भारत को तेल देने वाले रूस के बड़े पोर्ट पर यूक्रेन का हमला, क्या बढ़ेगा वैश्विक ऊर्जा संकट?

बाल्टिक सागर में रूस के प्रिमोर्स्क तेल टर्मिनल पर आग, यूक्रेन ड्रोन हमले के बाद

जब पूरी दुनिया की निगाहें मध्य पूर्व में ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव पर टिकी थीं, ठीक उसी समय एक और महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जिसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों और विशेष रूप से भारत को तेल की आपूर्ति पर पड़ सकता है। यूक्रेन ने बाल्टिक सागर में स्थित रूस के सबसे बड़े तेल निर्यात टर्मिनल, प्रिमोर्स्क को निशाना बनाते हुए एक बड़ा ड्रोन हमला किया। इस हमले के बाद से पोर्ट पर ईंधन भंडारण टैंक धू-धू कर जल रहे हैं, जिससे तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यह घटनाक्रम न केवल रूस-यूक्रेन युद्ध की तीव्रता को दर्शाता है, बल्कि भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए भी नई चिंताएं खड़ी कर रहा है।

यूक्रेन के हमले से रूस का प्रिमोर्स्क तेल टर्मिनल धू-धू कर जला, भारत पर क्या होगा असर?

रविवार रात हुए इस हमले में यूक्रेन ने रूस के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यूक्रेन ने पूरी रात 249 ड्रोन दागे, जिनमें से 70 से अधिक को अकेले लेनिनग्राद के आसमान में मार गिराया गया। हालांकि, कुछ ड्रोन बाल्टिक सागर में कच्चे तेल की लोडिंग वाले रूस के सबसे बड़े बंदरगाह प्रिमोर्स्क तक पहुंचने में कामयाब रहे। हमले के बाद से यहां के ईंधन भंडारण टैंकों में भीषण आग लगी हुई है। कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और आग बुझाने का काम जारी है।

प्रिमोर्स्क बंदरगाह रूस के लिए अत्यधिक रणनीतिक और आर्थिक महत्व रखता है। यह बाल्टिक पाइपलाइन सिस्टम का अंतिम बिंदु है और प्रतिदिन लगभग 15 लाख बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को संसाधित करता है। रूस के यूराल्स क्रूड का अधिकांश हिस्सा यहीं से निर्यात किया जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इसी बंदरगाह से अक्सर भारत को भी तेल की आपूर्ति की जाती है। हमले के बाद, प्रिमोर्स्क और पास के उस्त-लुगा बंदरगाह दोनों को ही बंद कर दिया गया है, जिससे रूस से होने वाले तेल निर्यात पर सीधा असर पड़ा है।

भारत को तेल कैसे मिलता है?

विशेषज्ञों के मुताबिक, रूस के बाल्टिक पोर्ट से निकलने वाला तेल जहाजों के जरिए यूरोप या भूमध्य सागर होते हुए स्वेज नहर से गुजरता है। इसके बाद लाल सागर और अरब सागर पार करते हुए यह भारत पहुंचता है। इस समुद्री मार्ग से भारत तक पहुंचने में टैंकरों को आमतौर पर 30 से 40 दिन का समय लगता है। प्रिमोर्स्क बंदरगाह के बंद होने से इस आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान आने की आशंका है, जिससे भारत के लिए तेल आयात की लागत और समय दोनों बढ़ सकते हैं।

वैश्विक ऊर्जा संकट की नई आहट: ईरान के बाद रूस भी निशाने पर

इस हमले की टाइमिंग बेहद महत्वपूर्ण है। यह ऐसे समय में हुआ है जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी दे रखी है, जहां से प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है। अब इसमें बाल्टिक सागर पर स्थित प्रिमोर्स्क बंदरगाह का बंद होना भी जुड़ गया है, जहां से प्रतिदिन 10 से 15 लाख बैरल तेल का काम निलंबित हो गया है। दुनिया के दो सबसे बड़े 'ऑयल चोकपॉइंट' एक ही समय पर संकट की चपेट में आ गए हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बड़े संकट की आशंका बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम वैश्विक तेल कीमतों में उछाल ला सकता है, जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है और रूस उसका एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहा है। आपूर्ति बाधित होने से भारत को या तो अधिक कीमतों पर तेल खरीदना पड़ सकता है या वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ सकती है, जिसमें समय और लागत दोनों लग सकते हैं। सऊदी अरामको पहले ही एशियाई खरीदारों से लाल सागर के एक बाईपास बंदरगाह के जरिए अप्रैल की आंशिक आपूर्ति के लिए तैयार रहने को कह चुका है, जिस पर ईरान पहले ही मिसाइलों से हमला कर चुका है। यह सब वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक चुनौतीपूर्ण परिदृश्य तैयार कर रहा है।

रूस के प्रिमोर्स्क तेल टर्मिनल पर हुए हमले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। एक तरफ जहां ईरान-इज़राइल तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा मंडरा रहा है, वहीं दूसरी ओर रूस के महत्वपूर्ण तेल निर्यात बिंदु पर हमला आपूर्ति श्रृंखला को और जटिल बना रहा है। भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं, यह स्थिति चिंताजनक है। आने वाले समय में वैश्विक तेल कीमतों पर इसका क्या और कितना गहरा असर होता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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