पृथ्वी की गति 36 लाख साल में सबसे धीमी, जलवायु परिवर्तन मुख्य जिम्मेदार: नया शोध

समुद्र के जलस्तर वृद्धि के कारण धीमी होती पृथ्वी की घूमने की रफ्तार

एक नए शोध में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि हमारी पृथ्वी के घूमने की रफ्तार पिछले 36 लाख साल में सबसे धीमी हो गई है। वैज्ञानिकों ने इस अभूतपूर्व बदलाव का मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन और इंसानों की गतिविधियों से बढ़ते समुद्र के जलस्तर को बताया है। यह स्थिति न केवल वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी यह समझना महत्वपूर्ण है कि मानवीय गतिविधियाँ किस हद तक हमारे ग्रह को प्रभावित कर रही हैं।

लाइव साइंस की एक रिपोर्ट के अनुसार, ETH ज्यूरिख के प्रतिष्ठित भू-वैज्ञानिक मुस्तफा कियानी शाहवंदी और 'स्पेस जियोडेसी' के प्रोफेसर बेनेडिक्ट सोजा ने अपने गहन शोध में यह दावा किया है। उनका यह अध्ययन पृथ्वी की गतिशीलता पर जलवायु परिवर्तन के प्रत्यक्ष प्रभाव को रेखांकित करता है, जो पहले कभी इस दर से नहीं देखा गया था।

धरती के घूमने की रफ्तार पर जलवायु परिवर्तन का असर

शोधकर्ताओं के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी सीधे तौर पर पृथ्वी के घूमने की गति को प्रभावित कर रही है। उनका आकलन है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर हर सदी में ग्रह के घूमने की गति को एक मिलीसेकंड से थोड़ा अधिक धीमा कर सकता है। इस धीमी गति का परिणाम यह है कि प्रत्येक सदी में दिनों की लंबाई में लगभग 1.33 मिलीसेकंड की वृद्धि हो रही है। वैज्ञानिकों ने इस दर को "पहले कभी नहीं देखी गई" बताया है, जो इसकी गंभीरता को दर्शाता है।

कैसे प्रभावित होता है पृथ्वी का घूमना?

पृथ्वी का द्रव्यमान (mass) जब एक जगह केंद्रित होता है, तो वह तेज़ी से घूमती है। लेकिन समुद्र का जलस्तर बढ़ने से पृथ्वी पर पानी का पुनर्वितरण होता है। यह पुनर्वितरण ग्रह के द्रव्यमान के वितरण को बदल देता है, जिससे उसकी घूमने की गति धीमी हो जाती है। ठीक वैसे ही जैसे एक स्केटिंग खिलाड़ी अपनी बाहें फैलाकर धीरे घूमता है और उन्हें सिकोड़कर तेजी से घूमता है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पृथ्वी के घूमने की गति को कई कारक प्रभावित करते हैं। लंबे समय के नज़रिए से देखें, तो चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण खिंचाव भी एक महत्वपूर्ण कारक है। पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय के जलवायु विज्ञानी माइकल मान ने बताया कि चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण खिंचाव पृथ्वी में एक उभार पैदा करता है, जिससे इसकी घूमने की गति धीमी होती है। चंद्रमा के इस प्रभाव के कारण पृथ्वी पर दिनों की लंबाई हर सदी में लगभग 2.4 मिलीसेकंड तक बढ़ जाती है। हालांकि, मौजूदा शोध में जिस गति से पृथ्वी धीमी हो रही है, वह मानवीय गतिविधियों से प्रेरित जलवायु परिवर्तन के कारण है, जो चंद्रमा के दीर्घकालिक प्रभाव से अलग और अतिरिक्त है।

इस शोध के निहितार्थ और भविष्य की चुनौतियाँ

यह शोध हमें स्पष्ट संकेत देता है कि जलवायु परिवर्तन केवल तापमान वृद्धि या चरम मौसमी घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे ग्रह के मूलभूत भौतिकी को भी बदल रहा है। पृथ्वी के घूमने की गति में यह कमी, हालांकि मिलीसेकंड में मापी जाती है, दीर्घकाल में ग्रह के संतुलन और पारिस्थितिकी तंत्र पर अप्रत्यक्ष प्रभाव डाल सकती है। यह वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक चेतावनी है कि हमें जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को व्यापक रूप से समझने और उनसे निपटने के लिए और अधिक शोध और तत्काल नीतिगत कार्रवाई की आवश्यकता है।

यह घटना आगे चलकर वैश्विक नीतियों, पर्यावरण संरक्षण प्रयासों और यहां तक कि भविष्य की तकनीकी प्रणालियों की योजना पर भी असर डाल सकती है, जिन्हें पृथ्वी की सटीक गति पर निर्भर रहना पड़ता है। यह अध्ययन इस बात को पुष्ट करता है कि मानवीय गतिविधियाँ, विशेष रूप से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन और उसके परिणामस्वरूप बढ़ता समुद्र का जलस्तर, हमारे ग्रह पर अप्रत्याशित और दूरगामी परिणाम पैदा कर रहा है, जिन पर तत्काल ध्यान देना अनिवार्य है।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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