ग्लोबल आउटरीच समिट-2026: भारतीय लाइफस्टाइल और परिधान उद्योग का ₹1800 करोड़ का वैश्विक लक्ष्य

ग्लोबल आउटरीच समिट-2026 की घोषणा, भारतीय लाइफस्टाइल और परिधान उद्योग का ₹1800 करोड़ का लक्ष्य

नई दिल्ली: भारतीय परिधान और लाइफस्टाइल उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा में, ब्रांड एंड सोर्सिंग लीडर्स एसोसिएशन (बीएसएल) ने हाल ही में 'ग्लोबल आउटरीच समिट-2026' के आयोजन की घोषणा की है। इस शिखर सम्मेलन का मुख्य लक्ष्य वैश्विक बाजार में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) के माध्यम से उत्पन्न होने वाले अवसरों का लाभ उठाना और भारतीय ब्रांडों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती प्रदान करना है। इस पहल के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 और 2027-28 के लिए 1800 करोड़ रुपये के व्यापार सुविधा का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो देश के लाइफस्टाइल और परिधान क्षेत्र में एक नई क्रांति ला सकता है।

यह महत्वपूर्ण आयोजन दक्षिणी दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में 28 से 30 अप्रैल तक चलेगा। समिट में वैश्विक और घरेलू कारोबारियों, खुदरा विक्रेताओं, निर्माताओं, निवेशकों के साथ-साथ नीति-निर्माताओं को एक साझा मंच पर आने का अवसर मिलेगा। उम्मीद है कि इस दौरान वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने और भारतीय वस्त्र उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

'ग्लोबल आउटरीच समिट-2026': भारतीय परिधान को वैश्विक पहचान

बीएसएल के अध्यक्ष, रमन दत्ता ने इस घोषणा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह शिखर सम्मेलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'फार्म टू फारेन' विजन से प्रेरित है, जिसका उद्देश्य 'मेड इन इंडिया' उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 1800 करोड़ रुपये का व्यापार सुविधा लक्ष्य भारत के परिधान और टेक्सटाइल पारिस्थितिकी तंत्र में वैश्विक विश्वास को दर्शाता है। यह लक्ष्य न केवल निर्यात को बढ़ावा देगा बल्कि भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को भी स्थापित करेगा।

बीएसएल के सह-अध्यक्ष, नीरज नागपाल ने इस मंच की परिकल्पना को साझा करते हुए कहा, "हम एक ऐसा शक्तिशाली प्लेटफॉर्म तैयार कर रहे हैं, जहां भारतीय ब्रांड वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेंगे। हमारा उद्देश्य भारत की समृद्ध और विविधता से परिपूर्ण टेक्सटाइल विरासत को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाना है।" उनका मानना है कि यह समिट भारतीय कारीगरों और निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा, जिससे उन्हें नए बाजारों तक पहुंचने और अपनी पहुंच का विस्तार करने में मदद मिलेगी।

यह समिट भारतीय परिधान उद्योग के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकता है। यह न केवल बड़े ब्रांडों को बल्कि छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) को भी अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकृत होने का मौका देगा। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत मिलने वाले शुल्कों में छूट और अन्य व्यापारिक सहूलियतें भारतीय निर्यातकों के लिए नए दरवाजे खोलेंगी, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे। लाइफस्टाइल और फैशन के क्षेत्र में भारत की सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक शिल्प कौशल को वैश्विक ग्राहकों तक पहुंचाने का यह एक अनूठा अवसर है।

इस शिखर सम्मेलन से भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुआयामी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। व्यापार सुविधा लक्ष्य की प्राप्ति से न केवल निर्यात आय बढ़ेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जहां वस्त्र और हस्तशिल्प उद्योग बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार प्रदान करता है। यह पहल भारतीय टेक्सटाइल और लाइफस्टाइल उत्पादों के लिए एक मजबूत ब्रांड छवि बनाने में भी मदद करेगी, जिससे दीर्घकालिक वैश्विक साझेदारी और निवेश को आकर्षित किया जा सकेगा।

'ग्लोबल आउटरीच समिट-2026' भारत को वैश्विक व्यापार मानचित्र पर एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 1800 करोड़ रुपये का लक्ष्य भारतीय परिधान और लाइफस्टाइल उद्योग की बढ़ती क्षमता और वैश्विक बाजार में उसकी महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। यह समिट भारतीय ब्रांडों के लिए एक springboard का काम करेगा, जिससे वे दुनिया भर के उपभोक्ताओं के बीच अपनी पहचान बना सकेंगे और 'मेड इन इंडिया' की साख को और मजबूत कर सकेंगे।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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