स्टार्टअप में नौकरी, ₹2 लाख के जूते और एक हफ़्ते में 'बाय-बाय': क्या यही है नए ज़माने की वफ़ादारी...?

स्टार्टअप में धोखाधड़ी, कर्मचारी ने 2 लाख के जूते चुराए, गली लैब्स के फाउंडर का सिरदर्द

स्टार्टअप में 'कस्टमर सर्विस' का नया मतलब: ₹2 लाख के जूते और एक हफ़्ते में 'बाय-बाय'!

वो दिन गए जब लोग अपनी पहली नौकरी से रिटायर होने का सपना देखते थे। आज के दौर में तो नौकरी हाथ में आते ही अगली की तलाश शुरू हो जाती है, लेकिन कुछ लोग इस 'तेज़ी' को एक बिल्कुल नए स्तर पर ले जाते हैं। ऐसा ही एक किस्सा सामने आया है भारतीय स्टार्टअप जगत से, जहाँ एक कर्मचारी ने नौकरी शुरू की और एक ही हफ़्ते में कंपनी को ₹दो लाख का चूना लगाकर बड़े आराम से 'टा-टा बाय-बाय' कह दिया। यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि आधुनिक भारतीय वर्कफ़ोर्स और स्टार्टअप कल्चर पर एक ज़ोरदार व्यंग्य है!

मामला है एक स्नीकर स्टार्टअप, 'गली लैब्स' का। इनके सह-संस्थापक अर्जुन सिंह ने जब X (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी आपबीती सुनाई, तो भैया, हम जैसे आम लोगों का तो सिर चकरा गया। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले उन्होंने एक कस्टमर सर्विस (CS) पर्सन को हायर किया। अब आप सोचिए, कस्टमर सर्विस का काम क्या होता है? ग्राहकों की मदद करना, उनकी समस्याओं का समाधान करना, कंपनी की इमेज चमकाना। लेकिन इस 'कर्मचारी' ने तो कस्टमर सर्विस को ही 'सेल्फ़-सर्विस' बना दिया, वो भी पूरे 100% डिस्काउंट के साथ!

'डिस्काउंट गुरु' बना कर्मचारी, स्टार्टअप का निकला दिवाला!

भारत में स्टार्टअप्स का बोलबाला है। चाय से लेकर अंतरिक्ष तक, हर जगह नए-नए आइडियाज़ पनप रहे हैं। इसी क्रम में 'गली लैब्स' जैसे फुटवीयर स्टार्टअप भी आए, जो फैशनेबल स्नीकर्स बेचते हैं। कहानी में ट्विस्ट तब आया जब इस नए CS कर्मचारी ने अपनी नौकरी के पहले ही हफ़्ते में, कंपनी के सिस्टम का इस्तेमाल करके, 100% छूट वाले डिस्काउंट कोड जनरेट कर लिए। जी हाँ, पूरे 100%! यानी जूते मुफ़्त में। सिर्फ अपने लिए नहीं, जनाब ने तो अपने दोस्तों को भी इस 'ऑफ़र' का लाभ उठाने का मौक़ा दिया। नतीजा? इन कोड्स का इस्तेमाल करके ₹दो लाख के जूते ऑर्डर कर लिए गए। और फिर, जैसे ही यह 'मिशन' पूरा हुआ, कर्मचारी महोदय ने एक हफ़्ते में ही नौकरी छोड़ दी। मानो कह रहे हों, "काम हो गया, अब मैं चलता हूँ!"

अर्जुन सिंह का दर्द X पर छलका। उन्होंने लिखा, "हमने कुछ महीने पहले एक कस्टमर सर्विस (CS) पर्सन को हायर किया था। उसने नौकरी शुरू करने के पहले ही हफ़्ते में उसने 100% छूट वाले डिस्काउंट कोड जनरेट कर लिए। इसे (अपने भी यूज़ किया और) अपने दोस्तों को भी भेजा। इन कोड्स का इस्तेमाल करके 2 लाख रुपये के ऑर्डर कर दिए। और फिर एक हफ़्ते में ही नौकरी छोड़कर चला गया।" यह सुनकर हर फाउंडर यही सोचेगा, "भई वाह! ये तो हद ही हो गई!"

यह ट्रेंड है या सिर्फ 'देसी ड्रामा एपिसोड'?

यह घटना सिर्फ 'गली लैब्स' की नहीं, बल्कि आज के दौर के कई स्टार्टअप्स की कहानी कह रही है। जहां एक तरफ़ फाउंडर्स अपने सपने को पूरा करने के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं, वहीं कुछ कर्मचारी ऐसे भी हैं जो अपनी 'स्मार्टनेस' का इस्तेमाल करके कंपनी को ही चूना लगा रहे हैं। यह सिर्फ पैसे का नुकसान नहीं, बल्कि भरोसे का भी नुकसान है। क्या यह सिर्फ एक अकेला मामला है, या यह एक नई 'ट्रेड' की शुरुआत है जहाँ लोग नौकरी को सिर्फ एक 'मौक़ा' मानते हैं, अपनी जेब भरने का, न कि करियर बनाने का?

यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि स्टार्टअप्स को सिर्फ फंडिंग और मार्केटिंग पर ही नहीं, बल्कि अपने इंटरनल कंट्रोल्स और कर्मचारी वेरिफिकेशन पर भी ध्यान देना चाहिए। क्योंकि जब 'कस्टमर सर्विस' वाला ही 'कंपनी सर्विस' करने लगे, तो फिर आप किससे उम्मीद करेंगे? यह दिखाता है कि भारत में 'नौकरी' अब सिर्फ एक अनुबंध नहीं, बल्कि कभी-कभी एक 'शॉर्ट टर्म प्रोजेक्ट' भी बन गई है – अपना काम निकालो और निकल लो।

तो अगली बार जब कोई स्टार्टअप फाउंडर अपने नए कर्मचारी को 'ऑनबोर्ड' करे, तो शायद उसे सिर्फ आईडी कार्ड और लैपटॉप ही नहीं, एक 'जासूस' भी साथ में देना चाहिए। क्योंकि इस तेज़ रफ़्तार दुनिया में, वफ़ादारी की परिभाषा शायद ₹2 लाख के स्नीकर्स के बराबर हो गई है!

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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