संबंध

जांच में खुलासा हुआ है कि तत्कालीन RPSC सदस्य बाबूलाल कटारा ने आयोग कार्यालय से प्रश्न पत्र को बाहर निकाला और उसे अपने सरकारी आवास तक पहुंचाया। इसके बाद, इस संवेदनशील दस्तावेज को उनके स्थापित नेटवर्क के जरिए पेपर माफिया तक पहुंचा दिया गया। SOG के अनुसार, कटारा ने यह प्रश्न पत्र पेपर लीक माफिया अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा को 60 लाख रुपए में बेचा था। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि कटारा ने अपने सरकारी आवास पर अपने भांजे विजय डामोर से पूरा पेपर रजिस्टर में हाथ से लिखवाया था। चौंकाने वाली बात यह भी है कि कटारा ने सिर्फ पैसे ही नहीं लिए, बल्कि बदले में अपने भांजे विजय डामोर के लिए भूगोल विषय का पेपर भी मांगा था। हालांकि, शेर सिंह मीणा ने परीक्षा के दिन मोबाइल पर भूगोल का पेपर भेज भी दिया था, लेकिन विजय डामोर मोबाइल चेक किए बिना ही परीक्षा केंद्र में चला गया और इस पेपर का फायदा नहीं उठा सका।

संरक्षण और व्यापक धांधली की पड़ताल

अब SOG उस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है जिसने इस भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बाबूलाल कटारा को किसका संरक्षण हासिल था, किन प्रभावशाली लोगों की मदद से वह RPSC जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद तक पहुंचे और सदस्य बनने के बाद उन्होंने किन लोगों के साथ मिलकर भर्ती परीक्षाओं में सेंध लगाई। इस जांच में राजनीतिक (political) और प्रशासनिक (administrative) गठजोड़ के कई अहम खुलासे होने की संभावना है।

क्या अन्य परीक्षाएं भी प्रभावित हुईं?

SOG यह भी जांच रही है कि कटारा के संपर्क किन नेताओं, अफसरों और अन्य पेपर माफिया से जुड़े थे और क्या उनके कार्यकाल के दौरान हुई दूसरी भर्ती परीक्षाएं भी इसी नेटवर्क के जरिए प्रभावित हुईं। यदि ऐसा पाया जाता है, तो यह राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं के इतिहास में एक बड़े घोटाले का संकेत होगा, जिसका असर हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ सकता है। यह जांच न केवल कृषि विज्ञान भर्ती के दोषियों को सजा दिलाएगी, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक मजबूत संदेश भी देगी।

यह मामला राजस्थान की भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता (transparency) और ईमानदारी (integrity) को बनाए रखने की चुनौती को रेखांकित करता है। SOG की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, उम्मीद है कि सभी दोषियों को बेनकाब किया जाएगा और भर्ती प्रक्रिया में जनता का विश्वास पुनः स्थापित हो सकेगा। इस मामले में होने वाले खुलासे राज्य की नीति-निर्धारण और प्रशासनिक सुधारों (administrative reforms) पर भी गहरा प्रभाव डाल सकते हैं।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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