गांधीनगर: भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि केंद्र सरकार का सेमीकॉन 2.0 मिशन डीप-टेक स्टार्टअप्स को मजबूत करने और एक मजबूत डिजाइन पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) के निर्माण पर केंद्रित होगा। उन्होंने रविवार को गांधीनगर में ‘गुजरात सेमीकनेक्ट कॉन्फ्रेंस 2026’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह पहल देश में उपकरण निर्माण और डिजाइन सुविधाओं की स्थापना को प्राथमिकता देगी, जिससे भारत के तकनीकी परिदृश्य में एक नई क्रांति आने की उम्मीद है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री वैष्णव ने स्पष्ट किया कि सेमीकॉन 2.0, अपने पूर्ववर्ती सेमीकॉन 1.0 से बिल्कुल अलग होगा। सेमीकॉन 1.0 का मुख्य उद्देश्य भारत में विनिर्माण सुविधाएं स्थापित करना था, जिसमें देश ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि इस मिशन के तहत 10 संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें से पहले संयंत्र में वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हो चुका है और दूसरा संयंत्र भी जल्द ही उत्पादन शुरू कर देगा। यह उपलब्धि भारत को सेमीकंडक्टर विनिर्माण के नक्शे पर मजबूती से स्थापित करती है।
भारत का सेमीकॉन 2.0: डिजाइन और इनोवेशन पर फोकस
वैष्णव ने रेखांकित किया कि भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण, सेमीकॉन 2.0 की सर्वोच्च प्राथमिकता एक 'डिजाइन पारिस्थितिकी तंत्र' का निर्माण करना होगा। इसका लक्ष्य डीप-टेक स्टार्टअप्स को अगला क्वालकॉम (Qualcomm), ब्रॉडकॉम (Broadcom) या एनवीडिया (Nvidia) विकसित करने का अवसर प्रदान करना है। उन्होंने स्वीकार किया कि यह एक आसान यात्रा नहीं होगी, बल्कि एक विशाल और जटिल कार्य होगा, जिसकी चुनौतियों को सरकार बखूबी समझती है और इसलिए एक यथार्थवादी तथा व्यावहारिक दृष्टिकोण अपना रही है।
इस महत्वाकांक्षी यात्रा की नींव को मजबूत करने के लिए, मंत्री ने देश में सामग्री, मशीन, उपकरण, परीक्षण और सत्यापन की एक सुस्थापित प्रणाली के महत्व पर जोर दिया। उनका मानना है कि एक मजबूत आधारभूत संरचना के बिना, डिजाइन और विनिर्माण दोनों क्षेत्रों में स्थायी प्रगति संभव नहीं है।
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प्रतिभा विकास, जो सेमीकॉन 1.0 में एक प्रमुख प्राथमिकता रही है, सेमीकॉन 2.0 में भी शीर्ष पर बनी रहेगी। वैष्णव ने बताया कि पहले संस्करण में 10 वर्षों में 85,000 इंजीनियरों को सेमीकंडक्टर डिजाइन में प्रशिक्षित करने का वादा किया गया था, जिसे भारत ने मात्र चार वर्षों में ही हासिल कर लिया है। यह दर्शाता है कि देश में प्रतिभा और सीखने की प्रबल इच्छाशक्ति मौजूद है।
20 लाख प्रतिभाओं की कमी: छात्रों के लिए अपार अवसर
वैष्णव ने वैश्विक सेमीकंडक्टर क्षेत्र के तेजी से बढ़ते आकार का भी उल्लेख किया, जो वर्तमान में 800-900 अरब डॉलर से बढ़कर एक हजार अरब डॉलर का उद्योग बनने जा रहा है। इस वृद्धि के साथ, दूसरे चरण में अनुमानित 20 लाख प्रतिभाओं की कमी छात्रों के लिए अपार अवसर पैदा करेगी। भारत इस चुनौती के लिए तैयार है। सेमीकंडक्टर 1.0 में जहां 350 विश्वविद्यालयों को जोड़ा गया था, वहीं सेमीकंडक्टर 2.0 में इस संख्या को बढ़ाकर 500 विश्वविद्यालयों तक ले जाया जाएगा। हर राज्य में ऐसे विश्वविद्यालय और कॉलेज होंगे जहां छात्र सेमीकंडक्टर डिजाइन, निर्माण, परीक्षण और सत्यापन में प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। इससे युवाओं के लिए अवसरों का एक विशाल और निरंतर प्रवाह उत्पन्न होगा।
यह पहल न केवल भारत को सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाएगी, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक बड़ा कदम होगा। डिजाइन और नवाचार पर ध्यान केंद्रित करके, भारत केवल विनिर्माण तक सीमित न रहकर, वैश्विक प्रौद्योगिकी विकास में एक सक्रिय भागीदार बनने की आकांक्षा रखता है। यह देश की अर्थव्यवस्था को गति देगा और उच्च-कुशल नौकरियों का सृजन करेगा, जिससे भारतीय युवाओं को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए सशक्त बनाया जा सकेगा।
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